एपी दिशा एक्ट-2019, जगह-जगह पर CM YS जगन मोहन रेड्डी का दुग्धाभिषेक

सीएम वाईएस जगन का दुग्धाभिषेक करती हुई महिलाएं - Sakshi Samachar

विजयवाड़ा : महिलाओं की सुरक्षा के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा लाये गये एपी दिशा एक्ट-2019 की प्रदेश में ही नहीं, पूरे देश में जमकर तारीफ हो रही है। एपी दिशा एक्ट 2019 को विधानसभा में मंजूरी मिलने केे बाद मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को बधाई का तांता लगा गया है।

मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास राव ने बताया कि बधाई देने वालों में उपराष्ट्रपति वेंकय्या नायुडू, अभिनेता चिरंजीवी और अनेक महिला संगठन के नेता शामिल है। साथ ही अब सभी राज्यों में एपी दिशा एक्ट को लागू करने की जोर शोर से मांग उठ रही है।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश के अनेक शहरों में मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के फोटो का दुग्धाभिषेक किया जा रहा है। इसी क्रम में स्थानीय 31 संभाग में महिलाओं ने आज सीएम वाईएस जगन के फोटो का दुग्धाभिषक किया है।

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31 संभाग में सीएम जगन का दुग्धाभिषेक करती हुए महिलाएं

इस अवसर पर मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास राव ने कहा कि किसी भी राज्य में नहीं ऐसा कानून सीएम वाईएस जगन ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिशा एक्ट को लेकर आये हैं। महिलाओं के प्रति व्यक्तिगत रूप से अपमानित करने या गाली-गलौज करने वालों पर भी यह कानून लागू होता है।

उन्होंने आगे कहा कि दिशा की तरह घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में दिशा एक्ट को लागू किया है। मगर जिस राज्य में दिशा कांड हुआ है, वहां के मुख्यमंत्री दिशा एक्ट लागू करने में हिम्मत नहीं जुटा पाये हैं। देश भर में दिशा एक्ट को लागू करने के लिए महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि सीएम जगन की दूरगामी सोच से दिशा एक्ट को लागू किया है। इस कानून का उद्देश्य आधी रात को भी महिलाएं स्वेच्छा से रह पाये। पूरे प्रदेश में सीएम जगन की जय जयकार हो रही है। चंद्रबाबू को इस कानून को स्वागत करने की हिम्मत दिखाई नहीं दे रही है। टीडीपी के नेताओं में महिलाओं के प्रति आदर नहीं है। देश की महिलाओं को इस समय वाईएस जगन से बहुत सी उम्मीदें है।

इससे पहले मंत्री ने संभाग का दौरा किया। साथ ही लोगों की समस्याओं को सुना। उन्होंने बताया कि ढाई करोड़ रुपये की लागत से 31 संभाग में विकास कार्य किये जाएंगे।

आपको बता दें कि हाल ही में आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने मसौदा कानून को स्वीकृति दे दी जो महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों का निपटारा 21 दिन में करने और दोषियों के लिए सजा-ए-मौत को अनिवार्य बनाता है। यह कानून, आंध्र प्रदेश अपराध कानून में एक संशोधन होगा जिसे 'दिशा एपी एक्ट' नाम दिया गया है।

पड़ोस के तेलंगाना में हाल ही में बलात्कार और हत्या का शिकार हुई महिला पशु चिकित्सक की याद में यह कानून लाया जा रहा है। इसके अलावा एक अन्य मसौदा कानून को भी मंजूरी दी गई जो महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

सरकारी सूत्रों की मानें तो यह दोनों विधेयक राज्य विधानसभा के जारी शीतकालीन सत्र में पेश किए जा सकते हैं। प्रस्तावित ‘आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम' के तहत, बलात्कार के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। संशोधित कानून, ऐसे मामलों में जहां संज्ञान लेने लायक साक्ष्य उपलब्ध हों, जांच को सात दिनों में पूरी करने और अगले 14 दिनों में अदालत से मुकदमा चलाने का प्रावधान करता है ताकि 21 दिनों के भीतर सजा दी जा सके।

मौजूदा कानून ऐसे मामलों में मुकदमा चलाने के लिए चार महीने का समय देता है। मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने,“महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ निर्दिष्ट अपराध के लिए आंध्र प्रदेश विशेष अदालत कानून, 2019' के मसौदे को भी स्वीकृति दी।

इस कानून के तहत, सभी 13 जिलों में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी जो बलात्कार, यौन उत्पीड़न, तेजाब हमला और सोशल मीडिया के जरिए उत्पीड़न जैसे महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाएंगी। अपराध की गंभीरता को देखते हुए, इस कानून में पॉक्सो कानून के तहत मिलने वाली सजा के साथ ही 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

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