AP में ऐतिहासिक फैसला : पहली बार पॉस्को के तहत दी गई फांसी की सजा, गृह मंत्री ने की तारीफ  

डिजाइन फोटो - Sakshi Samachar

विजयवाड़ा : गृहमंत्री मेकातोटी सुचरिता ने मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या किये जाने के मामले में दोषी को चित्तूर कोर्ट द्वारा मौत की सजा सुनाये जाने की फैसले को ऐतिहासिक बताया।

सुचरिता ने सोमवार को जारी ट्वीट पोस्ट में आगे कहा कि पॉस्को कोर्ट के तहत मौत की सजा सुनाया जाना आंध्र प्रदेश के इतिहास में यह पहली घटना है। उन्होंने पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि मोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के केवल 17 दिन में चार्जशीट दाखिल किया है।

आपको बता दें कि 7 नवंबर को जिले के कुरबलकोटा मंडल क्षेत्र के चेनेतानगर में अपने माता पिता के साथ एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पीड़ित की बालिका आई थी। इस दौरान मदनपल्ली मंडल निवासी लॉरी क्लीनर मोहम्मद रफी ने बालिका को चॉकलेट देने के बहाने ले गया।

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इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में हत्या कर दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रफी को बालिका को ले जाते हुए पाया। घटना के बाद रफी छत्तीगढ़ भाग गया। रफी ने वहां जाकर सिर पर पूरे बाल काट दिये ताकि कोई उसकी पहचान न कर सके।

इसी क्रम में बालिका के माता पिता ने पुलिस थाने में इस घटना की शिकायत दर्ज की। पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी रफी को 16 नवंबर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने दाखिल चार्जशीट में रफी पर इससे पहले अनेक बालिकाओं के साथ दुष्कर्म किये जाने का उल्लेख किया। कोर्ट ने 30 दिसंबर से जनवरी तक कुल 41 गवाहों के बयान दर्ज किये।

पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने सोमवार को आरोपी को मौत के सजा सुनाई है। इस फैसले पर बालिका की मां और महिला संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बालिका के साथ न्याय हुआ है। अब जल्द से जल्द आरोपी को फांसी पर लटकाया जाये।

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने महिला और बालिकायों के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों को 21 दिन के अंदर सजा देने के लिए एपी दिशा कानून बनवाया है। सीएम जगन ने तेलंगाना में हुई दिशा घटना के बाद दिशा कानून बनाया है।

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