गलती की है इसीलिए फरार है आईटी ग्रिड्स के सीईओ : रामचंद्र रेड्डी

मीडिया से रूबरू होते हुए पेद्दिरेड्डी रामचंद्र रेड्डी - Sakshi Samachar

विजयवाडा : आंध्र प्रदेश में हर निर्वाचन क्षेत्र में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) समर्थकों के वोटों को हटाया गया है। वाईएसआरसीपी के महासचिव पेद्दिरेड्डी रामचंद्र रेड्डी ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में मीडिया से यह बात कही।

रामचंद्र रेड्डी ने आगे कहा कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र में लगभग नौ हजार वोटों को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी के नेता फार्म 7 को वोट हटाने के लिए इस्तेमाल कर रहे है। पिछले दस दिनों से वाईएसआरसीपी इस घटना को लेकर संघर्ष कर रही है। निर्वाचन आयोग से इस घटना की समग्र जांच करें और सच्चाई को उजागर करे।

वाईएसआरसीपी के महासचिव ने सवाल किया कि यदि आईटी ग्रिड्स ने कोई गलती नहीं की है तो उसके सीईओ अशोक फरार क्यों है? उन्होंने यह भी कहा कि टीडीपी सेवा मित्र ऐप घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद टीडीपी के नेता वाईएसआरसीपी के खिलाफ अनाप शनाप बकते जा रहे है। साथ ही आईटी ग्रिड्स घोटला उजागार होने के बाद अशोक और अन्य कर्मचारियों को छिपाकर रखा जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि टीडीपी सरकार को अपनी ईमादारी को लोगों को बताने का समय आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि आंध्र प्रदेश के लोगों का पांच प्रकार का निजी डाटा सेवा मित्र ऐप में कैसे पहुंचा है? सिट की जांच में कुछ और सच्चाई का खुलासा हो जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायुडू ने योजनाबद्ध तरीके से वोटों को हटाना शुरू किया है। आने वाले चुनाव में चंद्रबाबू की हार जाने के अनेक सर्वे बता रहे है। हार जाने के डर से ही चंद्रबाबू ने लगभग 59 लाख वोटों को हटाया है। उन्होंने मांग की है कि किये गये अपराध को स्वीकारते हुए चंद्रबाबू नायुडू मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे।

दूसरी ओर 'वोट के बदले नोट' मामला तूल पकड़ रहा है। विधान पार्षदों की खरीदफरोख्त का मामला नये मोड़ पर आ कर खड़ा है। इस डील को लेकर और एक वीडियो उजागर हुआ है। इस वीडियो में स्टीफन, सेबास्टियन, रेवंत रेड्डी और चंद्रबाबू नायडू के बीच की बातों की रिकार्डिंग है।

वोट के बदले नोट के मामले में मुख्य सूत्रधार का पर्दाफाश हुआ दिखाई पड़ता है। डील को फाइनल करने के मामले में सूत्रधार की अहम भूमिका रही है। वीडियो के माध्यम से खुलासा होने से सनसनी फैल गई है। वोट के बदले नोट की जिम्मेदारी स्टीफन्सन पर सौंपी गई। उन्हें ही जिम्मेदारी लेने के लिए जोर दिया गया। पहले यह डील 3.3 करोड़ रुपये में हुई लेकिन बाद में चंद्रबाबू नायडू को इसे 5 करोड़ रुपये पर फिक्स करना पड़ा।

वोट के बदले नोट मामले के एक वीडियो में स्टीफनसन और रेवंत रेड्डी और दूसरे वीडियो में चंद्रबाबू दिखाई दे रहे हैं। स्टीफनसन को पहले डील पूरी कर लेना का निर्देश देते हुए सुने जा सकता हैं। रेवंत रेड्डी ने एडवांस के तौर पर स्टीफनसन को 50 लाख रुपये दिये थे। एमएलसियों के खरीदफरोख्त का यह मामला काफी चर्चा में रहा है। चार वर्ष के बाद इस मामले में और एक वीडियो उजागर हुआ। वोट के बदले नोट के भंवर में चंद्रबाबू दिनों दिन फंसते ही जा रहे हैं।

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