हैदराबाद : एकीकृत आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी ने बहुपोयगी ड्रीम प्रोजेक्ट पोलावरम (इंद्रसागर) के निर्माण कार्यों का जायजा लेने के लिए उनके मुख्यमंत्री पुत्र वाईएस जगन मोहन रेड्डी आज पोलावरम पहुंच रहे हैं।

गौरतलब है कि वाईएसआर के शासनकाल में लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुकी पोलावरम परियोजना के बाकी काम पिछले डेढ़ दशक से रुक गए थे। पिछली चंद्रबाबू सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने की बजाय इस परियोजना के नाम पर दिखावा करने के लिए करोड़ों रुपए फूंक दिए।

पिछले नौ वर्षों से लगातार लोगों के बीच बिताने वाले वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी ऐतिहासिक प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान राज्य के लोगों को आश्वासन दिया था कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर वह अपने पिता के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पोलावरम परियोजना को पूरा कर राज्य के आधे से अधिक हिस्से को हराबरा करेंगे।

वादा पूरा करने की दिशा में पहल

इसी के तहत हाल के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ सत्ता संभालने वाले वाईएस जगन आज बतौर राज्य के मुख्यमंत्री की हैसियत से पोलावरम परियोजना की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने जा रहे हैं ताकि सभी लंबित काम पूरा कर जल्द से जल्द उसका शुभारंभ कर सके। जगन मोहन रेड्डी ने इस परियोजना की काम को समय से पूरा करने के लिए एक कमीशन बनाया है जो सारे कामों का जायजा लेगा और समीक्षा भी करेगा।

आंध्र प्रदेश में पेयजल और सिंचाई जल नहीं होने से परेशान राज्य के लोगों को देखकर वाईएसआर ने पोलवरम परियोजना के निर्माण का फैसला किया था और इसके लिए जरूरी अनुमतियां हासिल करने के लिए उन्होंने केंद्र पर दबाव बनाया था।

वाईएसआर के शासन में पूरा हुआ 70 फीसदी काम

वाईएसआर के पहले कार्यकाल में जलयज्ञम के तहत पोलवरम को छोड़ लगभग सभी सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण पूरा कर उनका उद्घाटन किया गया। वाईएसआर जब दूसरी बार चुनकर सत्ता में आए तो उस वक्त पोलवरम परियोजना का काम लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका था। परंतु सत्ता में आने के चार महीने बाद ही उनका हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन हो गया।

वाईएसआर के बाद राज्य में तीन मुख्यमंत्री बने, लेकिन वे इन परियोजनाओं को पूरा नहीं कर पाए। वाईएसआर ने 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से पोलवरम परियोजना के निर्माण शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे अब यह राशि बढ़कर 60 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। वाईएसआर जीवित रहते परियोजना पर करीब 5,500 करोड़ रुपये खर्च कर चुके थे। वाईएसआर के मुख्यमंत्री बनने से पहले लगभग 9 वर्षों तक राज्य पर शासन करने के बाद भी चंद्रबाबू ने पोलावरम का जिक्र तक नहीं किया था।

वाईएसआर के निधन के बाद से उनके पुत्र व वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी पोलावरम परियोजना के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं। इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग को लेकर वाईएस जगन कई किलो मीटर की यात्रा करने के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बाबत कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं।

पोलावरम को लेकर बाबू सरकार पर लगते रहे गंभीर आरोप

पोलावरम परियोजना की निर्माण लागत 10 हजार से बढ़ाकर 60 हजार करोड़ रुपए करने के फैसले से लेकर परियोजना के विभिन्न कार्यों में भ्रष्टाचार और धांधलियों के आरोप लगते रहे हैं। कैग ने राज्य की तत्कालीन चंद्रबाबू नायडू सरकार पर पोलावरम परियोजना के ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए1853 करोड़ की रियायत देने की बात कही थी।

इसके अलावा जल संसाधन मंत्रालय ने भी बाबू सरकार की जमकर खिंचाई की थी। केंद्रीय मंत्री नीतिन गड़करी ने पोलावरम परियोजना का दौरा कर वहां जारी कार्यों का जायजा लेने के बाद तत्कालीन बाबू सरकार को परियोजना से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों के साथ दिल्ली तलब किया है।

नीतिन गड़कारी ने पोलावरम परियोजना में हो रहे विलंब के लिए चंद्रबाबू नायडू सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। बाबू सरकार ने पोलावरम परियोजना के विस्थापितों के साथ विश्वासघात किया है और उन्हें जमीन का उचित मूल्य का भुगतान नहीं किया है।