हैदराबाद/विजयवाड़ा : विश्लेषकों ने आंध्र प्रदेश में विधान परिषद में प्रदेश के सर्वांगिण विकास और राजधानी विकेंद्रीकरण बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने के अध्यक्ष के फैसला को अस्थाई बताया। साथ ही कहा कि इस बिल को पास होने में कोई नहीं रोक सकता।

सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रो के नागेश्वर राव ने कहा कि फैसले से सरकार को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। निर्धारित समय के बाद बिल फिर से पास हो जाएगा। विपक्ष का रवैया समय बर्बाद करने वाला है। मगर सरकार के फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। यह देखने की जरूरत है कि सेलेक्ट कमेटी को कैसे साथ और किसे नियुक्त करते हैं और इसकी रूप रेखा क्या है?

माडाभूषी श्रीधर

विश्लेषक प्रो माडाभूषी श्रीधर ने कहा कि विधानसभा और विधान परिषद दोनों ही विधि सभाएं हैं। इन दोनों सदनों के अपने-अपने अधिकारी हैं। मगर विधानसभा को अधिकार अधिक है। इस अधिकार का उपयोग करते हुए फिर से इन बिलों को विधानसभा में मंजूरी देकर फिर से विधान परिषद को भेजे जाने पर उसे विधान परिषद को मंजूरी देना अनिवार्य हो जाता है। इस समय बिल को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। मगर बिल को हमेशा के लिए रोका नहीं जा सकता है।

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गादे वेंकट रेड्डी

पूर्व मंत्री गादे वेंकट रेड्डी ने कहा कि राजधानी विकेंद्रीकरण बिल को विधानसभा में मंजूर होकर विधान परिषद में मंजूर नहीं होने पर दोनों सदनों की संयुक्त सभा को आयोजित करके इनमें संख्या बल के आधार पर बिल को पास किया जा सकता है। विशेष हालत में सत्तापक्ष अपने संख्या बल के आधार पर कुछ भी कर सकती है।

के सुरेश रेड्डी

संयुक्त आंध्र प्रदेश के विधानसभा पूर्व अध्यक्ष के सुरेश रेड्डी ने कहा कि विधान परिषद की परिधि केवल सुझाव देना मात्र होता है। विधानसभा को सभी अधिकार होते हैं। विधानसभा के फैसले पर विधान परिषद में चर्चा करके के बाद सलाह और सुझाव के साथ विधानसभा को वापस भेजना चाहिए। इन सलाह और सुझाव पर चर्चा करके अंतिम फैसला लेने का अधिकार विधानसभा को ही है। इस समय बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया है। विधान परिषद के इस फैसले को विधानसभा में मंजूर लेना भी अनिवार्य है।