तिरुपति : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के कम्मा समुदाय से जुड़े एक टीडीपी विधायक का दलितों को राजनीति के लिए अयोग्य करार देते हुए अभद्र शब्दों का प्रयोग कर उन्हें अपमानित करना, चंद्रबाबू नायडू का यह कहना कि क्या कोई दलित परिवार में पैदा होना चाहता है जैसे हमने सुने हैं।

महत्वपूर्ण सभी सरकारी पदों पर अपने ही समुदाय के लोगों को नियुक्त करने का मन बना चुके मुख्यमंत्री का शासन भी देख ही रहे हैं। अब हमारे समुदाय के लोगों का दूसरी पार्टी में जाना हमारे समुदाय की रीति रिवाजों के विरुद्ध बताते हुए उन्हें अन्य पार्टियों में शामिल होने से रोका जा रहा है।

चित्तूर जिले के चंद्रगिरि मंडल के मुंगलीपट्टु गांव निवासी जागर्लामूडी दामोदर नायडू और उसकी पत्नी खेती करते हैं। दामोदर नायडू हाल ही में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी में सामिल हुआ है। ऐसे में गावं में दामोदर नायडू के समुदाय(कम्मा) से जुड़े कुछ लोग ने चौपाल में कहा कि हमारे समुदाय के लोग दूसरी पार्टी में कैसे शामिल हो सकते हैं? हमारे समुदाय की पार्टी को छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने पर उन्हें गांव से बहिष्कार करने की चेतावनी दी।

इस पर दामोदर नायडू ने अपना पक्ष रखते हुए समुदाय के लोगों से पूछा, मैं और मेरे साथ आप ने भी उस दिन वाईएस राजशेखर रेड्डी के शासनकाल में ऋण माफी का लाभ उठाया था। तुड़ा चेयरमैन चेवीरेड्डी भास्कर रेड्डी ने हमरे पूरे गांव में जब सड़क बनवाई थी, तब आपको समुदाय की याद नहीं आई? जब ऋण माफ हुआ, तब आपको समुदाय की याद क्यों नहीं आई? अच्छे काम करवाने के दौरान याद नहीं आने वाला समुदाय क्या अब याद आया है। यह कहां का इंसाफ है? क्या यही आपके नियम हैं?

दामोदर की बातों से चौपाल में बैठे लोगों को गुस्सा आया और उन्होंने उसपर हमला कर दिया। दामोदर, उसकी पत्नी और बच्चे जान बचाने के लिए वहां से भाग निकले। इसपर समुदाय के लोगों ने दामोदार नायडू के परिवार के गांव से बहिष्कार का हुकूम जारी किया। इसके अलावा राशन का सामन और पेयजल की आपूर्ति तक रोकने और दामोदर के परिवार से बात नहीं करने का आदेश दिया गया और कहा कि अगर कोई दामोदर या उसके परिजनों से बात करेगा तो उसे सजा मिलेगी।

यही नहीं, दामोदर नायडू पर 4 हजार रुपए का जुर्माना इसलिए लगाया गया कि उसने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा था कि हमारा कल्याण करने वालों का आभार व्यक्त करने में क्या गलत है।

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इस बीच, पीड़ित परिवार ने गांव से उसका बहिष्कार करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर कड़ी सजा दिए जाने की मांग करते हुए चंद्रगिरि थाने में शिकायत की और पुलिस से सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की।

तभी पुलिस को सत्तारूढ़ टीडीपी नेताओं का फोन कॉल आया, तो पुलिस ने तुरंत यूटर्न ले लिया और उल्टा दामोदर और उसके परिवार के साथ गालीगलौज पर उतर गई। पुलिस से डरकर दामोदर परिवार बाद में चंद्रगिरि के विधायक चेवीरेड्डी भास्कर रेड्डी के पास पहुंचा। विधायक ने परिवार को भरोसा दिया कि इस बारे में केंद्रीय मानव आयोग से शिकायत की जाएगी और उसके साथ न्याय किया जाएगा।