इच्छापुरम : वाईएसआरसीपी के मुखिया और आंध्र प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता वाईएस जगन मोहन रेड्डी की प्रजा संकल्प यात्रा इस समय अपने आखिरी चरण में है और यह 9 जनवरी को इच्छापुरम में समाप्त होगी। इस यात्रा को एक यादगार धरोहर के रूप में बनाए रखने के लिए वाईएसआर कांग्रेस के लोगों ने एक पहल शुरू की है।


वह चाहते हैं कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी के द्वारा आंध्र प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए किए जा रहे इस संघर्ष को यादगार बनाने के लिए एक बड़ा स्मारक और स्तूप बनाया जाए, जो आने वाली पीढ़ी को इस बात की याद दिलाता रहे कि तेलुगुभाषी राज्य में एक ऐसा राजनेता भी था, जिसने राज्य के लोगों के हितों के लिए इतना बड़ा संघर्ष किया।

जैसे ही वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थकों ने जगन मोहन रेड्डी के सामने इस बात का प्रस्ताव रखा है कि वह तेलुगु भाषी लोगों के हितों की रक्षा के लिए किए गए इस ऐतिहासिक संघर्ष को वह आने वाले पीढ़ी के लिए एक यादगार स्थल व स्मारक बनाना चाहते हैं। इसके जरिए वह अपने भविष्य के लिए संघर्षरत वाईएस जगन मोहन रेड्डी की इस यात्रा को आने वाली पीढ़ी को बताना चाहते हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावना का सम्मान करते हुए जैसे ही जगन मोहन रेड्डी ने 26 नवम्बर को इसे अपनी स्वीकृति प्रदान की, उसके बाद कार्यकर्ताओं ने इसे यादगार स्थल के रूप में बनाने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक धरोहर बनाने का काम शुरू कर दिया।

कार्य स्थल पर मौजूद एल. वेंकट रेड्डी का कहना है कि 26 नवंबर को इस स्थल पर स्मारक बनाने की पहल शुरू की गई। उसके बाद स्मारक स्थल पर 1 दिसंबर से काम शुरू कर दिया गया। प्रजा संकल्पा यात्रा की समाप्ति का समय कम होने के कारण कार्यकर्ताओं ने यहां पर 24 घंटे काम करने का फैसला किया।

एल. वेंकट रेड्डी ने कहा कि बीच में दो-तीन दिनों तक कामकाज को रोकना पड़ा, क्योंकि इस इलाके में तितली तूफान के चलते मौसम खराब हो गया था। उन दो-तीन दिनों को छोड़ दिया जाए तो उसके बाद से कार्यकर्ता और यहां पर काम करने वाले मजदूर दिन रात एक करके इस स्मारक को शानदार बनाने में जुटे हुए हैं ।

मौके पर पूरी टीम के साथ काम कर रहे एम सत्या रेड्डी ने बताया कि मौके पर ढाई सौ मजदूर और तरह-तरह के वर्कर एक साथ मिलकर 24 घंटे काम कर रहे हैं, जिससे कि 9 जनवरी के पहले इसे पूरा किया जा सके।

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जगह के चयन के बारे में बोलते हुए वेंकट रेड्डी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की मंशा थी कि इस शानदार स्मारक को इसके पहले कि 2 स्मारकों से और बड़ी और ऐसी जगह पर बनाई जाए जहां लोगों को आने जाने में असुविधा ना हो और सड़क तथा रेल मार्ग के बीच में हो ताकि इसे रेल और सड़क मार्ग से गुजरने वाले लोग देख सकें। इसीलिए नेशनल हाईवे के किनारे इस जगह का चयन किया गया और इसको विस्तार से बनाने की योजना तैयार की गई।

ऐसा होगा स्थल

विशाखापट्टनम हावड़ा रेलवे ट्रैक और विशाखापट्टनम भुवनेश्वर नेशनल हाईवे के बीच बनने वाली इस स्मारक को लगभग 2 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता है। इतना ही नहीं रेल मार्ग और सड़क मार्ग से गुजरने वाले यात्री भी इसे बहुत ही आसानी से देख सकते हैं और यहां आकर तेलुगुभषियों के हितों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष की यादगार निशानी को अपने कैमरे या मन: पटल पर अंकित कर सकते हैं।

मौके पर काम करने वाले मजदूरों के मन में भी गजब का उत्साह देखा जा रहा है और सभी जगन अन्ना को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में देखने का ख्वाब पाल रखे हैं। मौके पर काम कर रही महिला मजदूर ने कहा कि वह तो जगन अन्ना के लिए केवल यहां काम कर रही है। मजदूरी व पेट पालने के काम के साथ साथ जगन को सपोर्ट करने की मन में लालसा है।

बताएगी यादगार संघर्ष की गाथा

इस स्तूप व स्मारक को संघर्ष की उस निशानी के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसे देखकर लोगों को लगे कि एक आंध्र प्रदेश में एक ऐसा भी राजनेता था तो दिनरात यहां के लोगों की भलाई के लिए एक साल तक सड़कों पर रहा। धूप-बरसात और सर्दी को सहते हुए तूफानों व सरकार की ज्यादितयों को सहते हुए तब तक संघर्ष किया जब तक जनता बाबू की अन्यायी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार नहीं हो गई। यह स्तूप और स्मारक शानदार तरीके से बनेगी और आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देती रहेगी।