AP ESI घोटाले में TDP के नेता अच्चेन्नायडू का जेल जाना तय : श्रम मंत्री जयराम

मीडिया से रूबरू होते हुए श्रम मंत्री गुम्मनुरु जयराम - Sakshi Samachar

विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश के श्रम मंत्री गुम्मनुरु जयराम ने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू के शासनकाल में ईएसआई में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। चंद्रबाबू की सरकार ने कर्मचारियों को भी लूट लिया है। मंत्री ने ईएसआई में बड़े पैमाने पर घोटाले के उजागर होने के बाद मीडिया से यह बात कही।

उन्होंने चेतावनी दी कि ईएसआई घोटाले में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इस घोटाले में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए विजिलेंस जांच के आदेश दिये गये हैं।

मंत्री ने कहा कि पूर्व मंत्री अच्चेन्नायडू के खतों से स्पष्ट होता है कि वे इस भ्रष्टाचार में शामिल है। ईएसआई भ्रष्टाचार पर विजिलेंस की रिपोर्ट मिलते ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से भुगतान किये गये बिलों की रकम को वसूल किया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि इस घोटाले में अच्चेन्नायडू को जेल जाना तय है। केवल तीन संस्थाओं ने मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है। दवाइयों के दाम बेहिसाब से बढ़ाकर भ्रष्टाचार किया है।

आपको बता दें कि तेलंगाना की तरह आंध्र प्रदेश में भी ESI में बड़ा घोटाला सामने आया है। सतर्कता एवं प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में पिछले छह वर्षों से ESI में बड़ा घोटाला होने की बात सामने आई है। विजिलेन्स एंड एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक दवाइयों व मशीनों की खरीददारी में 900 करोड़ से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है।

विजिलेन्स अधिकारियों ने बताया कि पिछले छह वर्षों से सरकार के करोड़ों रुपए डकारे गए हैं। नकली कोटेशन्स तैयार कर रेट कॉंट्रैक्ट में नहीं रहने वाली कंपनियों से दवाइयां खरीदने की बात कह गई है। सरकार ने 89 करोड़ रुपए का भुगतान किया था, लेकिन रेट कॉंट्रैक्ट में मौजूद कंपनियों को 38 करोड़ का भुगतान कर बाकि 51 करोड़ का रास्ता मोड़कर रेट कॉंट्रैक्ट नहीं रहने वाली कंपनियों को वास्तविक से 132 फीसदी अधिक दाम पर बेचने के आरोप लगे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह भी पता चला है कि तेलंगाना में हुए ESI घोटाले में अहम भूमिका निभा चुके सप्लायर ही इस घोटाले में शामिल हैं। इस घोटाले में तत्कालीन निदेशकों रवि कुमार, रमेश कुमार, विजय कुमार सहित छह ज्वाइंट डायरेक्टर, फार्मासिस्ट्स, सीनियर असिस्टेंट्स शामिल हैं।

इनके साथ राज्य के तत्कालीन श्रममंत्री अच्चेन्नायडू की भीमिका की अधिकारी जांच कर रहे हैं। पता चला है कि अच्चेन्नायडू ने अपने करीबियों की टेली हेल्थ सर्विसेज कंपनी को ठेका सौंपने का निर्देश देते हुए ईएसआई के निदेशकों को पत्र लिखा था।

मंत्री के इशारे पर ही निदेशकों द्वारा करीब 975 करोड़ की दवाइयां खरीद कर उसमें 100 करोड़ से अधिक के नकली बिल तैयार करने के आरोप हैं। हालांकि दवाइयों की खरीद के लिए सरकार ने 293 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, लेकिन 698 करोड़ रुपए की दवाइयां खरीदने से जुडे नकली बिल दिखाकर सरकारी खजाने को करीब 404 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है।

ESI स्कैम को अंजाम देने वाली लेजेंड इंटरप्राइजेस, ओम्नी मेडी, इन्विरोनमेंट पर्फामेन्स कंपनियों को निदेशकों ने लैब किट्स की खरीदी के नाम पर 85 करोड़ रुपये का भुगतान किया। रिकार्ड्स के मुताबिक 2018-19 के लिए 18 करोड़ की दवाइयां खरीदी गई हैं, लेकिन वास्तव में सिर्फ 8 करोड़ की दवाइयां खरीद कर बाकी राशि डकारी गई।

यही नहीं, दवाइयों की खरीदी, लैब किट्स, फर्नीचर, ईसीजी सर्विसेज, बॉयोमैट्रिक मशीनों की खरीदादारी में भी बड़ा घोटाला हुआ है। वास्तव में एक बॉयोमैट्रिक मशीन की कीमत 16,000 हजार रुपये तक होती है, लेकिन उसकी कीमत 70 हजार रुपए बताते हुए नकली इंडेंट्स तैयार कर घोटाले को अंजाम दिया गया है।

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