आंध्र प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व वाईएसआरसीपी के सुप्रीमो वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान ‘साक्षी’ को दिए एक साक्षात्कार में पिछले चार सालों में जनसमस्याओं को लेकर चंद्रबाबू नायडू सरकार के खिलाफ जारी संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया। इस साक्षात्कार के कुछ अंश इस प्रकार हैं।

सवाल : चंद्रबाबू नायडू ने आपको जूनियर मोदी और केसीआर को सीनियर मोदी बताते हुए नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, इस पर आपकी क्या राय है?

जगन : मैं आपके जरिए लोगों को कुछ बताना चाहता हूं। आखिर कौन किसके साथ मिला हुआ है। कौन किसके साथ मिलकर रहा और रह रहा है ?  2014 के चुनाव में चंद्रबाबू नायडू ने नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर सफर किया। चंद्रबाबू, पवन कल्याण और मोदी तीनों ने मिलकर एक गठबंधन बनाया और हमारे खिलाफ चुनाव लड़ा।

उस वक्त चंद्रबाबू ने कहा था कि जगन मोहन रेड्डी को वोट देने का मतलब कांग्रेस को वोट देना है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को कांग्रेस पार्टी का दूसरा चेहरा बताया। यही नहीं, चंद्रबाबू ने अपने अनुकूल मीडिया के जरिए इसका व्यापक प्रचार भी करवाया। बाद में क्या हुआ ? 2014 के चुनाव हो गए और अब 2019 में चुनाव होने जा रहे हैं। इन पांच सालों में हम कहीं भी कांग्रेस के साथ नहीं मिले, जबकि बाबू भाजपा छोड़कर अब खुद कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं।

चंद्रबाबू नायडू 2014-2018 लगभग चार साल तक भाजपा के साथ रहे। उस वक्त टीडीपी ने भाजपा को और भाजपा ने टीडीपी की तारीफ की। भाजपा की चंद्रबाबू की मर्जी के मुताबिक विशेष दर्जे के बदले में विशेष पैकेज देने की दलील, विधानसभा में चंद्रबाबू नायडू का प्रस्ताव पारित कर भाजपा की तारीफ करना, आखिर में 27 जनवरी 2017 को एक प्रेसमीट आयोजित कर बाबू का यह कहना कि भाजपा ने देश के अन्य राज्यों के मुकाबले आंध्र प्रदेश की अधिक मदद की है।

यहां तक दोनों तोते-मैने की तरह रहे। सिर्फ अगले एक साल में चुनाव होने के मद्देनजर चंद्रबाबू ने गिरगिट की तरह अपना रंग बदला और अपनी धांधलियों, नाइंसाफी, भ्रष्टाचार और झूठ को केंद्र पर थोपकर कांग्रेस से दोस्ती कर ली।

झूठ और धोखाधड़ियों के बल बनी बाबू सरकार केवल अनैतिक गठबंधन नहीं, बल्कि पिछले साढे चार सालों में भी धांधलियां होती रही। उनकी फितरत ही ऐसी है। चुनाव के दौरान बाबू ने कहा था कि किसानों के 87,612 करोड़ रुपये के फसल ऋण माफ होने हो, तो उन्हे (बाबू) का सत्ता में आना जरूरी है। बैंक में गिरवी रखा हुआ सोना घर वापस लाना हो, तो बाबू का मुख्यमंत्री बनना अति आवश्यक बताया।

आज क्या हुआ? ड्वाक्रा समूहों की बहनों का ऋण माफ करने का वादा किया और कहा कि ड्वाक्रा ऋण माफी के लिए बाबू का मुख्यमंत्री बनना जरूरी है। परंतु आज क्या हुआ? चंद्रबाबू ने धोखेबाजी से किसान और बचत समूहों की बहनों के ऋण माफ नहीं किया और उन्हें 25 पैसे ब्याज दर पर ऋण तक नहीं दिया।

ऋणों पर शून्य और 25 पैसे ब्याज का भुगतान पिछली सरकारें अपनी तरफ से ब्याज का भुगतान किया करती थीं, लेकिन बाबू के आने के बाद ऐसा नहीं हो रहा है। चंद्रबाबू ने धोखे देने के मामले में बच्चों को भी नहीं बख्शा है। उन्होंने कहा था कि किसी भी पढ़ाई की जरूरत नहीं है, लेकिन हर घर में नौकरी और रोजगार दूंगा।

नौकरी नहीं मिलने पर हर महीने 2 हजार रुपए का बेरोजगार भत्ता देने का भी भरोसा दिया था। परंतु बेरोजगार युवाओं को हर महीने दो हजार रुपए नहीं मिल रहे हैं। एक-दो रोजगार मिलने की संभावना वाले विशेष दर्जे का भी बाबू ने खून कर दिया है। हर मामले में झूठ और धोखा है।

सवाल : तेलंगाना के चुनाव परिणामों को आप किस तरह देखते हैं?

जगन : लोग उतने पागल और मासूम नहीं है, जितना चंद्रबाबू नायडू समझते हैं। जनता चुनाव में चंद्रबाबू को अच्छी तरह समझाएगी। अगर कोई बाहरी व्यक्ति आंध्र प्रदेश में आकर देखेगा तो पता चलेगा कि यहां किस तरह की व्यवस्था बनी हुई है।

चंद्रबाबू आंध्र प्रदेश की तरह तेलंगाना में वही झूठे आश्वासन दोहराएंगे, तो लोग उनपर विश्वास कैसे करेंगे। यहां के लोग वास्तव में जागरूक है, इसिलिए तो जो हो रहा है, उसे गंभीरता से देख रहे हैं। लोगों ने तेलंगाना में अनैतिक गठबंधन और अनैतिक कार्यकलापों के खिलाफ अपना फैसला दिया और टीडीपी-कांग्रेस गठबंधन की करारी हार हुई।

हैदराबाद में अत्यधिक आंध्र के सेटलर बसे हुए हैं। अनैतिक चुनावी गठबंधन की बदौलत टीडीपी की तरफ से चुनाव लड़ चुके नेता गच्चीबावली, कुक्कटपल्ली आदि क्षेत्रों में 50 से 60 हजार वोटों के अंतर से हार गए हैं, जो आंध्रा सेटलर बहुल निर्वाचन क्षेत्र हैं। हैदराबाद में बसे आंध्र के सेटलर ही चंद्रबाबू नायडू की बातों और शासन से नाराज हैं, तो आंध्र में लोग कैसे खुश रह सकते हैं। जब सेटलरों ने ही बाबू को वोट नहीं दिया है तो आंध्र के लोग कैसे वोट देंगे?

सवाल : तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव ने एक प्रेसमीट में कहा था कि अब वह आंध्र प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगे, इसपर आपकी क्या राय है?

जगन : केसीआर ने क्या कहा और किस उद्देश्य से कहा था, मैं नहीं जानता, लेकिन सच तो यह है कि आंध्र प्रदेश को लेकर चंद्रबाबू के खिलाफ और विशेष दर्जे के अनुकूल की गई केसीआर की बातों का मैंने स्वागत किया है। क्योंकि केसीआर आंध्र प्रदेश से जुड़े व्यक्ति नहीं हैं और वह पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री हैं। ऐसे व्यक्ति का विशेष दर्जे के लिए जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखने के लिए आगे आना वास्तव में हर्ष की बात है।

राज्य को मनमाने ढंग से विभाजित कर चुकी कांग्रेस पार्टी ने भरी संसद में विशेष दर्जा देने के आश्वासन को कानून में शामिल किए बिना आंध्र के लोगों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ किया है। वही कांग्रेस पार्टी उस वक्त राज्य का विभाजन नहीं की होती, तो अच्छा होता। 2014 के चुनाव में चंद्रबाबू और भाजपा ने मिलकर जो बात कही थी, वही बात आज चंद्रबाबू नायडू और कांग्रेस दोहरा रहे हैं। इसका मतलब फिल्म एक ही है, लेकिन उसके किरदार बदल गए हैं।