कंजूसी और फिजूलखर्च है दरिद्रता का कारण, सुनिए बाप-बेटों की यह कहानी

हमारे जीवन में धन का महत्व बहुत ज्यादा है और इसका संतुलन के साथ इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। तो आइए इस पर एक कहानी सुनिए। एक व्यक्ति था जिसके दो बेटे थे। दोनों का ही स्वभाव एक-दूसरे से अलग था। जहां एक बेटा बेहद कंजूस था। वहीं, दूसरा बहुत फिजूलखर्ची करता था। उनका पिता अपने दोनों ही बेटों से बेहद दुखी था। पिता ने कई बार कोशिश की कि वो उन्हें समझा सकते लेकिन उनका स्वभाव ज्यों का त्यों ही रहा।

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