आंध्र प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लाया गया दिशा कानून के क्रियान्वयन के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। दिशा कानून को लेकर वाईएस जगन सरकार इतनी गंभीर और सजग है कि जल्द से जल्द इस कानून को अमल में लाकर प्रदेश में महिलाओं व छोटे बच्चों के साथ होने वाली जघन्य आपराधिक घटनाओं को नियंत्रित कर सके और राज्य में सभी महिलाओं और छोटे बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।

राज्य सरकार ने इस कानून के अमल में आने पर जिन चीजों व व्यवस्था की जरूरत होगी उसके लिए जरूरी निधि आवंटन में किसी तरह की कोताही नहीं बरत रही है। इसके के तहत जिलास्तर पर दिशा थाने, विशेष अधिकारी, फोरेंसिक लैब जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसके अलावा दिशा कानून के अंतर्गत नियुक्त होने वाले पुलिस कर्मियों व अधिकारियों सहित अन्य सभी का वेतन सामान्य पुलिसकर्मियों के मुकाबले ३० फीसदी अधिक होगी, ताकि लोग वहां जाने और कार्य करने को प्रेरित हो सकें।

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ऐसा माना जाता है कि पुलिस से जुड़े लोग इस तरह की ड्यूटी में आने से कतराते हैं।इसीलिए इसमें 30 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता दिया जा रहा है, जिससे पुलिस विभाग के लोग दिलचस्पी लें और अपना अधिक से अधिक समय महिलाओं की समस्याओं को सुलझाने में अपना पूर्ण सहयोग दें।

इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि दिशा कानून के मुताबिक हर घटना की जांच 21 दिन में पूरी होनी है तो बहुत ही एक्टिव और एनर्जेटिक सहित एक्सपर्ट्स की जरूरत होगी।