अमरावती : आंध्र प्रदेश के नागरिक प्रशासन मंत्री बोत्सा सत्यनारायण ने सोमवार को विधानसभा में APCRDA रिअपील बिल 2020 को पेश किया। वाईएस जगन सरकार ने APCRDA के बदले में अब अमरावती मेट्रोपॉोलटन रीजन डेवलपमेंट एथोरिटी AMRDA बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि अमरावती क्षेत्र के किसानों को APCRDA के रद्द को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वाईएस जगन सरकार पहले से किसानों के साथ है और वह उनके साथ किसी प्रकार की नाइंसाफी नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि राजधानी के जमीन में बसे गांव में जमीन से वंचित लोगों को दी जाने वाली पेंशन राशि 2.5 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार रुपए की जाएगी ।

उन्होंने बताया कि राजधानी के लिए पट्टा दे चुके किसानों के समान एसाइनड जमीन देने वाले किसानों को रिटर्न प्लाट मुहैया कराए जाएंगे। जमीन दे चुके किसानों को इससे पहले उपजाऊ जमीन होने पर 50 हजार और बारिश के पानी पर निर्भर जमीन के लिए हर साल 30 हजार रुपए दस साल तक देने का निर्णय लिया था।

उस तरह, प्रति वर्ष जरी जमीन के लिए 5 हजार रुपए और बारिश पर निर्भर जमीन के लिए 3 हजार रुपए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है और यह यान्युनिटी 10 साल से बढ़ाकर 15 साल तक बढ़ाने का फैसला किया गया है। 10 साल बाद जरी जमीन को दी जाने वाली यान्युनिटी एक लाख रुपए और वर्षाधारित जमीन की यान्युनिटी 60 हजार रुपए होह जाएगी।

बोत्सा ने बताया कि चंद्रबाबू सरकार हर किसान को 800 वर्ग गज का प्लाट और 100 वर्ग गज कमर्शियल प्लाट देने का प्रावधान था, लेकिन वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार ने यहां के किसानों को अब 1,000 वर्ग गज रेसिडेंशियल प्लाट और 200 वर्ग गज में कमर्शियल प्लाट दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय असमानताओं व आवश्यकतों की वजह से राज्य का विभाजन हुहआ है। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब 5 करोड़ लोगों का कल्याण होना चाहिए ना कि किसी एक व्यक्ति या किसी एक क्षेत्र का नहीं है।

उन्होंने कहा कि हाई पॉवर कमेटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर विस्तृत समीक्षा करने के बाद ही राज्य सरकार इस नतीजे पर पहुंची की अधिकारों के विकेंद्रीकरण से राज्य का विकास संभव

उन्होंने बताया कि अमरावती के लिए जुटाई गई कुल 33 हजार एकड़ जमीन दे चुके किसानों में करीब 19970 ऐसे किसान हैं जिनकी केवल एक एकड़ जमीन थी। इसके अलावा दो एकड़ जमीन वाले 4214 किसान, 5 से 10 एकड़ वाले 529 किसान आदि शामिल हैं। ऐसे में अमरावती के लिए अधिकांश उन छोटे और दलित किसानों की ली गई है जिनके पास एक से दो एकड़ जमीन थी।