विशाखापटनम : विशाखापटनम के आरके बीच रोड पर स्थापित दासरी नारायण राव, अक्कीनेनी नागेश्वर राव, नंदमूरी हरिकृष्णा की प्रतिमाओं को हटाने के पीछे राज्य के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू का हाथ होने के आरोप लग रहे हैं।

पूर्व राज्यसभा सदस्य व प्रोफेसर यार्लागड्‍डा लक्ष्मी प्रसाद ने यहां 'साक्षी' से बातचीत में कहा कि सीएम चंद्रबाबू नायडू के आदेश पर जिलाधीश और जीवीएमसी आयुक्त ने बीच रोड पर लगी प्रतिमाएं सोमवार देर रात हटाई गई हैं। उन्होंने कहा कि बीच रोड पर स्थापित इन प्रतिमाओं को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है, इसके बावजूद रातों-रात प्रतिमाएं हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

यार्लागड्‍डा लक्ष्मी प्रसाद का कहना था कि चुनाव के दौरान अक्कीनेनी नागेश्वर राव के अभिनेता बेटे नागार्जुन, दासरी नारायण राव के बेट अरुण के वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वाईएस जगन से मिलने के कारण चंद्रबाबू बौखला गए हैं। जगन से अभिनेताओं की मुलाकात को हजम नहीं कर पाने के कारण ही चंद्रबाबू ने एक साजिश के तहत उनके पिताओं की प्रतिमाओं को हटवा दिया है।

प्रतिमाएं हटाने का दृश्य
प्रतिमाएं हटाने का दृश्य

यार्लागड्डा ने याद दिलाया कि इससे पहले उन्होंने राज्य में जल्द ही वाईएसआर का शासन दोहराने, वाईएसआर के शासनकाल में तेलुगु भाषा का दायरा बढ़ने और अब वाईएस जगन के मुख्यमंत्री बनने पर फिर से तेलुगु भाषा की लोकप्रियता और महत्व बढ़ने की बात कही थी। उनके इसी बयान से नाराज चंद्रबाबू ने उनके (यार्लागड्डा) द्वारा स्थापित प्रतिमाओं को हटवा दिया है।

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उन्होंने कहा कि बीच रोड पर डॉ.सी. नारायण रेड्डी, अल्लू रामलिंगय्या, जालादी, नेदुनूरी कृष्णमूर्ति, तिरुपति वेंकट कवुलु, गुर्रम जाशुवा, विश्वनाथ सत्यनारायण आदि की प्रतिमाएं लगी हैं। उन्हें भी किसी तरह की अनुमति प्राप्त नहीं है, जिनमें से पांच प्रतिमाओं की स्थापना खुद उन्होंने की था।

उन्होंने कहा कि यह बताना होगा कि जनसेना के नेता एम.सत्यनारायण ने केवल इन तीन प्रतिमाओं के खिलाफ ही अदालत में मामला क्यों दाखिल किया। मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद चंद्रबाबू ने उन्हें हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि प्रतिमाओं की स्थापना को लेकर अदालत से मिले नोटिस का जवाब पहले ही दिया जा चुका है।