एडिटोरियल डायरेक्टर के. रामचंद्रमूर्ति की कलम से

आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए खुशी और जश्न मनाने का समय आखिर आ ही गया। राज्य के लोगों ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो वाईएस जगन मोहन रेड्डी को वोट दिया है, जिन्होंने एक चैंपियन की तरह चुनाव लड़ा है। उन्होंने पार्टी में जोश भरकर एक अनोखे अंदाज में चुनाव लड़ा है।

जगनमोहन रेड्डी 14 महीने तक 3500 किलो मीटर से अधिक दूरी तक चली अपनी प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान एक करोड़ से अधिक लोगों से मिले। देश में इस तरह का कारनामा अभी तक भारत में किसी राजनेता ने नहीं किया है। उन्होंने जो उत्पीड़न सहा है, उतना देश का किसी राजनेता ने नहीं झेला है। जगन मुस्कुराते हुए जेल में गए और 16 महीने बाद मुस्कुराते हुए ही जेल से बाहर आए। राज्य सरकार और राजनीतिक विरोधियों के हमलों का डटकर सामना करने के लिए धैर्य और असाधारण शक्ति की जरूरत होती है।

केंद्र की तत्कालीन संप्रग सरकार और आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार के इशारे पर सीबीआई ने जगन मोहन रेड्डी की सभी तरह के वित्तीय स्रोत बंद करने के अलावा उनके सभी बैंक खाते सीज कर उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए।

वाईएस जगन ने न केवल सबसे बेइमान और दमनकारी राजनेता चंद्रबाबू सरकार के हमलों का सामना किया बल्कि उनके खिलाफ अपनी और लोगों की आवाज बुलंद की। विशाखापटनम हवाई अड्डे पर जब वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर हमला हुआ था, तब भी चंद्रबाबू और उनके गुंडों ने पार्टी नेताओं के नाम पर वाईएस जगन का मजाक उड़ाया था।

2014 के चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी बहुत कम मार्जिन मतलब सिर्फ दो फीसदी वोट से हारी थी। इस बार वाईएसआरसीपी ने कुछ नए रिकार्ड कायम किए हैं। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 20 से अधिक सीटों पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने जीत का परचम लहरा कर नया इतिहास रचा है।

1977 में एकीकृत आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने 42 लोकसभा सीटों में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी और यहां से केवल नीलम संजीव रेड्डी देश के राष्ट्रपति बनाए गए थे।

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों के साथ सभी हिन्दी भाषी राज्यों की सभी लोकसभा सीटों पर जीती थी और इस बार भी भाजपा का प्रदर्शन लगभग उसी तरह से देखने को मिला है।

1984 में पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के बाद कांग्रेस पार्टी को इसी तरह की जीत हासिल हुई थी, लेकिन हम अगर आंध्र प्रदेश की बात करें, तो इस तरह का रिकॉर्ड वाईएस जगन का है। यही नहीं, किसी एक राजनीतिक दल को चुनाव में डाले गए वोट का 50 फीसदी वोट मिलने का रिकॉर्ड भी वाईएसआरसीपी ने बनाया है।

वाईएस जगन आंध्र प्रदेश के सबसे उम्र के मुख्यमंत्री बनेंगे। विधानसभा में विपक्ष का केवल 20 सीटों पर सिमटना भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वाईएस जगन मोहन रेड्डी राज्य और केंद्र में बगैर किसी मंत्री पद हासिल किए सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चुनौतियों का सामना करने के साथ ही वचनबद्ध हैं और वह कभी दबाव में नहीं आए। अपने खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जाने के बावजूद वह16 महीने तक जेल में रहे, लेकिन उन्होंने कभी न सीबीआई पर आरोप लगाया और न ही न्यायपालिका पर सवाल उठाया। जगन अपनी ऐतिहासिक प्रजा संकल्प पदयात्रा के दौरान हर शुक्रवार को अदालत में पेश होते रहे और उन्होंने कभी ऐसा आश्वासन नहीं दिया, जिसे पूरा करना मुश्किल है और वह कभी अपनी बातों से मुकरे नहीं हैं। उन्होंने कभी दलबदलू राजनीति को बढ़ावा नहीं दिया है।

उदाहरण के लिए 2018 में नंद्याल विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव के दौरान टीडीपी से एमएलसी निर्वाचित शिल्पा चक्रपाणी ने वाईएसआरसीपी में शामिल होने की इच्छा जताई तो वाईएस जगन ने टीडीपी से इस्तीफा देने के बाद ही पार्टी में शामिल करने की बात कही थी। परंतु इसके बिल्कुल विपरित चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 23 विधायकों को टीडीपी में शामिल करने के साथ ही उनमें से 4 विधायकों को अपने मंत्रिमंडल में मंत्री भी बना दिया। इस मामले में देश में वाईएस जगन ही एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने दलबदलू विरोधी कानून का सम्मान किया।

यहां तक की भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले दो विधायकों को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल किया था। चुनाव में टीडीपी को जिस तरह का झटका लगा है, उसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। इस बात का अहसास खुद चंद्रबाबू नायडू को 11 अप्रैल की सुबह 10 बजे हुआ था, जब राज्य के लोग टीडीपी के खिलाफ वोट डाल रहे थे। इसीलिए उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाया था।

उन्होंने एक-तिहाई ईवीएम के काम नहीं करने का दावा करते हुए पुनर्मतदान करने की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के साथ ही 21 राजनीतिक दलों को एक साथ लेकर चुनाव आयोग के सामने प्रदर्शन दिया था।

चंद्रबाबू नायडू जिस तरह विपक्ष की एकजुटता के लिए काम करने के नाम पर अपने निजी हैलीकाप्टर से एक के बाद एक राज्य का दौरा किया, लेकिन उनका यह पैतरा सफल नहीं रहा। विपक्षी दलों के अधिकांश नेता चुनावी नतीजे आने तक चंद्रबाबू नायडू से मिलने के मूड़ में नहीं दिखे। इस बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद चंद्रबाबू नायडू अब बार-बार दिल्ली का दौरा नहीं कर सकेंगे।

चंद्रबाबू नायडू दुनियाभर के देशों के चक्कर लगाने, अमरावती को विश्वस्तरीय राजधानी के निर्माण का दावा करते हुए केवल अधिकारियों व पार्टीजनों के साथ वीडियो कांफ्रेन्स के आयोजन में अपने पांच साल का कार्यकाल बर्बाद कर दिया है। चंद्रबाबू के पांच सालों में अमरावती के स्थाई निर्माण के लिए एक भी ईंट नहीं लगाई। राजधानी के निर्माण के डिजाइन के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिए। पोलावरम परियोजना भी चंद्रबाबू नायडू की सबसे बड़ी विफलता है।

इस बृहत परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की थी, लेकिन चंद्रबाबू ने अनावश्यक परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी ले ली। यही नहीं, चंद्रबाबू को केंद्र से मिलने वाली निधि तक देने से इनकार कर दिया गया। इसके अलावा पोलावरम परियोजना के निर्माण में कई समस्याएं सामने आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि पोलावरम परियोजना टीडीपी के लिए एटीएम साबित हुई है।

आखिर में चंद्रबाबू नायडू के पांच वर्ष में ऐसी कोई उपलब्धि नहीं रही कि वे चुनाव में लोगों को बता सके। चंद्रबाबू 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में दिए गए आश्वासनों को भी पूरा नहीं किया। राजग से नाता तोड़ना उनके लिए फायदेमंद साबित नहीं हुआ। अगर भाजपा के साथ टीडीपी यदि अपना गठबंधन जारी रखी होती, तो देश में इस बार भी चली मोदी सेंटीमेंट की बदौलत पार्टी को कुछ और सीटें जरूर मिली होतीं। आंध्र प्रदेश में मोदी विरोधी लहर बनाने की चंद्रबाबू की कोशिश भी विफल रही।

चुनाव में नरेंद्र मोदी, तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव और वाईएस जगन मोहन रेड्डी के बीच अंदरूनी सांठगांठ की खबर फैलाकर आंध्रवासियों को रिझाने की चंद्रबाबू की रणनीति भी कारगर साबित नहीं हुई। आंध्रवासियों को कांग्रेस और टीडीपी की दोस्ती भी रास नहीं आई। चंद्रबाबू नायडू की ब्रैंड पॉलिटिक्स, छल, चालाकी और भ्रष्टाचार को राज्य के लोगों ने नकार दिया है।

चंद्रबाबू के शासनकाल में भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर जन्मभूमि कमेटियों में चरम पर रहा। राज्य में रेत माफिया, भू-माफिया और शिक्षा माफिया का बोलबाला रहा है। राज्य में मुख्य सचिव के रूप में काम कर चुके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बदसलूकी हुई है। अवैध रेत खनन को रोकने वाली महिला तहसीलदार को सत्तारूढ़ टीडीपी के विधायक द्वारा बाल पकड़कर सरेआम घसीटा गया। टीटीडी के मुख्य पुजारी का अपमान करने के साथ ही उन्हें पद से बेदखल किया गया।

सत्तारूढ़ पार्टी की जनविरोधी रवैये के अलावा पुलिस भी सत्तारूढ़ पार्टी के एजेंट और नौकरों की तरह काम करती रही, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था बदहाल स्थिति में थी। इस तरह 1983 के बाद पहली बार टीडीपी और कांग्रेस पार्टी की करारी हार हुई है। यह लड़ाई स्ट्रेट फारवर्ड, मूल्यों की राजनीति और जोड़-तोड़ की राजनीति के बीच की है।

आंध्र प्रदेश के लोगों ने जगन मोहन रेड्डी की लोगों पर केंद्रित राजनीति को अपना समर्थन दिया है। वाईएस राजशेखर रेड्डी के 9 वर्षों के शासनकाल के बाद उनके बेटे वाईएस जगन सभी तरह के समस्याओं व बाधाओं के खिलाफ लड़ते रहे हैं।

दुनिया की सबसे 10 ताकतवार राजनेताओं में से एक रही सोनिया गांधी की अनुमति से वाईएस जगन अपने पिता वाईएस के निधन की खबर सुनकर मरने वाले लोगों के पीड़ित परिवारों का ढांढस बांधना चाहते थे, लेकिन राज्य में लोगों को मिलते जनसमर्थन को देख सोनिया गांधी हजम नहीं कर सकी। सोनिया गांधी के गुर्गे और चंद्रबाबू नायडू ने एक साजिश रची और वाईएस जगन मोहन रेड्डी की आय से अधिक संपत्ति के मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से सीबीआई को जांच का आदेश दिलवाया।

इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही वाईएस जगन को जेल भेज दिया गया और उन्हें 16 महीने तक जमानत नहीं दी गई। इसपर वाईएस जगन की बहन शर्मिला ने आंध्र प्रदेश के एक कोने से दूसरे कोने तक पदयात्रा की। 2014 के चुनाव के लिए जगन के पास इतना समय नहीं रहा कि वे जेल से बाहर आकर चुनाव की तैयारी कर सके। यही वजह रही कि 2014 के चुनाव में बहुत कम मार्जिन से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी हार गई।

परंतु इस बार वाईएस जगन ने ऐतिहासिक पदयात्रा शुरू कर चुनाव की रणनीति बनाई। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों का सही चयन, उनके चुनावी भाषण और लोगों को प्रेरित करने वाले भाषण काफी सफल साबित हुए और चंद्रबाबू नायडू सरकार खत्म हो गई। 30 मई को वाईएस जगन मोहन रेड्डी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ ही वादे के मुताबिक राज्य में राजन्ना राज्यम बहाल करेंगे।

1982 में टीडीपी ने स्थापना के 9 महीने के भीतर 1983 में हुए विधानसभा चुनाव में एनटी रामाराव के नेतृत्व में टीडीपी ने इसी तरह की बड़ी जीत दर्ज की थी। 1994 में भी एनटीआर के नेतृत्व में टीडीपी ने इसी तरह की जीत हासिल की थी, लेकिन वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पार्टी स्थापित करने के 9 साल बाद राज्य में रिकार्ड जीत दर्ज की है।