अमरावती : आंध्र प्रदेश विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम पार्टी को करारा झटका लगा है। सोमवार को विधानसभा में पारित हुए तीन राजधानियों तथा सीआरडीए वापसी बिलों को मंगलवार को विधान परिषद में पेश किए गए हैं। हालांकि विधान परिषद में अपने सदस्यों की संख्या अधिक होने का फायदा उठाते हुए टीडीपी सुबह से शाम करीब 7.30 बजे तक सिर्फ नियम 71 पर चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा डालती रही।

सरकार सदन में बार-बार कहती दिखी कि विधानसभा में सोमवार को पारित हुए दोनों बिलों को सदन में पेश करने के बाद रूल ७१ पर चर्चा करने की बात दोहराती रही, लेकिन टीडीपी के सदस्य इसके लिए सहमत नहीं हुए और रूल ७१ पर चर्चा कराने की मांग करते रहे।

हालांकि टीडीपी को आज उसके कुछ सदस्यों ने झटका दिया। जहां एमएलसी डोक्का माणिक्या राव वरप्रसाद ने टीडीपी से इस्तीफा देने के साथ ही अपना त्यागपत्र पार्टी प्रमुख नारा चंद्रबाबू नायडू के पास भेज दिया और बाद में उसे मीडिया के लिए भी जारी किया।

उधर, टीडीपी ने रूल ७१ पर डिवीजन कराने की मांग की तो चेयरमैन ने डिवीजन कराया तो टीडीपी की सदस्य पी. सुनीता और श्रीनाथरेड्डी सरकार का समर्थन किया, जबकि एमएलसी शत्रुचर्ला और शमंतकमणि सदन में अनुपस्थित रहे। गौरतलब है कि विधान परिषद में टीडीपी के कुल ३२ सदस्य हैं। हालांकि सदन में भाजपा और पीडीएफ के सदस्य तटस्थ रहे। पर माना जा रहा है कि राजधानी के मामले पर भाजपा व पीडीएफ के विधायक सरकार का समर्थन करेंगे।

आंध्र प्रदेश के विधान परिषद की वेबसाइट के मुताबिक टीडीपी के २८, वाईएसआरसीपी के ९, पीडीएफ ५, निर्दलीय भाजपा के २ एमएलसी हैं. जबकि अन्य ८ लोग नामीनेटेड हैं, जबकि तीन सीटें खाली हैं। इस तरह से मौजूदा आंकड़ों के अनुसार सदन में कोई भी बिल पास कराने के लिए सरकार के पास २८ सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है।

टीडीपी के अलावा अगर नॉमिनेटेड सदस्यों सहित भाजपा और कांग्रेस सदस्यों के समर्थन मिलने पर सरकार का यह बिल आसानी से पारित हो जाएगा। क्योंकि सदन में टीडीपी के दो सदस्य सरकार के समर्थन में उतर आए हैं, जबकि दो सदस्य सदन से गौरहाजिर रहे, जबकि एक अन्य सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं।