हैदराबाद : आंध्र प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाने वाली पोलावरम सिंचाई परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के बीच आपसी खींचतान के चलते लगातार लटकती गई। वैसे इस परियोजना का आधिकारिक नाम इंदिरा सागर बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसे पोलावरम परियोजना के नाम से आंध्र प्रदेश व उसके आसपास के राज्यों के लोग जानते हैं।

वैसे इस परियोजना के पूरा होने से 2.91 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकती है और लगभग 960 मेगावॉट बिजली पैदा हो सकती है। इसके साथ ही साथ आंध्र प्रदेश के 540 गांवों और उद्योगों की जल संबंधी आवश्यकता पूरी करके यहां का कायाकल्प किया जा सकता है। लेकिन राज्य सरकार की मनमानी और केन्द्र सरकार के रवैये ने परियोजना को बुरी तरह प्रभावित करने का काम किया है।

नीतिन गडकरी व चंद्रबाबू
नीतिन गडकरी व चंद्रबाबू

हालांकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अक्सर इस योजना को लेकर अपनी वाहवाही करने की कोशिश किया करते थे और परिजना को समय पर पूरा न करने के पीछे केन्द्र सरकार को दोष देते रहे। हमेशा वह एक ही बात कहते थे कि... ‘केंद्र से पैसे मिलते ही परियोजना का काम पूरा कर दिया जाएगा।

राष्ट्रीय परियोजना घोषित

हालांकि केन्द्र सरकार ने 31 दिसंबर 2018 को संसद में बताया कि पोलावरम सिंचाई परियोजना (पीआईपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। मंत्री ने कहा, ‘‘भारत सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के बाद पोलावरम सिंचाई परियोजना पर आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा किए गए खर्च की प्रतिपूर्ति कर रही है।’’

राज्यसभा में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य वाई एस चौधरी के एक सवाल के जवाब में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्च सदन को बताया था कि, ‘‘पोलावरम सिंचाई परियोजना को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 90 के तहत राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है।’’

नीतिन गडकरी व चंद्रबाबू
नीतिन गडकरी व चंद्रबाबू

परियोजना की धीमी प्रगति के बारे में परियोजना के अधीक्षक अभियंता रमेश बाबू ने बताया है कि परियोजना पर विचार विमर्श तो वर्ष 1941 में शुरू हो गया था लेकिन इस पर काम वर्ष 2005 में शुरू हुआ। इसे पूरा करने के प्रयासों में वर्ष 2015 में, आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, तेजी आई। उन्होंने बताया कि 54 फीसदी काम पूरा हो चुका है और बाकी का दिसंबर 2019 तक पूरा हो सकता है। पर ऐसा कहां संभव दिखता है।

सरकारी अधिकारी व चंद्रबाबू कहा करते थे कि पुनर्वास का काम कुछ हद तक पूरा हो चुका है। केंद्र जब भी पैसा देगा, हम बाकी काम पूरा कर लेंगे।

खूब पीटा ढिंढोरा

चंद्रबाबू नायडू का ध्यान उस परियोजना को समय पर सही तरीके से पूरा करने के बजाय अपने काम का ढिंढोरा पीटने का ज्यादा था। इसीलिए वह इस मामले को भुनाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते थे। 7 जनवरी 2019 को चंद्रबाबू ने दावा किया कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए पोलावरम बहुद्देशीय परियोजना के इंजीनियरों और कामगारों ने 24 घंटे में 32,315.5 घनमीटर कंक्रीट के इस्तेमाल से निर्माण कार्य किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधियों ने इस कार्य को खुद देखा और इसे नया वर्ल्ड रिकॉड करार दिया। परियोजना स्थल पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को एक कार्यक्रम में इस आशय का सर्टिफिकेट प्रदान किया।

नीतिन गडकरी व चंद्रबाबू
नीतिन गडकरी व चंद्रबाबू

बताया गया कि कंक्रीट भरने का कार्यक्रम रविवार सुबह आठ बजे से 24 घंटे तक चला जिसे नायडू ने ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड दुबई में अल-राशिद टॉवर के निर्माण में बना था, जहां मई 2017 में 21,580 घनमीटर कंक्रीट डालकर निर्माण कार्य किया गया था।

केन्द्र ने दिए 1,400 करोड़

21 मार्च 2019 को केन्द्र सरकार ने आंध्र प्रदेश को पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए 1,400 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। उस समय जारी आदेश में कहा गया था कि जल संसाधन मंत्रालय को पोलावरम परियोजना के वित्तपोषण के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1,400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने की स्वीकृति दी गई है। उचित प्राधिकरण द्वारा व्यय निश्चित होने और ऑडिट लंबित रहने तक यह अंतरिम उपाय किया गया है।