आंध्र प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व वाईएसआरसीपी के सुप्रीमो वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान ‘साक्षी’ को दिए एक साक्षात्कार में पिछले चार सालों में जनसमस्याओं को लेकर चंद्रबाबू नायडू सरकार के खिलाफ जारी संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया। इस साक्षात्कार के कुछ अंश इस प्रकार हैं।

सवाल : पदयात्रा आपके परिवार के लिए नई बात नहीं है। राजनीति से हटकर पदयात्रा के दौरान जनसमस्याओं के मामले में आपकी सरकार के खिलाफ संघर्ष से दूर होने का आरोप लगा है, आप क्या कहते हैं?

जगन : वाईएसआरसीपी के संघर्ष का क्लाइमैक्स ही है पदयात्रा। 2014 से विधानसभा में हमारा संघर्ष जारी है। 2017 तक हम संघर्ष करते रहें। विधानसभा में लोगों की आवाज उठाई। परंतु विधानसभा की कार्यशैली में लोकतंत्र नामकी कोई चीज ही नहीं थी।

सत्तारूढ़ पार्टी विपक्ष के 23 विधायकों को भेड़-बकरियों की तरह खरीद चुकी है। खरीदने के बाद उन्हें अयोग्य घोषित तक नहीं किया गया। उनके इस्तीफे के लिए हमने विधानसभा में दबाव बनाया। हम इसका दो साल तक इंतजार करते रहे।

2014 में विधानसभा शुरू हुई थी और उसी साल से विपक्ष के विधायकों की खरीद-फरोख्त शुरू हुई। विधायकों की खरीदी को लेकर सत्तापक्ष को पचतावा तो दूर, उसे यह तक अहसास नहीं है कि उसने गलत किया है। सरकार वही गलती दोहराती रही है।

आखिर में मामला यहां तक पहुंच गया कि सत्तापक्ष ने खरीदे गए विपक्ष के चार विधायकों को मंत्री बना डाला। वास्तव में लोकतंत्र बहुत ही बदतर स्थिति में है। हमारा विधायिकाओं में जाने की वजह कानून बनाना होता है। इसीलिए लोग हमारी ओर देखते हैं।परंतु यहां तो लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।

सवाल : बिना विपक्ष के विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा विशेष दर्जे से लेकर कुछ अन्य मुसलों पर कही गई बातों का जवाब आप अपनी पदयात्रा के जरिए कैसे देना चाहते हैं ?

जगन : हमारे विधानसभा में भाग लेने के बाद भी हमें कुछ पूछने का मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि विधानसभा में लोकतंत्र जैसी कोई चीज ही नहीं बची है। 2014 से विधानसभा में जारी अलोकतांत्रिक व्यवस्था को स्पीकर करीब रहकर प्रोत्साहित कर रहे हैं। स्पीकर दलबदलू विधायकों को अयोग्य तक घोषित नहीं करते। अगर हम कुछ कहने की कोशिश करते भी हैं, तो माइक काट देते हैं। कदम-कदम पर रोड़ा अटकाते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में हम कम से कम लोगों के बीच जो कहना है, उसे बिना रोक-ठोक के कहतो पाएंगे। हम लोगों के पास जा रहे हैं। लोगों के साथ खड़े रहने वाले कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। इस दौरान आंध्रवासियों के साथ हुई नाइंसाफी... राजधानी, चंद्रबाबू नायडू की धांधलियों के अतिरिक्त विशेष राज्य के दर्जे की मांग को किस तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया है, धर्मदीक्षा के नाम पर अब किस तरह लोगों को गुमराह कर रहे है, इस बारे में हम लोगों को काफी अच्छी तरह से समझा पाए हैं।

सवाल : टीडीपी ने विधानसभा की तरह लोकसभा में भी आपके सदस्यों को खरीदा है। आप पर विधानसभा स्पीकर की तरह लोकसभा स्पीकर पर दबाव नहीं बनाने का आरोप है ?

जगन : वहां और यहां हमने बाबू की सरकार की खिंचाई करने और उसे घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वहां और यहां दोनों जगहों पर हालात एक जैसे हैं। टीडीपी-भाजपा ने मिलकर चार साल तक शासन किया। वहां भाजपा सरकार ने चंद्रबाबू नायडू को परेशानी न हो, इसके लिए हमें दबाने की कोशिश की।

सवाल : टीडीपी और भाजपा अब अलग होने की बात कर रहे हैं, तो कम से कम अब तो उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी ?

जगन : राजनीति का स्तर दिनों-दिन गिरता जा रहा है। हो सकता है कि भाजपा और चंद्रबाबू नायडू के बीच अंदरूनी सांठगांठ हों।