विजयवाड़ा : आंध्र प्रदेश सूचना एवं प्रसारण मंत्री पेर्नी नानी ने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेता चंद्रबाबू नायडू ने प्रजा वेदिका अवैध की बात मालूम होते हुए भी जनता के पैसे का दुरुपयोग किया है। नानी ने बुधवार को मीडिया से यह बात करते हुए आगे कहा कि चंद्रबाबू ने प्रजा वेदिका के नाम पर अवैध कामों को अंजाम दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि चंद्रबाबू ने अपने निवास को बचाने के लिए प्रजा वेदिका का निर्माण किया है। इतना ही नहीं चंद्रबाबू को कानून के प्रति बिल्कुल ही सम्मान नहीं है। इसीलिए चंद्रबाबू ने कभी भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निमय का पालन नहीं किया है।

मंत्री ने बताया कि प्रजा वेदिका में जो कीमती सामान थे, उसे अधिकारियों ने फिर से इस्तेमाल किये जाने के लिए बाहर ले गये हैं। जहां तक हो सके नुकसान को कम किये जाने की कोशिश की जा रही हैं।

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उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि प्रजा वेदिका के लिए आठ करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। मगर यहां पर तो केवल टीन के शेड दिखाई दे रहे हैं।

आपको बता दें कि कृष्णा नदी करकट्टु पर पिछली तेलुगु देशम पार्टी सरकार द्वारा अवैध निर्मित प्रजा वेदिका को ढहाये जाने के खिलाफ दायर याचिका की हाईकोर्ट में कल आधी रात को सुनवाई हुई। मगर हाईकोर्ट ने प्रजा वेदिका को गिराये जाने पर रोक लगाने से किया।

इससे पहले दायर याचिका में अनेक बार कोर्ट से कहा कि प्रजा वेदिका अवैध निर्माण है। हाईकोर्ट ने याचिका कर्ता से सवाल किया कि बताये कि प्रजा वेदिका अवैध है या नहीं? यदि आप कुछ कहने की हालत में नहीं है तो इसमें जन हित का सवाल कहां और कैसे उत्पन्न होता है? साथ ही कोर्ट ने सरकार की ओर से बहस में भाग लिये एजी श्रीराम के बहस को सही ठहराया।

प्रजा वेदिका को ढहाने के विरोध प्रकाशम जिले के स्वर्णा गांव निवासी और समाजसेवी पोलूरि श्रीनिवास राव ने जन हित याचिका दायर की। मंगलवार रात को हाउस मोशन के रूप में यह याचिका दायर की। उन्होंने दायर याचिका में कहा कि प्रजा वेदिका को 8.9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया गया है। प्रजा वेदिका को लोगों की पैसा से बनाया गया है। इस बात को ध्यान में रखते हुए लोगों के विचार जानने की आवश्यकता है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रजा वेदिका पर जितना खर्च हुआ है उसे वसूल किये जाने को लेकर बहस आगे भी जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिये चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।

श्रीनिवास राव ने दायर याचिका में सरकार के मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, नगर निगम के प्रधान सचिव, सड़क एवं भवन विभाग के प्रधान सचिव के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायुडू, पूर्व मंत्री पी नारायण को प्रतिवादी बनाया है। इस जन हित याचिका पर जस्टीस एम सीताराम मूर्ति और जी श्याम प्रसाद की खंडपीठ ने आपातकाल में सुनवाई स्वीकार की।