विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश में बिजली की खरीद से जुड़े समझौतों पर शुक्रवार को विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गरमा-गरम बहस हुई। मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने विद्युत खरीद से जुड़ी पिछली सरकार की नीतियों को आधार के साथ सदन में रखा। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर मामले में कुत्ते की पूंछ की तरह पेश आ रहा है।

सदन में विद्युत खरीदी पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत खरीदी से जुड़े समझौतों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने बगैर जरूरत के अधिक दर पर बिजली खरीदी है।

उन्होंने बताया कि जनहित को ध्यान में रखकर टीडीपी सरकार के कार्यकाल में हुए विद्युत समझौतों की समीक्षा के लिए कमेटी गठित की गई है, लेकिन उस एक्सपर्ट कमटी को लेकर चंद्रबाबू सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। नेता सदन ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही अजय कल्लम और विद्युत सचिव पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पीपीए पर समीक्षा का नाम सुनते ही चंद्रबाबू घबराने लगे हैं। एपीईआरसी हमारे राज्य के आरपीओ को निर्देश देता है। 2015-16 में आरपीओ 5 फीसदी तय किया गया था, लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने 5.50 फीसदी खरीदी थी। उसी तरह 2016-17 में 5 फीसदी आरपीओ निर्धारित किया गया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने 8.6 फासदी खरीदी। इससे वित्त वर्ष 2016-17 में आरपीओ 11 फीसदी निर्धारित किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने 23.4 फीसदी खरीदा था।

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इससे सरकार पर वर्ष 2016-17 में आरपीओ 430 करोड़, 2017-18 में 924.9 करोड़, 2018-19 में 1292.8 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा। उन्होंने कहा कि अधिक दाम पर बिजली खरीदने के बहाने कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले समझौते किए गए। उन्होंने कहा कि टीडीपी सरकार ने 2654 करोड़ रुपए में बिजली खरीदी थी।