नई दिल्ली : विवादास्पद निर्देशक रामगोपाल वर्मा द्वारा निर्मित फिल्म 'लक्ष्मी'स एनटीआर' के प्रदर्शन पर रोक लगाये जाने के आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ फिल्म के निर्माता राकेश रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

राकेश रेड्डी के अधिवक्ता सुधाकर रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि फिल्म के रिलीज को लेकर लगाये गये प्रतिबंध को हटाने के लिए शीघ्र ही इस मामले की आपातकालीन सुनवाई की जाए। मगर सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता के आग्रह को ठुकरा दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की आपातकालीन सुनवाई की जरूरत नहीं है।

आपको बता दें कि एपी हाईकोर्ट ने लक्ष्मीस एनटीआर के आंध्र प्रदेश में रिलीज को आगामी 3 अप्रैल तक स्थगानादेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि फिल्म की प्रिव्यू देखने के बाद ही अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

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इसके चलते राकेश रेड्डी ने एपी हाईकोर्ट द्वारा दिये गये स्थगनादेश को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस अवसर पर राकेश रेड्डी ने मीडिया से कहा कि हमें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट में न्याय मिलेगा। एपी में जरूर 'लक्ष्मी'स एनटीआर' को रिलीज कर पाएंगे।

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रामगोपाल वर्मा की ‘लक्ष्मीज एनटीआर’ पर फिर लगी रोक

उच्चतम न्यायालय ने तेलुगु फिल्म ‘लक्ष्मीज एनटीआर' के निर्माता की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से सोमवार को इनकार कर दिया। उन्होंने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने वाले उच्चतम न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। यह बॉयोपिक मशहूर अभिनेता एवं आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव के राजनीति में प्रवेश करने के बाद के जीवन पर आधारित है और लक्ष्मी पार्वती के साथ उनकी शादी की कहानी कहती है। यह फिल्म एपी में 29 मार्च को रिलीज होनी थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर फौरन सुनवाई की जाए। वह फिल्म निर्माता राकेश रेड्डी की तरफ से पेश हुए थे।

पीठ ने कहा, “इसपर उचित समय में सुनवाई होगी।” पीठ में न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे। उच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज पर 28 मार्च को रोक लगा दी थी जब उसने कुछ याचिकाकर्ताओं की दलीलों को प्रथम दृष्टया उचित पाया।

यह याचिकाकर्ता सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के कथित करीबी थे जिन्होंने दलील दी कि चुनावों से पहले फिल्म रिलीज होने से राजनीतिक पार्टी की संभावनाओं पर असर पड़ेगा। निर्माता ने कई आधार पर शीर्ष अदालत में इस आदेश को चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि फिल्म पहले से ही केंद्रीय ‍फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी प्राप्त कर चुकी है और इसे ऐसे व्यक्ति ने बनाया है जिसे कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलना है।