हैदराबाद : आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव एल वी. सुब्रमण्यम ने राज्य के वित्त विभाग के कुछ विभागों के बिलों के भुगतान प्रक्रिया में भेदभाव करने के मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्य सचिव ने पाया कि कुछ विभागों के अधिकारियों द्वारा बिलों को पारित करने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। साथ ही उन विभागों के बजट को स्वीकृति नहीं दी गई जो बजट में अनुमोदित था।

वित्त विभाग ने कथित रूप से दूसरों के साथ अनुबंध के भुगतान से संबंधित बिल पारित किया, जो राजनीतिक हितों के साथ जुड़े हुए थे। लेकिन संविदा कर्मचारियों के वेतन और आउटसोर्सिंग के काम करने वालों के वेतन को रोक कर रखा गया था।

कर्मचारी संघों ने मुख्य सचिव को वेतन न देने के मुद्दे को लेकर बात कही। मुख्य सचिव ने इसे गंभीरतापूर्वक लेते हुए दो दिन वित्त विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी। जिसमें कथित तौर पर जनवरी 2019 से मार्च 2019 तक अंधाधुंध तरीके से बिलों को पारित किये थे।

सूत्रों ने बताया कि राज्य ने केंद्रीय योजनाओं के लिए अपने फंड का कोटा पूरा नहीं करने के कारणों पर भी सवाल उठाए, जो पहले ही जारी किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप कीमती संसाधन खत्म हो गए। उनसे यह सवाल किया जाता है कि राज्य में कल्याणकारी योजनाओं के लिए इस तरह के धन की कमी के लिए कौन जिम्मेदार होगा।

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मुख्य सचिव ने बिलों का भुगतान न करने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों को दोषी पाया। उन्होंने अधिकारियों से यह सवाल किया कि उन्होंने इसके राजनीतिक पहलुओं पर गौर किए बिना बिल पास करने के मूल सिद्धांत पर कैसे काम किया। पिछले दो महीनों से सरकारी कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।

वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, 11,108.61 करोड़ रुपये के बिलों को पारित किया जाना बाकी है। इस राशि में वेतन, निगमों और चालू परियोजनाओं के लिए धन शामिल हैं। मुख्य सचिव ने कथित तौर पर बिलों के भुगतान में असमानता के कारणों को पता लगाने का भी निर्देश दिया है।

उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा है कि यदि बिल नियमों में उलंघन हुआ तो इसका ऑडिट कराया जाना चाहिए, और जिन अधिकारियों को वेतन नहीं मिला है उन अधिकारियों के तत्काल भुगतान के लिए निर्देश दिये है।