विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी की ऐतिहासिक "प्रजासंकल्पयात्रा" पदयात्रा पर लिखी गई पुस्तक जय हो का लोकार्पण किया गया।

ताड़ेपल्ली के सीएम कैंप कार्यालय में सीएम वाईएस जगन, द प्रिंट के एडिटर चीफ पद्मभूषण शेखर गुप्ता के हाथों सोमवार को पुस्तक का लोकार्पण हुआ।

जय हो पुस्तक का संकलन वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र मूर्ति के मार्गदर्शन में किया गया। इस पुस्तक को प्रमुख एम्सको कंपनी ने प्रकाशित किया। वाईएस जगन ने 14 महीने तक राज्य भर में जो पदयात्रा की उसकी विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं का इतिहास इस पुस्तक में दर्ज है।

3,648 किमी लंबी पदयात्रा को प्रमुख तस्वीरों के साथ इस पुस्तक में दिखाया गया है। इस कार्यक्रम में सीएम जगन, शेखर गुप्ता, रामचंद्र मूर्ति, वाईएसएआरसीपी के नेताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया।

इस अवसर पर सीएम जगन ने कहा कि प्रजासंकल्प पदयात्रा सार्वजनिक इच्छाशक्ति की एक भावना है। जो जनता से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है।

सीएम जगन जय हो पुस्तक के लोकार्पण समारोह में बोलते हुए 
सीएम जगन जय हो पुस्तक के लोकार्पण समारोह में बोलते हुए 

सीएम जगन ने कहा कि 3648 किमी की पदयात्रा करना कोई साधारण बात नहीं है, जनता की मदद से ही यह यात्रा पूरी हो सकी।

सीएम ने पदयात्रा को याद करते हुए कहा कि उन 14 महीने की यात्रा में वे हर गरीब आदमी से मिले और उसके कष्ट को करीब से देखा, उनसे बात की और उसीका नतीजा है कि 50% वोट वाईएसआरसीपी को मिले।

सीएम जगन ने ये भी कहा कि जनता ने जो भरोसा करके उन्हें चुना है वे उनके भरोसे को कायम रखते हुए उनके लिए काम करेंगे और कर भी रहे हैं।साथ ही सीएम जगन ने कहा कि मेरी पदयात्रा पर किताब लिखने वालों का मैं आभार प्रकट करता हूं।

वाईएस जगन की पुस्तक का लोकार्पण 
वाईएस जगन की पुस्तक का लोकार्पण 

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने कहा कि वाईएस जगन ने पदयात्रा के द्वारा इतिहास रच दिया। शेखर गुप्ता ने ये भी कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएसआर के सपनों को, उनकी विरासत को वाईएस जगन आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाईएसआर के साथ उनका विशेष जुड़ाव था।

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शेखर गुप्ता ने ये भी कहा कि देश में राष्ट्रीय दलों की तुलना में क्षेत्रीय दल अधिक मजबूत हैं। वाईएस जगन का नेतृत्व राज्य के लोगों की जरूरत है।

इस आयोजन में पुस्तक के लेखक रामचंद्र मूर्ति ने कहा कि अपने साढ़े चार दशक के पत्रकारिता के अनुभव में पदयात्रा पर पुस्तक लिखना सबसे विशेष बात रही। ये पुस्तक लिखना उनके लिए गर्व की बात है।