हैदराबाद : तिरुपति लोकसभा सीट पर इस बार सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बीच कांटे की टक्कर है। यहां से टीडीपी की उम्मीदवार व पूर्व केंद्रीय मंत्री पनबाका लक्ष्मी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बल्ली दुर्गा प्रसाद राव के बीच मुकाबला है।

2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से वाईएसआर पार्टी के उम्मीदवार वरप्रसाद राव वेलगपल्ली की जीत हुई थी। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेट्स नहीं दिए जाने के विरोध में वर प्रसाद राव ने सांसद पद से इस्तीफा दिया था।

यहां का वोटर इस बार काफी सतर्क है और कह रहा है कि उसे पता है कि किसे वोट देना है। 2004 से 2014 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद अब यह सीट वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कब्जे में है।

वाईएस विजयम्मा के साथ बल्ली दुर्गा प्रसाद राव 
वाईएस विजयम्मा के साथ बल्ली दुर्गा प्रसाद राव 

इस क्षेत्र के अंतर्गत गुडुरु, सत्यवेडु और सुल्लुरपेट विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जबकि तिरुपति, सर्वेपल्ली, श्रीकालहस्ती और वेंकटगिरि निर्वाचन क्षेत्र में बीसी व अन्य समुदायों के नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के दायरे में आने वाले अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में वाईएसआरसीपी का दबदबा देखने को मिल रहा है।

अनुभव का मिल सकता लाभ

गत 16 मार्च 2019 को पार्टी में शामिल हुए बल्ली दुर्गा प्रसाद राव को वाईएस जगन ने तिरुपति लोकसभा सीट से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। बल्ली दुर्गा प्रसाद राव इससे पहले गुडुरु विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए थे। बल्ली दुर्गा प्रसाद राव काफी वरिष्ठ नेता है और चित्तूर जिले में उन्हें कद्दावार नेता माने जाते हैं।

दूसरी तरफ, हाल ही में टीडीपी में शामिल हो चुकी पनबाका लक्ष्मी इससे पहले वाईएसआर के शासनकाल में केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं। इस बार तिरुपति से ऐसे दोनों नेता आमने-सामने हैं, जिनमें से एक कांग्रेस छोड़कर टीडीपी में शामिल हुए हैं, वहीं दूसरे कांग्रेस छोड़कर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए हैं।

पनबाका लक्ष्मी (फाइल फोटो) 
पनबाका लक्ष्मी (फाइल फोटो) 

मुख्य रूप से इस बार वोटरों का झुकाव वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की तरफ दिख रहा है। वोटरों का कहना है कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने राज्य के लिए स्पेशल स्टेट्स की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करती रही है और इसके लिए पार्टी के सभी सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। यही नहीं, वाईएसआरसीपी ने स्पेशल स्टेट्स की मांग को लेकर संसद में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर चुकी है।

बाबू से नाराजगी का माहौल

यहां के लोगों का मानना है कि एकीकृत आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश के हिस्से में कुछ नहीं आया है। ऐसे में राज्य को स्पेशल स्टेट्स मिलने पर विकास संभव है। ऐसे में स्पेशल स्टेट्स को केंद्र के पास गिरवी रखकर स्पेशल पैकेज स्वीकारने वाले चंद्रबाबू नायडू को वोट देने का मतलब राज्य के साथ विश्वासघात करने जैसा है। यही नहीं, वोटरों का कहना है कि चंद्रबाबू ने पिछले पांच वर्षों में अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है। ऐसे में बाबू को वोट देने का सवाल ही नहीं उठता।

यह भी देखने को मिल रहा है कि तिरुपति के वोटर वाईएस जगन द्वारा घोषित नवरत्नालु से काफी प्रभावित है और उन्हें लगता है कि जगन के मुख्यमंत्री बनने से यहां की समस्याओं का समाधान हो सकता है।