अमरावती : देशभर में लोकसभा चुनाव खत्म हो चुका है। इस बार राज्य में वाईएसआरसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। आंध्र प्रदेश की एलुरू लोकसभा सीट से कोटागिरी श्रीधर सांसद चुने गए हैं। उन्होंने टीडीपी के मागंटी वेंकटेश्वर राव  को 165925 वोटों से मात दी है। बता दें कि मांगटी इस सीट से साल 2014 में सांसद चुने गए थे। एक बार फिर टीडीपी ने उन्हें अपना कैंडिडेट बनाया था।

मागंटी वेंकटेश्वर राव 
मागंटी वेंकटेश्वर राव 

अगर हम राजनीतिक दृष्टि से देखें, तो आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी के नेता मागंटी वेंकटेश्वर राव एलुरु लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद हैं। राजनीति में प्रवेश करने से पहले ही मागंटी वेंकटेश्वर राव का नाम पश्चिमी गोदावरी जिले में जाना-पहचाना रहा। एलुरु लोकसभा सीट से सिर्फ दो बार सांसद रहे मागंटी की गिनती पार्टी के कद्दावर नेताओं में होती है।

राजनीति से पहले एक किसान रह चुके मागंटी वेंकटेश्वर राव का समाज कल्याण के क्षेत्र में काफी योगदान रहा है। वह आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों को अपनी ट्रस्ट एमआरसी के जरिए वित्तीय सहायता, मेडिकल कैंप्स और दिव्यांगों के लिए तीन पहिया वाहन आदि मुहैया करने के अलावा कोल्लेरू झील के आस-पास के गांवों में गरीबों को टैंकरों से सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति करवाते रहे।

लंबे समय तक रहा कांग्रेस का दबदबा

आंध्र प्रदेश में अधिकांश समय तक कांग्रेस पार्टी का बोलबाला रहा है, लेकिन दिवंगत स्व. एनटी रामाराव के तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना करने के बाद से एलुरु लोकसभा सीट पर टीडीपी का वर्चस्व देखने को मिला है। इस सीट पर 1980 से अब तक कांग्रेस और टीडीपी के बीच कांटे की टक्कर रही है। अब तक इस सीट पर जहां टीडीपी पांच बार विजयी रही है, वहीं कांग्रेस भी पांच बार दर्ज कर चुकी है। एलुरु लोकसभा निर्वाचन में कुल 14,27,764 मतदाता है, जिनमें अधिकांश अर्थात 85 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में बसे हैं।

सांसद मागंटी की संसद में उपस्थिति करीब 81 फीसदी रही, लेकिन उन्होंने कभी किसी मुद्दे पर बहस में हलिसा नहीं लिया। हालांकि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए अपने सांसद निधि से 17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और उन्होंने लोकसभा में कुल 60 सवाल पूछे हैं।

संसद में मगंटी की 81 फीसदी उपस्थिति रही है। इस दौरान वो एक भी बहस का हिस्सा नहीं बने, हालांकि उन्होंने सदन में 60 सवाल पूछे. उन्होंने सांसद निधि में से अपने क्षेत्र के विकास कार्यों पर 16.80 कोरोड़ रुपये की राशि खर्च की.

1952 में पहले आम चुनाव में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के पास थी, जिसे 1957 में कांग्रेस ने छीन लिया। परंतु कांग्रेस को अगले चुनाव (1962) में झटका लगा और दोबारा सीपीआई ने सीट पर कब्जा कर लिया। हालांकि, इसके बाद सीपाआई को एक बार भी जीत नहीं मिली और इस प्रकार सीपीआई की यह आखिरी जीत साबित हुई। 1967 में सीपीआई को हराने वाली कांग्रेस ने जीत का सिलसिला जारी रखा और टीडीपी के गठन से पहले तक इस सीट कब्जा जमाए रखा।

इस दौरान कांग्रेस ने 1967, 1971, 1977 और 1980 में जीत दर्ज की। हालांकि, एनटीआर द्वारा टीडीपी की स्थापना के बाद कांग्रेस के जीत का क्रम टूटा और 1984 के आम चुनाव में उसे टीडीपी उम्मीदवार के हाथों 1.11 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 16 बार हुए आम चुनावों में 9 बार यह सीट कांग्रेस के पास रही। हालांकि, टीडीपी के अस्तित्व में आने के बाद हुए 9 आम चुनावों में कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरा, उसे महज 4 बार जीत मिल सकी। वहीं, 5 बार यह सीट टीडीपी के पाले में रही। 2014 में भी इस सीट पर टीडीपी का कब्जा रहा।

एलुरु लोकसभा सीट पर विभिन्न पार्टियों का परफार्मेन्स

1952 में भाकपा के उम्मीदवार (द्वि सदस्यीय) कोंड्रु सुब्बाराव और केएमपीपी के बी.एस. मूर्ति ने क्रमश: कांग्रेस के सी. अम्मनराज और भाकपा के एम. नारायण मूर्ति को हराया।

1957 में कांग्रेस की के.एम. वेदकुमारी ने भाकपा की वी. विमला देवी को 5220 वोट से हराया

1962 में भाकपा की वी. विमला देवी ने कांग्रेस की के.एम. वेदकुमारी को 1469 वोट से हराया

1697 में कांग्रेस के कोम्मारेड्डी सूर्यनारायण रेड्डी ने भाकपा की वी. विमला देवी को 1953 वोट से हराया

1971 में कांग्रेस के कोम्मारेड्डी सूर्यनारायण रेड्डी ने भाकपी के वी.वी. जी. तिलक को 175055 वोट से हराया

1977 में कांग्रेस के कोम्मारेड्डी सूर्यनारायण ने बीएलडी के गारपाटी कृष्णमूर्ति को 134033 वोट से हराया

1980 में कांग्रेस (आई) के चिट्टूर्सी सुब्बाराव चौधरी ने जनता पार्टी के कोम्मारेड्डी सूर्यनारायण रेड्डी को 183335 वोट से हराया

1984 में टीडीपी के बोल्ला बुल्लीरामय्या ने कांग्रेस वी.वी.आर. पार्थसारधी को 111652 वोट से हराया

1989 में कांग्रेस के घट्टमनेनी कृष्णा ने टीडीपी के बोल्ला बुल्लीरामय्या को 71407 वोट से हराया

1991 में टीडीपी के बोल्ला बुल्लीरामय्या ने कांग्रेस के घट्टमनेनी कृष्णा को 47655 वोट से हराया

1996 में टीडीपी के बल्ला बुल्लीरामय्या ने कांग्रेस के मागंटी वेंकटेश्व राव (बाबू) को 1635 वोट से हराया।

1998 में कांग्रेस के मागंटी वेंकटेश्वर राव ने टीडीपी के बोल्ला बुल्लीरामय्या को 23807 वोट से हराया

1999 में टीडीपी के बोल्ला बुल्लीरामय्या ने कांग्रेस के मागंटी वेंकटेश्वर राव को 62231 वोट से हराया

2004 में कांग्रेस के कावूरी सांबशिव राव ने टीडीपी के बोल्ला बुल्लीरामय्या को 123291 वोट से हराया

2009 में कांग्रेस के कावूरी सांबशिव राव ने टीडीपी के मागंटी वेंकटेश्वर राव को 42788 वोट से हराया

2014 में टीडीपी के मागंटी वेंकटेश्वर राव ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार तोटा चंद्रशेखर राव को 101926 वोट से हराया।

सामाजिक ताना-बाना

2014 आम चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर कुल 14,27,764 वोटर हैं, जिसमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। यहां 7,06,952 पुरुष और 7,20,738 महिला वोटर हैं। एलुरु लोकसभा में सात विधानसभा (उंगुटुरु, देंदुलुरु, एलुरु, पोलावरम, चिंतालपुड़ी, नुजविड और कैकालूर) सीटें आती हैं। इसमें से कैकालूर पर बीजेपी, नुजविड में वाईएसआर कांग्रेस और शेष विधानसभा सीटों पर टीडीपी के विधायक हैं।