अमरावती : आंध्र प्रदेश विधानसभा के पहले दिन जगनमोहन रेड्डी सरकार की हर रणनीति कारगर साबित हुई तो वहीं विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू अमरावती के मुद्दे पर चारों खाने चित होते नजर आए। न तो असेंबली को घेरने की तथाकथित आंदोलनकारी किसानों की रणनीति सफल हुई और न ही विधायकों को विधानसभा जाते समय रोकने व घेरने की कोशिश। हर जगह पुलिस व प्रशासन की एलर्टनेस से विरोधियों की सारी कोशिशें नाकाम साबित हुईं।

कहा जा रहा था कि जगन मोहन रेड्डी सरकार अमरावती के भविष्य के साथ साथ राजधानी व विकास के नए मॉडल पर बुलाई गयी विधानसभा व विधान परिषद के इस सत्र को चंद्रबाबू नायडू ने हंगामेदार बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ा था। विधानसभा के इस सत्र में अड़चन डालने के लिए कई दिन पहले से ही शुरू कर दी थी। किसानों तथा अपनी जमीन को बचाने के नाम पर आंदोलन करने वाले लोगों को असेंबली घेरने के लिए भी प्रेरित किया था।

इससे लग रहा था कि आज सरकार के सामने विधानसभा सत्र को चलाने में काफी मुश्किलें आएंगी। लेकिन सरकार और प्रशासन फूल प्रूफ तैयारी और जगनमोहन सरकार की हर स्तर की बनाई गई बारीक रणनीति को चंद्रबाबू नायडू के लोग भेद नहीं पाए और पूरे सत्र के दौरान अमरावती राजधानी के मामले पर बैठफुट पर देखे गए।

विरोध प्रदर्शन की योजना फेल

सबेरे से ही पुलिस प्रशासन की खास तैयारी के चलते आंदोलनकारी विधानसभा के पास केवल छुटपुट संख्या में ही इधर उधर से पहुंच पाए, जिसको वहां मौजूद पुलिस बल ने काफी आसानी से संभाल लिया। जिससे विरोध प्रदर्शन की योजना फेल हो गई।

विधानसभा का सत्र शुरू होने के पहले चंद्रबाबू नायडू जब अपने साथी विधायकों के साथ सदन में पहुंचे तो सदन के गेट पर थोड़ी देर के लिए विरोध स्वरूप बैठ गए और 'जय अमरावती' 'जय अमरावती' के नारे लगाए फिर फोटो खिंचवाकर अपने कमरे में चले गए।

चंद्रबाबू नायडू के कारनामे हुए उजागर

विधानसभा के सत्र की शुरुआत सरकार की ओर से वित्त मंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ रेड्डी ने 'आंध्र प्रदेश डिसेन्ट्रलाइजेशन एंड इनक्लुसिल डेवलपमेंट ऑफ ऑल रीजन बिल 2020' को पेश करते हुए काफी जोरदार तरीके से शुरूआत की और अपने लगभग 1 घंटे के भाषण में चंद्रबाबू नायडू और उनकी सरकार के कई कारनामे को तार तार करके रख दिया।

सरकार ने आरोप के साथ दिए प्रमाण

लैंड पूलिंग कई मामलों से लेकर बेनामी संपत्तियों के खुलासे और अमरावती में राजधानी बनाने की चंद्रबाबू नायडू की मंशा को कुछ इस अंदाज में पेश किया, जिससे विपक्षी दलों के पास चीखने व चिल्लाने के अलावा कोई चारा न था। वित्तमंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ की तैयारी कुछ ऐसी थी कि वह हर आरोप लगाने के साथ-साथ उसके प्रमाण भी देते जा रहे थे। ऐसी हालत में चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी नेताओं के पास केवल चीखने व चिल्लाने का रास्ता बचा था।

कुछ ऐसी ही तैयारी के साथ नगरीय प्रशासन व शहरी विकास मंत्री बोत्सा सत्यनारायण ने भी की थी। उन्होंने भी 'द आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी रिपील बिल 2020' को प्रस्तुत करते हुए चंद्रबाबू नायडू सरकार की गलतियों को सुधारने के लिए जगनमोहन रेड्डी सरकार के द्वारा की जा रही पहल को एक-एक करके गिनाया। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू के करीबियों के साथ-साथ सरकार के मंत्री रहे नेताओं पर एक-एक करके जमकर निशाना साधा उनके हर एक बयान पर टीडीपी के नेता शोर मचाने की कोशिश करते देखे गए।

फीकी नजर आई विपक्ष की रणनीति

ऐसा नहीं था कि सदन में तेलुगू देशम पार्टी के नेताओं को बोलने का मौका नहीं मिला उनकी ओर से भी कई नेताओं ने अपनी बात रखी लेकिन उनकी तैयारी सरकार के नेताओं की ओर से की गई तैयारी की अपेक्षा काफी फीकी नजर आई। ये नेता सरकार के द्वारा लगाए गए आरोपों का कायदे से जवाब भी नहीं दे पाए। वह केवल वह अपना बचाव करते देखे गए और अमरावती राजधानी को बरकरार रखने का राग अलाप दे रहे।

यह भी पढ़ें :

राजधानी अमरावती क्या किसी एक समुदाय को ध्यान में रख कर बनाई? : मंत्री कोडाली

राजधानी क्षेत्र में TDP के नेताओं ने अवैध रूप से खरीदी 4070 एकड़ भूमि : मंत्री बुग्गना

इतना ही नहीं खुद चंद्रबाबू भी जब बोलने के लिए खड़े हुए तो कई मामलों पर सरकार से सवाल तो पूछा पर हर सवाल को सरकार के मंत्रियों बुग्गना राजेन्द्रनाथ व बोत्सा सत्यनारायण ने खारिज कर दिया।

इतना ही नहीं चंद्रबाबू नायडू के भाषण में न तो वह जोश दिखा जिसके लिए वह जाने जाते हैं और न ही व राजनीतिक कार्यकुशलता व अनुभव दिखा जिसे वह अक्सर गिनाया करते थे।

- विजय कुमार तिवारी.. असिस्टेंट न्यूज एडिटर, साक्षी समाचार