अमरावती : दिशा एक्ट की स्पेशल महिला ऑफिसर दीपिका पाटिल इन दिनों काफी चर्चा में है। दरअसल, बतौर स्पेशल ऑफिसर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। पदभार संभालने के बाद दीपिका पाटिल ने साक्षी समाचार से इस एक्ट को लेकर खास बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि एक्ट को लागू कराने में उन्हें कौन- कौन सी चुनाौतियों का सामना करना पड़ेगा।

पाटिल के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पीड़ितों से जुड़ी ज्यादतियों की शिकायत करने के लिए मोटिवेट करना और उन्हें जागरूक करना है। इसी के तहत सभी थानों को वुमेन्स फ्रेंडली पुलिस स्टेशन करना पहली प्राथमिकता है। इन थानों में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को अन्य पुलिसकर्मियों के मुकालबे करीब 30 फीसदी वेतन अधिक मिलेगा।

यही वजह है कि एपी दिशा एक्ट इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना है। यह एक ऐसा कानून है जो महिलओं व बच्चियों के साथ गैंगरेप, हत्या जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वालों में एक खौफ पैदा जरूर करेगा।

आंध्र की जगन सरकार ने राज्य में इस तरह की आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए दिशा कानून को विधानसभा में पास कराने के साथ ही इसकी रूपरेखा तैयार करने और क्रियान्वयन के लिए विशेष रूप से महिला आईपीएस अधिकारी दीपिका एम. पाटिल को दिशा कानून की विशेष अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है।

दिशा कानून न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे देश में आदर्श कानून साबित हो सके, इसके लिए सभी प्रकार की तैयारियां की जा रही है।

आसानी से शिकायज दर्ज करा सकेंगे पीड़ित

महिलाओं व बच्चियों के साथ गैंगरेप और हत्या जैसी घटनाओं के खिलाफ लोग आसानी से शिकायत दर्ज करा सके, इसके लिए महिला पुलिस स्टेशन, अपराध से जुड़े मामलों की जांच के लिए फोरेंसिक लैब, विशेष अदालतों की स्थापना की जाएगी। इन थानों में डीएसपी स्तर के अधिकारी सहित एसआई और कुछ पुलिसकर्मी रहेंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं व बच्चों के साथ हो रही अपराधों की जांच के लिए साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी।

100 करोड़ रुपए की मिली मंजूरी

इन थानों में, फोरेंसिक लैब, सहित अन्य संसाधनों के अलावा साइबर एक्सपर्ट्स सहित अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सरकार की तरफ से करीब 100 करोड़ रुपए मंजूर किए जा चुके हैं।

कितना सख्त होगा यह कानून

दिशा कानून की विशेष अधिकारी के रूप में नियुक्त दीपिका पाटिल के मुताबिक दिशा कानून इतना सख्त होगा कि कोई भी गैंगरेप, हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने से पहले 10 बार सोचेगा। क्योंकि यह एक ऐसा कानून है जिसके तहत दोषियों को सिर्फ 21 दिन में सजा सुनाई जाएगी। उनके मुताबिक फिलहाल इस कानून के क्रियान्वयन के लिए जरूरी संसधनों को जुटाने का काम चल रहा है और फरवरी के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

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सबसे पहले पीड़ित महिलाएं और बच्चे आगे आकर उनके साथ हुई दरंदगी के बारे में थाने में शिकायत कर सके, इसके लिए इस कानून का प्रचार करने की दिशा में पहल की जा रही है और इसके लिए समाज के सभी लोगों की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है।

बिल्कुल नया और अनोखा है दिशा एक्ट

दीपिका पाटिल के मुताबिक इस कानून का अमल बहुत ही चुनौतीभरा है, क्योंकि यह कानून बिलकुल नया और अनोखा है और इसके लिए अलग से सभी संसाधन जुटाने हैं। मुख्य रूप से राज्य के हर जिले में महिला थाने स्थापित करना, प्रति दिन हर थाने से शिकायतों की रिपोर्ट हासिल करना, उनकी त्वरित जांच आदि काम महत्वपूर्ण हैं।