विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य में व्याप्त पानी का संकट, कम बारिश और किसान समस्याओं को लेकर गुरुवार को विधानसभा में कई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए उपयोगी सभी कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं और हमने चुनाव से पहले दिए गए लगभग सभी आश्वासनों को सरकार में आने के एक महीने के भीतर पूरे किए हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों के खुश रहने से ही राज्य में खुशहाली छाती है और यही सोचकर किसानों के लिए वाईएसआर रैतु भरोसा योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि किसानों के लिए 2 हजार करोड़ से आपदा राहत कोष गठित किया गया है। राज्य में 62 फीसदी किसान होने का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सालाना हर किसान परिवार को 12.500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

इस मौके पर वाईएस जगन ने सदन में लगी एक स्क्रीन पर ऋण माफी को लेकर 2014 के चुनाव के दौरान टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू द्वारा दिए गए आश्वासन को दिखाया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार को बीज के लिए 384 करोड़ रुपये देने चाहिए थे, लेकिन उसने नहीं दिए। इसलिए अब उक्त राशि का भुगतान अब वाईएसआरसीपी की सरकार ने किया है।

वाईएस जगन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों को 7 लाख रुपये का मुआवजा देने के अलावा 15 अक्टूबर से रैतु भरोसा योजना पर अमल किया जाएगा। यही नहीं, तीन हजार करोड़ रुपए का कार्पस फंड की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य के 16 लाख बटाईदार किसानों को भी रैतु भरोसा योजना के अंतर्गत लाया जाएगा, जोकि देश के इतिहास में एक नया रिकार्ड होगा। उन्होंने कहा कि वाईएसआर जलयज्ञम के जरिए सभी सिंचाई परियोजनाएं पूरी की जाएंगी।

वाईएस जगन ने कहा कि राज्य में 48.3 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। 1 जून से 10 जुलाई तक मानसून से 135.5 मिलि मीटर बारिश दर्ज होनी थी, लेकिन अब तक केवल 71 मिली मीटर बारिश ही दर्ज हुई है।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर खरीफ में 42 लाख हेक्टेयर में खेती होती है। हर साल 1 जून से 10 जुलाई तक औसतन 9.10 लाख हेक्टेयर में बीज और रोपण का काम पूरा होता है। इस वर्ष केवल 3.2 लाख हेक्टेयर में बीज बोए गए हैं। बारिश में देरी हुई। गांव में पानी का संकट पैदा हुआ है, लेकिन इनसबसे निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सीएम जगकन ने कहा, ' कुछ अन्य बातें और सच्चाई सदन में रखना चाहता हूं। हम सत्ता में आकर सिर्फ 45 दिन हुए हैं। बावजूद इसके ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए हम तैयार हैं। इस सदन में बैठे अधिकांश लोग ये जानते ही होंगे। 2013-14 में एक तरफ गंभीर सूखा तो दूसरी तरफ तूफान से राज्य में तबाही मची थी।

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पिछली सरकार ने किसानों की 2,300 करोड़ की इनपुट सब्सिडी का भुगतान नहीं किया था। पिछले पांच वर्षों में राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति देखी है। पिछली खरीफ में सूखे से निपटने के लिए 1,800 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया था, लेकिन केंद्र सरकार के 900 करोड़ रुपए देने के बावजूद यहां के किसानों को नया पैसा नहीं दिया गया। बीज संग्रहण अप्रैल तक खत्म होकर मई महीने में उन्हें किसानों में वितरित करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होने से बीज के लिए किसानों को अब सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

बीज संग्रहण के लिए फंड्स जारी करने की अपील करते हुए अधिकारियों के पत्र लिखने के बावजूद पिछली सरकार ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। पांच सालों में ऋणों का री शेड्यूल और किसानों का ब्याज भुगतान करने की सोच नहीं रही। 87 हजार करोड़ के ऋण माफ करने का आश्वासन देकर सत्ता में आते ही यह राशि घटाकर 24 हजार करोड़ कर दी गई।'

उन्होंने बताया कि वाईएसआर मुफ्त फसल बीमा योजना के तहत 55 लाख किसानों को 2,164 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किया जा रहा है। मूंगफली किसानों को प्रति क्विंटल 1,500 रुपए के हिसाब से 300 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

उसी तरह, ऑयल फाम किसानों को अतिरिक्त समर्थन मूल्य के तहत 80 करोड़ रुपये जारी करने के साथ ही किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए लोग्रेड तंबाकू दाम बढ़ाकर खरीदा जा रहा। विधायकों को मार्केट कमेटी के मानद चेयरमैन नियुक्त किया जा रहा है ताकि उन्हें भी पता चला कि किसानों को किस तरह का लाभ पहुंच रहा है, समर्थन मूल्य कैसे मिलेगा और इस बाबात सरकार को किस तरह की सिफारिश करनी चाहिए।

पिछली सरकार के धान संग्रहण से जुड़े 960 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान के तहत 300 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और एक्वा किसानों को प्रति यूनिट बिजली 1.50 रुपये की दर से दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में बकाया 2 हजार करोड़ की इनपुट सब्सिडी का भुगतान किया जाएगा और कृषि टैक्टरों का रोड टैक्स रद्द करेंगे। सत्ता में आने के एक महीने के भीतर कृषि मिशन गठित किया गया।

हर महीने कृषि मिशन क्षेत्रीय स्तर पर पर्यवेक्षण करेगा। डीसीआरीबी के आंकड़ों के मुताबिक पिछली सरकार के शासनकाल में 1,531 किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन अब तक केवल 391 किसानों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी गई है।

सहायता राशि नहीं मिलने वाले बाकी किसानों की मदद की जाएगी। 2014-19 के दौरान आत्महत्या कर चुके किसानों के परिजनों को 7-7 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए संबंधित जिलाधीशों को आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि दो हजार करोड़ से आपदा राहत कोष बनाया जा रहा है और खरीफ में नुकसान होने पर रबी में उनकी मदद की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 16 लाख बटाईदार किसानों के लिए भी वाईएसआर रैतु भरोसा योजना लागू करने का फैसला किया गया है। देश के इतिहास में यह एक रिकार्ड है। उन्होंने कहा कि राज्य में जरूरत के मुताबिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के अलावा हर निर्वाचन क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज, गोदाम बनाए जाएंगे।

बेहतर उर्वरक, बीज और कीटन नाशकों की गुणवत्ता तय करने के लिए हर निर्वाचन क्षेत्र में एक लेबोरेटरी बनेगी। उन्होंने बताया कि तालाबों का पुनरुद्धार होगा और सिंचाई परियोनजाओं पर इंजीनियरों की एक कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार को मुनाफा हो, ऐसे रिवर्स टेंडरिंग होगी।

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वाईएस जगन ने बताया कि अगले साल से सहकारिता किसानों को दूध देने पर प्रति लीटर 4 रुपए बोनस में देंगे। जल्द ही शुरू होने वाले ग्राम सचिवालय और वालेंटियरों द्वारा हर परिवार का कल्याण करेंगे। बारिश की कमी के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के आदेश दिए गए हैं।

पेयजल समस्या का तत्काल समाधान के लिए हर निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक करोड़ रुपये मंजूर करेंगे। विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा कर पेयजल समस्या का समधान करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष और उनके विधायकों को भी एक करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे और वे भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में पीने के पानी का संकट न रहे, ऐसा देखना चाहिए।