अमरावती : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने राजधानी अमरावती के लिए जमीन का चुनाव इमानदारी के साथ नहीं किया बल्कि इस चयन को लेकर उनकी बदनीयती साफ साफ दिखाई दे रही है। कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि नई राजधानी के चयन में बाबू ने ‘राजधर्म’ को मिट्टी में मिला दिया है।

सत्ता संभालने के एक महीने के भीतर ही चंद्रबाबू ने गुंटर जिले के ताड़ीकोंडा और मंगलगिरि निर्वाचन क्षेत्रों को नई राजधानी के रूप में चुना और इस बात को गुप्त रखा। राजधानी बनाने की घोषणा को सार्वजनिक करने से पहले मुख्यमंत्री चंद्रबाबू ने अपने रिश्तेदारों के साथ साथ कई करीबी कंपनियों के जरिए इस क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन खरीदकर लाखों करोड़ कमाने की योजना बनाई।

चंद्रबाबू नायडू द्वारा की गई लूट की फूलप्रूफ योजना का 'साक्षी' ने पुख्ता सबूतों के साथ खुलासा किया था, लोगों के सामने इसके प्रमाण भी रखे थे।

जमीन बिक्री से संबंधित दस्तावेज की प्रति 
जमीन बिक्री से संबंधित दस्तावेज की प्रति 

इस मामले में चंद्रबाबू के परिवार के हस्तक्षेप को साबित करते हुए हेरिटेज के लिए 14.22 एकड़ जमीन राजधानी के लिए पहले से चिन्हित क्षेत्र में खरीदी गई। उसके बाद ही उसी क्षेत्र में राजधानी के निर्माण की घोषणा की। यही नहीं, इस क्षेत्र को लैंड पूलिंग के दायरे से बाहर रखने में भी सावधानी बरती गई।

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'साक्षी' की ताजा खोजबीन से पता चला है कि ऐसा मास्टर प्लान बनाया गया कि इनर रिंगरोड भी हेरिटेज की जमीन के आगे से गुजर सके।

अधिग्रहीत जमीन पर लगा बोर्ड
अधिग्रहीत जमीन पर लगा बोर्ड

राजधानी को लेकर ऐसे किया गुमराह

चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद गुंटूरु जिले के ताडीकोंडा और मंगलगिरि निर्वाचन क्षेत्रों की परिधि में राजधानी के चयन का निर्णय लेकर इनसाइडर ट्रेडिंग की शुरुआत की। इसी के तहत एक सोची-समझी रणनीति के तहत राजधानी के क्षेत्र को लेकर अन्य क्षेत्रों के नाम पर्दे पर लाए गए। कृष्णा जिले के नूजीवीडु, गुंटूर जिले के नागार्जुन विश्विविद्यालय, पश्चिमी गोदावरी जिले के येलुरू जैसे कई क्षेत्रों को राजधानी के तौर पर चुने जाने का जमकर प्रचार किया गया।

इससे राज्यभर के अनेक रियल इस्टेट व्यापारी और अन्य लोगों ने उन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन की खरीददारी की। परंतु इसके बाद में यह पूरा सीन बदल दिया गया और गुंटूर जिले के ताडीकोंडा और मंगलगिरि क्षेत्र में जमीनें खरीदने का मामला निपटने के बाद चंद्रबाबू ने असली कहानी शुरू की। 28 दिसंबर 2014 को राज्य सरकार ने ताडीकोंडा और मंगलगिरि क्षेत्र को राजधानी चुन लिए जाने का आधिकारिक रूप से एलान किया।

ताडीकोंडा निर्वाचन क्षेत्र के तुल्लूरु मंडल, मंगलगिरि निर्वाचन क्षेत्र के ताड़ेपल्ली और मंगलगिरि निर्वाचन क्षेत्र में राजधानी अमरावती के निर्माण की घोषणा से तब तक उस क्षेत्र में 5 लाख रुपए प्रति एकड़ बिकने वाली जमीन की कीमतें अचानक बढ़ कर प्रति एकड़ जमीन का मार्केट दाम 3 से 5 करोड़ रुपए हो गया। इससे चंद्रबाबू के बेनामी और करीबियों ने एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपए की अवैध कमाई की।

मौके की तात्कालिक तस्वीर
मौके की तात्कालिक तस्वीर

लैंड पूलिंग से अपनी जमीनों को छूट

राज्य सरकार ने 1 जनवरी 2015 को राजधानी के लिए भूमि अधिग्रहण (लैंड पूलिंग) प्रक्रिया शुरू करते हुए नोटिफिकेशन जारी किया था। गुंटूर जिले के तुल्लूरु और मंगलगिरि मंडल के कुल 29 गांवों को लैंड पूलिंग की परिधि में शामिल किए गए।

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परंतु चंद्रबाबू परिवार से जुड़ी हेरिटेड फूड्स, उनके करीबी लिंगमनेनी कंपनी की जमीनों वाली ताटीकोंडा मंडल के कंतेरु गांव को पूलिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। मंगलगिरि मंडल के निडमर्रु गांव तक लैंड पूलिंग के तहत किसानों से जमीनें ली गईं, लेकिन निडमर्रु के बगल में स्थित कंतेरु का लैंड पूलिंग में शामिल नहीं किया गया । ऐसी हालत में सवाल उठना लाजिमी था।

चंद्रबाबू परिवार की संस्था हेरिटेड फूड्स द्वारा खरीदी गई जमीनों के साथ उनके करीबी संस्था लिंगमनेनी इस्टेट्स से जुड़ी सैकड़ों एकड़ जमीन कंतेरु में ही है। एकाएक दाम बढ़ने वाली इन सभी जमीनें हेरिटेज और लिंगमनेनी इस्टेट्स के कब्जे में रह जाए, इसीलिए ऐसी व्यवस्था की गई।

अमरावती में हो रहा निर्माण कार्य
अमरावती में हो रहा निर्माण कार्य

लिंगमनेनी इस्टेट्स के निदेशक लिंगमनेनी रमेश, उनके भाई वेंकट सूर्या राजशेखर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू के बेहद करीबी हैं। लिंगमनेनी बंधु पर चंद्रबाबू के बेनामी होने के आरोप भी हैं। कृष्णा नदी के तट पर लिंगमनेनी इस्टेट्स द्वारा अवैध रूप से निर्मित भवन को ही मुख्यमंत्री ने अपना अधिकारिक आवास बनाया है। लिंगमनेनी कंपनी ने गुंटूर जिले के ताडीकोंडा और मंगलगिरि निर्वाचन क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ जमीन खरीदी है, जिसमें असाइन्ड और कुछ विवादास्पद जमीनें भी शामिल हैं।

उधर, राज्य सरकार ने राजधानी के लिए आम किसानों से भूमि अधिग्रहित किया है, जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने अपने बेनामियों और करीबियों की जमीनों के दाम एकाएक बढ़ाने में अधिकार का दुरुपयोग किया।

CM बनने के एक महीने के भीतर कारनामा

चंद्रबाबू नायडू ने 8 जून 2014 को आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। आधिकारिक गोपनीयता बनाए रखने की शपथ लेने वाले चंद्रबाबू ने बाद में सभी आधिकारिक गोपनीयताओं का इस्तेमाल निजी स्वार्थ के अनुरूप किया। राजधानी क्षेत्र के चयन मामले को अपनी काली कमाई का साधन बनाया। चंद्रबाबू ने मुख्यमंत्री की बागडोर संभालने के एक महीने के भीतर ही इस भ्रष्टाचार को अंजाम देना शुरू कर दिया।

कांसेप्ट फोटो
कांसेप्ट फोटो

ये हैं जमीनों के रिकॉर्ड

7 जुलाई 2014 को गुंटूर जिले के ताडीकोंडा मंडल के कंतेरु गांव में कई जगहों पर हेरिटेज फूड्स ने जमीन खरीदी। यहां के सर्वेनंबर 27/3बी, 22/2एस 63/1, 62/2बी, 27/3ए में 7.21 एकड़ जमीन खरीदी गई। 7.21 एकड़ जमीन 67.68 लाख रुपये में खरीदी गई। ये सारी जमीनें विजयवाड़ा निवासी मोव्वा श्रीलक्ष्मी नामक महिला से खरीदी गई। उन जमीनों को भी मोव्वा श्रीलक्ष्मी ने इससे पहले GPA के जरिए ही खरीदी थी।

8 सितंबर 2014 को हेरिटेज फूड्स ने कंतेरु गांव में ही एक बार फिर से जमीन खरीदी। सर्वे नंबर 56 और 63/2 बी में स्थित 2.46 एकड़ जमीन 19.68 लाख रुपये में खरीदी गई। ये जमीनें विजयवाड़ा निवासी चिगुरुपाटी वेंकटगिरिधर नामक व्यक्ति ने उससे कुछ ही समय पहले GPA के जरिए खरीदी थी। उन्होंने ही उक्त जमीनें हेरिटेज फूड्स को बेची।

8 सितंबर 2014 को हेरिटेज फूड्स ने कंतेरु स्थित कुछ अन्य जमीनें खरीदी। सर्वे नंबर 56, 63/1, 63/2बी में स्थित 4.55 एकड़ जमीन 36.40 लाख रुपये में लिंगमनेनी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, लिंगमनेनी इन्फोसिटी प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी गई।

इस तरह से हेरिटेड ने कुल 14.22 एकड़ जमीन 1,23,76,000 रुपये में खरीदी। ये सभी जमीनें गुंटूर जिले के ताडीकोंडा सब रिजिस्ट्रार कार्यालय की परिधि में आती हैं। परंतु इन जमीनों का पंजीकरण पेदकाकानी सब रिजिस्ट्रार कार्यालय में करवाया गया है।

इनर रिंगरोड के रास्ते में है हेरिटेज की जमीन

राजधानी के मास्ट प्लान के तहत अमरावती के चारों तरफ 250 फुट की चौड़ाई वाले इनर रिंगरोड का प्रस्ताव रखा गया। मास्टर प्लान के मुताबिक इस इनर रिंगरोड निश्चित रूप से हेरिटेड फू़ड्स की जमीनों के सामने से गुजरता है। कंतेरु में सर्वे नंबर 27/3ए के सामने से गुजरने वाला है। उसी तरह, हेरिटेज और लिंगमनेनी कंपनी की सभी जमीनें इनर रिंगरोड की दोनों तरफ से स्थित हैं। यही नहीं, उस इनर रिंगरोड के लिए भूमि अधिग्रहण में शामिल नहीं किया जाना गौर करने वाली बात है। इन दो कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए इनर रिंगरोड मैप बनाए जाने की बात स्पष्ट होती है।

हेरिटेज फूड्स की जूडिशियल जांच की मांग

इस बीच, केंद्रीय ऊर्जा विभाग के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के परिवार से जुड़ी हेरिटेज फूड्स द्वारा अमरावती में खरीदी गई जमीनों के मामले की जांच सिटिंग जज से कराए जाने की मांग की है।

इस संबंध में उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव गिरीश कुमार को एक पत्र भी लिखा है। शर्मा ने कहा है कि राजधानी के चयन से पहले ही उस क्षेत्र में हेरिटेज फूड्स का जमीन खरीदने के पीछे बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कराए जाने की मांग की है।