हैदराबाद : वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो व आंध्र प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने उनकी पत्नी श्रीमती वाईएस भारती के खिलाफ टीडीपी समर्थित मीडिया द्वारा बुनी गई खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सच्चाई को लोगों के समक्ष रखने के लिए खुला पत्र के रूप में विवरण दिया। उन्होंने आंध्र प्रदेश के लोगों तथा देशभर में मौजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था के समर्थकों को एक खुला पत्र लिखा है।

'टीडीपी समर्थित मीडिया के अलावा कुछ अंग्रेजी पत्रिकाओं में मेरी पत्नी श्रीमती वाईएस भारती को ईडी अधिकारियों द्वारा कुछ मामले में आरोपी के रूप में शामिल किए जाने की खबरें प्रकाशित हुई हैं। न्यायाधीश के संज्ञान में लेने के बाद चार्जशीट में क्या है, इसका पता हम हो या कोई और को चलता है।

ऐसे में न्यायाधीश के संज्ञान में लिए बिना और हमारी जानकारी के बगैर यह सूचना सीधे प्रवर्तन निदेशालय से चंद समाचार पत्रों तक कैसे पहुंची? केवल मेरे खिलाफ नहीं बल्कि मेरे परिवार के सदस्यों को निशाना बनाने वाला दुश्मन आखिर कौन है? सीबीआई ने अपनी जांच में जिन कंपनियों व व्यक्तियों का जिक्र तक नहीं किया था, सालों बाद अब उन्हें चार्जशीट में क्यों शामिल किया जा रहा है? आखिर श्रीमती वाईएस भारती का इन मामलों से क्या संबंध है?

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टीडीपी और कांग्रेस ने मिलकर मेरे खिलाफ दाखिल किए गए मामले 10 अगस्त 2011 को शुरू हुए थे और आज 10 अगस्त 2018 को पूरे सात साल हो गए। कई चार्जशीट दाखिल किए गए। अन्याय से गिरफ्तार कर जेल में भी रखा गया। अदालतों के चक्कर लगवा रहे हैं।

वाईएसआर के निधन के बाद की गई प्रतिज्ञा के मुताबिक 'ओदार्पु यात्रा' करने और इस दौरान लोगों से बड़े पैमाने पर मुझे मिलते समर्थन को देख टीडीपी-कांग्रेस ने मिलकर मेरे खिलाफ मामले दर्ज करवाए। पिछले सात सालों से मैं कभी डरा नहीं। 'सत्यमेव जयते' पर भरोसा रखता हूं और इसीलिए सबकुछ सहता आ रहा हूं। आज टीडीपी समर्थित मीडिया की खबरें देखकर लगता है कि उन्होंने श्रीमती भारती को भी अदालत के चक्कर लगवाने का ठान लिया है।

आपको कुछ जरूरी बातें बताने की आवश्यकता है। प्रवर्तन निदेशालय में चंद्रबाबू के लिए तथा उनके आदेशों के अनुरूप काम कर रहे दो अधिकारी हैं उमा शंकर गौड़ तथा गांधी। ये दोनों अधिकारी हमें किस स्तर तक प्रताड़ित कर रहे हैं, इस बारे में एक पत्र के माध्यम से हम फरवारी 2017 में अर्थात करीब 17 महीने पहले देश के प्रधानमंत्री को बता चुके हैं।

इनमें से गांधी नामक अधिकारी ने अपने तबादले के बाद भी नौकरी से रिलीव नहीं हुआ है और तीन बार अपना कार्यकाल बढ़ा लिया है। इस सेवाकाल के विस्तार को केंद्र से भी मंजूरी मिली। टीडीपी के लोग अब उन्हीं अधिकारियों के जरिए हमारे खिलाफ रिपोर्ट लिखवा रहे हैं।

ऐसे में भाजपा-टीडीपी की अंदरूनी सांठगांठ के पीड़ित कौन है? राज्य के लोग अच्छी तरह से जान गए होंगे। चंद्रबाबू जो आरोप लगा रहे हैं और उसमें जरा भी सच्चाई है और भाजपा से हमारी करीबी और अच्छे संबंध हैं, तो आज हमारी स्थिति कुछ और होती। वास्तव में इन मामलों से कोई संबंध नहीं रहने वाली मेरी पत्नी का नाम दुश्मनी के तहत सात साल बाद ईडी के अधिकारी चार्जशीट में शामिल नहीं किए होते।

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चंद्रबाबू दिन में कांग्रेस के साथ और रात में भाजपा के साथ रह रहे हैं। पिछले नौ वर्षों से केंद्र सरकार में चाहे कोई भी रहे, मेरे खिलाफ दर्ज मामलों में किसी से डरे बिना और समझौता किए बिना एकीकृत आंध्र प्रदेश के संघर्ष से लेकर विशेष दर्जे के आंदोलन तक धैर्य के साथ राज्य की समस्याओं के लिए आंदोलन करता रहा हूं। हम प्रलोभन की राजनीति नहीं कर सकते और पर्दे के पीछे की राजनीति नहीं आती।

दूसरी तरफ, प्रलोभन की राजनीति के लिए मशहूर चंद्रबाबू नायडू के मामलों की बात अलग है। खुद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने स्प्ष्ट किया है कि चंद्रबाबू चाहे किसी भी पार्टी में हो, वह हमारे मित्र हैं। उसी तरह, केंद्रीय रक्षामंत्री के पति भी चंद्रबाबू नायडू की सरकार में है, जबकि महाराष्ट्र के वित्तमंत्री की पत्नी को चंद्रबाबू ने टीटीडी बोर्ड की सदस्य नियुक्त किया है। उसी तरह, तेलुगु फिल्म एनटीआर बॉयोपिक की शूटिंग के दौरान बालकृष्णा के बगल की कुर्सी में खुद उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू दिखाई देते हैं।

जन कल्याण के बजाय व्यवस्था को मैनेज करने वाले चंद्रबाबू नायडू मुख्य विपक्षी दलों का लोगों में सामना नहीं कर पा रहे हैं। यही नहीं, व्यवस्था के जरिए विपक्ष को नुकसान पहुंचाते हुए सत्ता में बना रहना चाहते हैं चंद्रबाबू। इसीलिए उन्होंने पहले मेरे पिता को निशाना बनाया और बाद में मुझे। अब मेरी पत्नी श्रीमती भारती को अपने आदमियों से निशाना बना रहे हैं।

अगर इस तरह के मामलों को मंजूरी देते जाएंगे तो देश में रक्षा कहां बचेगी। ऐसे में लोकतंत्र कहां बचा रहेगा? क्या राजनीति का नाम सुनते ही लोगों में घृणा नहीं होगी। आप सभी विचार करना चाहिए।