शिवरामकृषणन कमेटी : आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के निर्माण के लिए सही क्षेत्र का सुझाव देने के लिए केंद्र सरकार ने शिवरामकृष्णन कमेटी का गठन किया था और इस कमेटी ने 27 अगस्त 2014 को नई दिल्ली में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस कमेटी में शिवरामकृष्णन के अलावा रथिन रॉय, अरोमर रेवी, जगन शाह और के.टी. रविंद्रन शामिल थे।

कमेटी ने राजधानी को लेकर कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक सुझाव दिए। हालंकि कमेटी ने राजधानी को लेकर किसी भी जगह के खिलाफ रिपोर्ट नहीं दी और उसने केवल जमीन की उपलब्धता और कई कारण गिनाए थे।

आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा कई विभागों को हैदराबाद से विजयवाड़ा स्थानांतरित किए जाने का हवाला देते हुए कमेटी ने विजयवाड़ा को राजधानी बनाने का प्रस्ताव पर आपत्ति जताई।कमेटी ने कहा था कि विजयवाड़ा-गुंटूर के बीच राजधानी नहीं बननी चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक और पर्यावरण की समस्याएं पैदा होंगी। हालांकि कमेटी ने कहा था मार्टूरु और विनुकोंडा के बीच राजधानी बनाना बेहतर होगा।

GN Rao Committe : आंध्र प्रदेश सरकार ने 13 सितंबर 2019 को सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जीएन राव के नेतृत्व में यह कमेटी गठित की थी और इस कमेटी ने श्रीबाघ पैक्ट के तहत विशाखापटनम में सचिवालय, मुख्यमंत्री कैंप कार्यासके लिएलय, ग्रीष्मकालीन विधानसभा और हाईकोर्ट की पीठ स्थापित करने, अमरावती-मंगलगिरी कांप्लेक्स में विधानसभा, हाईकोर्ट की खंडपीठ, राज्यपाल और मुख्यमंत्री क्वार्टर्स और कर्नूल में हाईकोर्ट स्थापित करने का सुझाव दिया था।

इसके अतिरिक्त कमेटी ने गुंटूर स्थित आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय के पास स्थित अपलैंड्स में भवनों का निर्माण करने तथा मंगलगिरी में आंध्र प्रदेश स्पेशल पुलिस का छठा बटालियन स्थापित करें। क्योंकि वर्तमान राजधानी का क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है। कमेटी ने कहा कि अमरावती में पर्याप्त निवेश हो चुका है और अब वहां विकास कार्य शुरू करने चाहिए तथा इसके लिए वहां बने भवनों का इस्तेमाल प्रशासनिक कामकाज के लिए इस्तेमाल करें।

कमेटी का कहना था कि सभी क्षेत्रों के विकास के लिए प्रशासन का विकेंद्रीकरण जरूरी है। कमेटी ने 35 हजार से अधिक लोगों से ज्ञापन मिले और 2 हजार से अधिक किसानों से सीधी बात की है। कमेटी में जी. नागेश्वर राव के अलावा प्रोफेसर अंजली मोहन, शिवानंद स्वामी, सेवा निवृत्त प्रोफेसर के.वी. अरुणाचलम शामिल रहे।

Boston Consultancy Group : आंध्र प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा गठित बोस्टन कंसल्टेन्सी ग्रुप ने 20 दिसंबर को राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। बीसीजी ने आंध्र प्रदेश को छह क्षेत्रों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। मुख्य रूप से कमेटी ने उत्तरांध्र (श्रीकाकुलम, विजयनगरम और विशाखापटनम), गोदावरी डेल्टा ( पूर्वी गोदावरी और पश्चिमी गोदावरी), कृष्णा डेल्टा (कृष्णा व गुंटूर जिला), ईस्ट रायलसीमा (कड़पा-चित्तूर), वेस्ट रायलसीमा (अनंतपुर-कर्नूल) तथा कोस्टल आंध्र (नेल्लोर-प्रकाशम) शामिल हैं।

हाई पावर कमेटी : आंध्र प्रदेश में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और तीन राजधानियों के प्रस्ताव पर जीएन राव कमेटी और बोस्टन कंसल्टेन्सी ग्रुप द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर अध्ययन के लिए एक हाई पॉवर कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी में वित्तमंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ रेड्डी, पिल्ली सुभाषचंद्र बोस, बोत्सा सत्यनारायण, मेकपाटी गौतम रेड्डी, कुरुसाला कन्नबाबू, मेकतोटी सुचित्रा, मोपीदेवी वेंकटरमणा, कोडाली नानी, पेर्नी वेंकटरामय्या, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार, पुलिस महानिदेशक, सीसीएलए, नगरनिगम आयुक्त तथा मुख्य सचिव नीलम साहनी शामिल थीं। मुख्य सचिव इस हाई पॉवर कमेटी की संयोजक रही है।

इसे भी पढ़ें :

चंद्रबाबू का खेल : अपनों को कौड़ियों के दाम तो सरकारी संस्थानों को 8 गुने दाम पर सौंपी जमीन

अमरावती में क्यों मुफीद नहीं मुकम्मल राजधानी

एक नजर में पूरा इतिहास : पांच साल में ऐसा है अमरावती का हाल

हालांकि वर्ष 2014 में चंद्रबाबू नायडू शेष आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद नई राजधानी के लिए उपयुक्त जगह निर्धारित करने के लिए तत्कालीन नागरिक प्रशासन मंत्री नारायण के नेतृत्व में सितंबर 2014 में एक सलाहकार समिति गठित की थी और इस कमेटी ने देशभर के अन्य राज्यों और उनकी राजधानियों की परिस्थितियों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस कमेटी ने अमरावती को राज्य के लिए उपयुक्त राजधानी करार दिया था।