अमरावती : तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख व आंध्र प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नारा चंद्रबाबू नायडू को उन्हीं के पार्टी के विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) ने करारा झटका दिया है। चंद्रबाबू की अध्यक्षता में रविवार को अमरावती में हुई टीडीपीएलपी की बैठक में छह सदस्य अनुपस्थित रहे।

पार्टी की बैठक में गैरहाजिर रहने वालों में गाली सरस्वती, के.ई. प्रभाकर, तिप्पेस्वामी, शत्रुचर्ला विजयरामराजू, एएस रामकृष्णा और शमंतकमणि शामिल हैं। पार्टी सुप्रीमो को सूचना दिए बिना अनुपस्थित होना राज्य की राजनीतिक खेमे में चर्चा का विषय बन गया है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार द्वारा लिए गए विकेंद्रीकरण के फैसले का चंद्रबाबू नायडू कड़ा विरोध कर रहे है। इसकी वजह से उत्तरांध्र और रायलसीमा से जुड़े पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं सहित विधायक और एमएलसी भी बाबू के रवैये को लेकर खासी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

टीडीपी के नेता खुलेतौर पर कोई भी बाबू की आलोचना नहीं कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों में व्यक्त हो रहे असंतोष की वजह से पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बरत रहे हैं। इसी क्रम में एमएलसी पोतुला सुनीता और शिवनाथ रेड्डी शुरू से पार्टी की नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना कर रहे हैं। एक और वरिष्ठ सदस्य डोक्का माणिक्यवर प्रसाद विधान परिषद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

दूसरी ओर, टीडीपी के सदस्यों का कहना है कि विधान परिषद में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और सीआरडीए रद्द बिल के मामले में चंद्रबाबू पर भरोसा करके धोखा खा चुके हैं। विधान परिषद को रद्द करने की दिशा में राज्य सरकार की पहल से टीडीपी के एमएलसी डिफेंन्स में गिर गए हैं और खुलेआम कहते दिख रहे हैं कि उनका राजनीतिक भविष्य अंधकारमय होने की स्थिति पैदा हुई है और इसके लिए चंद्रबाबू ही जिम्मेदार हैं।

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राजनीतिक करियर खत्म होने के डर से परेशान अपने एमएलसी को मनाने के लिए चंद्रबाबू नायडू पिछले दो दिनों से हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद टीडीपी के सदस्य उनसे भेंट करने को तैयार नहीं है।

ऐसे में यह बात साफ हो गई है कि विकेंद्रीकरण का विरोध करने वाले चंद्रबाबू को उनके खुद की पार्टी के सदस्यों ने झटका दिया है।