नारा चंद्रबाबू नायडू तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री है। चंद्रबाबू नायडू 1978 से राजनीति में सक्रीय है। कांग्रेस पार्टी से अपनी राजनीतिक करियर की शुरूआत करने वाले चंद्रबाबू नायडू 1983 में तेलुगु फिल्म स्टार स्व. एनटीआर द्वारा स्थापित तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हो गए। हालांकि इससे पहले 1978 में टी. अंजय्या की कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे।

परिवारिक जानकारी

नारा चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र स्थित चित्तूर जिले में हुआ। उनके पिता का नाम कर्जूरा नायडू और माता का नाम अम्मनम्मा था। बाबू की स्कूली पढ़ाई चंद्रगिरि और सेशापुरम ग्राम पंचायत में हुआ। उन्होंने तिरुपति स्थित एसवी आर्ट्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए और बाद में एमए की पढ़ाई पूरी की।

राजनीतिक करियर

कॉलेज में रहते चंद्रबाबू युवा कांग्रेस के नेता रहे और 1978 में पहली बार विधायक चुने जाने के साथ ही तत्कालीन टी. अंजय्या की कांग्रेस सरकार में सबसे युवा मंत्री बने और उन्होंने 1978 से 1983 तक तकनीकी शिक्षा व सिनमेटोग्राफी मंत्री के रूप में काम किया। चंद्रबाबू ने पूर्व मुख्यमंत्री व टीडीपी के संस्थापक अध्यक्ष स्व. एनटीआर की दूसरी बेटी भुवनेश्वरी से 1980 में शादी की और 1983 में वह कांग्रेस छोड़ टीडीपी में शामिल हो गए।

चंद्रबाबू-भुवनेश्वरी की एक मात्र संतान नारा लोकेश हैं, जो आंध्र प्रदेश की वर्तमान सरकार में आईटी व पंचायतीराज मंत्री हैं। नारा चंद्रबाबू नायडू चित्तूर जिले के कुप्पम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू 1981 से 1994 तक विधानसभा में तेलुगु देशम पार्टी के को-आर्डिनेटर और विपक्ष के मुख्य नेता रहे।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री (1995 से 2004) : चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर व टीडीपी के संस्थापक अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री एनटी रामाराव का तख्तापलट कर 1 सितंबर 1995 को आंध्र प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लिया। चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में टीडीपी 1999 के विधानसभा चुनाव में भारी जीत के साथ एक बार फिर सत्ता में आई।

उन्होंने टेक-फ्रैंडली सीएम के रूप में अपनी छवि बनाई और हैदराबाद को देश का आईटी हब बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। इस दौरान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया चंद्रबाबू नायडू की प्रशंसा की, जबकि आलोचक बाबू पर केवल हैदराबाद पर फोकस देकर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों, किसान व अन्य मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाए।

हत्या की भी हुई कोशिश

1 अक्टूबर 2003 को चंद्रबाबू नायडू की हत्या की कोशिश की गई जब वे तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन के लिए जा रहे थे। चंद्रबाबू नायडू बारूदी सुरंग के विस्फोट में बाल-बाल बच गए। हालांकि हमले में चंद्रबाबू का कॉलर बोन और पसलियों में चोटें आई थीं।

एकीकृत आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद मई 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी की जीत हुई और तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने चंद्रबाबू नायडू इस पद पर बने हुए हैं। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन परिणाम आने बाकी है। चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद ही पता चलेगा कि क्या बाबू आगे भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे या विपक्ष में बैठेंगे।

अवार्ड्स और पहचान

चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। बाबू (1995-2004) आठ साल 8 महीने मुख्यमंत्री रहे।

चंद्रबाबू नायडू के बाद आंध्र प्रदेश में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वालों में कासु ब्रह्मानंद रेड्डी हैं, जो 21 फरवरी 1964 से 30 सितंबर 1971 तक मुख्यमंत्री रहे। उनके बाद डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी राज्य के मुख्यमंत्री रहे। वाईएसआर 14 मई 2004 से 2 सितंबर 2009 तक एकीकृत आंध्र प्रदेश के सीएम रहे। इंडिया टूडे और 20:20 मीडिया द्वारा आईटी इंडियन ऑफ दि मिलेनियम के लिए वोट किया गया। उसी तरह, टाइम मैगजीन ने उन्हें साउथ एशियन ऑफ दि ईयर के लिए वोट किया।