चित्तूर: आंध्र प्रदेश में शराब व नशे पर लगाम कसने के लिए सरकार हर मुमकिन कोशिश के साथ ही कार्रवाई भी कर रही है। इसी के मद्देनजर आबकारी विभाग के अधिकारियों ने चित्तूर जिले के सेंधी निर्माण केंद्रों पर शनिवार की छापेमारी में 2,900 लीटर सेंधी को नष्ट कर दिया।

इस कार्रवाई के अंतर्गत अधिकारियों ने छ: आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। 14 वाहनों को भी जब्त किया गया। 64 लीटर सेंधी को जब्त किया गया। हर बार अधिकारियों के हमले के दौरान हजारों लीटर सेंधी उपलब्ध होने की बात भी अधिकारियों ने बताई।

शराब की बिक्री और नीतियों पर सरकार की कार्रवाई से महिलाओं के साथ ही सभी समुदाय प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं। इससे पहले जहां जिले में 420 शराब की दुकानें थी उसमें से अब सिर्फ 344 ही बची हैं।

वहीं सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह सालाना 20 प्रतिशत दुकानों में कटौती करेगी। जिले में 40 से अधिक बार में से केवल 20 को ही नवीनतम अधिसूचना के साथ छोड़ दिया गया।

पहले ऐसी स्थिति थी कि शराब विक्रेता 24 घंटे के लिए गांवों में अपनी दुकान खुली रखते थे और लोग अनियमित शराब की बिक्री और शराब की दुकानों के माध्यम से कभी भी शराब प्राप्त कर सकते थे।

वहीं अब हाल यह है सरकार के ताजा फैसलों से शराब की दुकानें रात 8 बजे ही बंद हो रही हैं। कुछ लोग ऐसे भी है जो शराब से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि बार में शराब के दाम काफी अधिक है।

पिछली सरकार के समय से कुछ लोग ज्यादा कमाई के लिए सेंधी का निर्माण कर रहे हैं। ऐसे लोग आज भी अपना काम जारी रखे हुए हैं जिन्हें सरकार की ओर से लगातार बंद करने के प्रयास किये जा रहे हैं। सेंधी बनाने के काम में जिले के 8 से अधिक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। सेंधी मुख्य रूप से तमिलनाडु के सीमावर्ती क्षेत्रों में कुटीर उद्योग के रूप में चलाई जाती हैं।

अधिकारियों ने हाल ही में पाया है कि गुडीपाला, चित्तूर ग्रामीण, चित्तूर शहर, पलासमुद्रम, गंगाधरनल्लूर, बैरदीपल्ले, वालिमकीपुरम, पुलिचेरला, मुलकलचेरुवु, कुप्पम में सेंधी का उत्पादन अधिक होता है। इन इलाकों में दसियों हज़ारों आरोपी सेंधी के निर्माण के चलते हर दिन गिरफ्तार किए जा रहे हैं।

इसे भी पढ़ें :

टीडीपी नेताओं का अंधेरी रातों में चल रहा अवैध कारोबार, जानने के लिए पढ़ें खबर

TDP नेता मस्तान राव और अन्य YSRCP में शामिल, CM YS जगन ने किया पार्टी में स्वागत

आबकारी और निषेध की उपायुक्त नागलक्ष्मी का कहना है कि सेंधी के निर्माण में मजदूर और मालिक जैसा कोई अंतर नहीं है। हम निर्माण और बिक्री में गिरफ्तार लोगों के विवरण के आधार पर उन पर मुकदमा कर रहे हैं। पुलिस विभाग भी इसके लिए हमारा समर्थन कर रहा है। तीन महीने में सेंधी की बिक्री और निर्माण में हमने 40 प्रतिशत मामलों पर अंकुश लगाया है।