अमरावती : आंध्र प्रदेश के नागरिक प्रशासन मंत्री बोत्सा सत्यनारायण ने लोगों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों द्वारा विधानसभा में पारित किए गए बिल को विधान परिषद में टीडीपी का अलोकतांत्रिक तरीके से नियमों के विरुद्ध रोकने को अनुचित ठहराया।

उन्होंने रविवार को यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि विधान परिषद में टीडीपी सदस्यों का रवैया देखने के बाद राज्यभर में इस बात को लेकर चर्चा छिड़ गई है कि क्या विधान परिषद की जरूरत है ? उन्होंने बताया कि विधान परिषद ने नियमों को ताक पर रख दिया है।

कुछ लोगों के राजनीतिक फायदे के लिए काम करने का आरोप लगाते हुए मंत्री बोत्सा ने कहा कि सरकार पांच करोड़ लोगों के लिए काम कर रही है, लेकिन चंद्रबाबू नायडू के समर्थन में एक अखबार जगन सरकार पर एमएलसी को प्रलोभन देने का झूठी खबरें प्रकाशित कर रही है।

उन्होंने बताया कि 1983 में जब विधान परिषद को रद्द की पहल की गई थी तब रामोजीराव ने उसका समर्थन किया था, लेकिन अब लगता है कि वह उसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू इस बात को लेकर डरे हुए है कि विधान परिषद के रद्द होने पर उनके पुत्र नारा लोकेश का पद छीना जाएगा, क्योंकि लोकेश सीधे चुनाव नहीं जीत सकते।

उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू अकसर स्वार्थ की राजनीति करते हैं और उन्हें जनता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधान परिषद के चेयरमैन शरीफ टीडीपी कार्यकर्ताओं की तरह पेश आने लगे हैं।

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चंद्रबाबू नायडू और यनमला रामकृष्णुडु को पीठ में छुरा घोंपने के ब्रांड एंबासिडर बताते हुए बोत्सा ने कहा कि राज्य के लोग जानते हैं कि इससे पहले चंद्रबाबू ने किस तरह वाईएसआरसीपी के विधायकों को खरीदी थी और नोट के बदले वोट मामले में रंगेहाथ पकड़े गए थे। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू की इन्हीं करतूतों की वजह से लोगों ने पिछले चुनाव में उन्हें सबक सिखाया है।