राजनीतिक चक्रव्यूह में घिर गए हैं चंद्रबाबू, कुर्सी जाने का सताने लगा डर 

चंद्रबाबू नायडू और वाईएस जगन मोहन रेड्डी  - Sakshi Samachar

हैदराबाद : एकसमय में तेलुगु भाषी राज्यों में एकक्षत्र राज्य करने वाले चंद्रबाबू नायडू अब इन इलाकों में भी घिरने लगे हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे तेलुगुभाषी राज्य सहित हर जगह उनकी रणनीति फेल होती नजर आ रही है और वहीं उनके विरोधी नेता मजबूत होते जा रहे हैं। अपनी हरकतों के कारण उनके दोस्त कम विरोधी ज्यादा मैदान में नजर आ रहे हैं।

अब जैसे जैसे एक के बाद एक चुनाव और उनके नतीजे आ रहे हैं, वैसे वैसे इस बात का आभास धीरे धीरे चंद्रबाबू नायडू को भी होने लगा है कि अब उनका राजनीतिक ग्राफ ढलान की ओर तेजी से जा रहा है। तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और अन्य दलों के साथ महागठबंधन बनाने के बावजूद जिस तरह से तेलुगु देशम पार्टी की हार हुई उससे चंद्रबाबू को लगने लगा है कि अब जल्द ही इनकी राजनीति धीरे धीरे हासिए पर आने वाली है।

वाईएस जगन और चंद्रबाबू नायडू 

तेलंगाना की तरह परिणाम का अंदेशा आंध्र प्रदेश के चुनाव में भी लगाया जा रहा है, क्योंकि यहां तो वह अकेले मैदान में हैं। कांग्रेस और भाजपा भी उनके खिलाफ मैदान में है। इससे धीरे-धीरे यह साफ होने लगा है कि चंद्रबाबू नायडू अब अपने ही घर में घिरने लगे हैं और उनकी राजनीति चालों ने उन्हें ऐसे लेवल पर ला खड़ा किया है जहां से एक तरफ खाईं और दूसरी तरफ कुआं है। मामला साफ है कि अब वह चाहे कुछ भी कर लें, नुकसान होना तय है।

चंद्रबाबू नायडू

इसलिए भी परेशान

काफी लंबे समय केंद्र में भाजपा के खिलाफ तीसरे मोर्चे की मुहिम में जुटे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की घेराबंदी में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की भूमिका अहम मानी जा रही है। राव ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वहां के प्रमुख विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन का ऐलान किया है। साथ ही एमआईएम को भी साथ ले लिया है। एक तरह से टीआरएस ने तेदेपा के खिलाफ एक अघोषित फ्रंट बना दिया है, जिससे निकलना नायडू के लिए टेढी खीर साबित हो सकती है।

चंद्रबाबू नायडू 

चंद्रबाबू को रिटर्न गिफ्ट देने की घोषणा करने वाली टीआरएस की पहल पर ही एमआईएम ने भी जगनमोहन रेड्डी को समर्थन का ऐलान किया है। ऐसी संभावनाएं हैं कि एमआईएम के असददुद्दीन ओवैसी और केसीआर और उनके बेटे के.टी. रामाराव कई सभाएं जगनमोहन रेड्डी के लिए आंध्र प्रदेश में कर सकते हैं। वैसे इन इलाकों में टीआरएस अपने उम्मीदवार खड़े नहीं करेगी।

ऐसी झलक रही बाबू की बौखलाहट

चंद्रबाबू नायडू फिलहाल इस अघोषित गठबंधन से परेशान हैं और एक एक करके उनकी पार्टी के कई नेता भी हवा का रुख भांपकर पाला बदलने लगे हैं। अब वह अपनी खीझ भाजपा पर निकाल रहे हैं। वह अक्सर कहते हैं सुने जाते हैं कि टीआरएस और एमआईएम के समर्थन के पीछे भाजपा की चाल है। वे कहते हैं कि वाईएसआर और टीआरएस में पहले ही तय हो चुका है कि वे लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा को समर्थन देंगे, जबकि भाजपा ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया था।

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हालांकि, नायडू ने पिछले विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था। तब वे एनडीए के घटक थे। विधानसभा की 175 में से 102 सीटें उन्होंने जीती थी। लेकिन वाईएसआर कांग्रेस का प्रदर्शन भी अच्छा था। उसने 68 सीटें जीतीं। तीन सीटें भाजपा तथा दो सीटें छोटे दलों को मिली थी। लेकिन इन पांच सालों में स्थिति बदल चुकी है। तेदेपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है। भाजपा का साथ देने के बावजूद आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिला पाना भी उनके खिलाफ जा रहा है।

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