अमरावती: मंगलगिरी विधानसभा क्षेत्र गुंटुर जिले में आता है। यह विधानसभा गुंटूर लोकसभा के अन्तर्गत आता है। 2011 की जनगणना के अनुमानों के मुताबिक, यहां की कुल आबादी 32,2386 है। इसमें से 44.9 फीसदी ग्रामीण है, जबकि 55.1 फीसदी शहरी आबादी है। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का अनुपात कुल जनसंख्या से क्रमशः 22.9 और 3.27 है।

2018 की वोटिंग लिस्ट के मुताबिक, इस निर्वाचन क्षेत्र में 227059 वोटर्स और 254 मतदान केंद्र हैं। 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 85.63 फीसदी वोटिंग हुई थी।जयदेव गल्ला (TDP) गुंटूर के वर्तमान लोकसभा सांसद हैं और अल्ला राम कृष्ण रेड्डी मंगलागिरी विधानसभा के वर्तमान विधायक हैं।

आल्ला रामकृष्णा रेड्डी 
आल्ला रामकृष्णा रेड्डी 

कौन है अल्ला राम कृष्ण रेड्डी

अल्ला राम कृष्ण रेड्डी गुंटुर जिले की रहने वाले हैं। वे इस सीट से पहली बार विधायक चुने गए है। वाईएसआरसीपी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले रेड्डी का मुकाबला टीडीपी के गंजी चिरंजीवि से था। दोनों के बीच कांटे की टक्कर हुई थी और दोनों के बीच महज 12 वोटों से जीत हार तय हुई। इस चुनाव में रेड्डी को जहां 88977 वोट मिले थे। वहीं चिरंजीवि को 88965 वोट मिले थे। इस चुनाव में कुल 1,98,941 वोटों ने वोटिंग की थी।

कब-कब हुए चुनाव

वैसे तो इस सीट पर मिला जुला असर रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा बार यहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर हुए पहला चुनाव साल 1952 में हुआ। इस चुनाव में सीपीआई से डी लक्ष्मैया ने चुनाव जीता था उन्होंने केलपी के आई गोविंदा राव को हराया था।

1955 में हुए चुनाव में सीपीआई को पछाड़ कांग्रेस ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। इस चुनाव में कांग्रेस ने मेका कोटिरेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने सीपीआई के एन. वेंकटरंगाराव को हराया था। इसके बाद 1962 में इस सीट पर सीपीआई ने फिर से अपना कब्जा जमा लिया और कांग्रेस को पटखनी दे दी। इसके बाद 167 के चुनाव में फिर कांग्रेस ने इस सीट को अपने कब्जे में ले लिया। इस चुनाव में कांग्रेस ने टीएन राव को अपना उम्‌मीदवार बनाया था। इस चुनाव में उन्होंने सीपीआई के वेमुलापल्ली को मात दी थी।

1972 में यह सीट एक बार सीपीआई के खाते में चली गई और यहां से वेमुलापल्ली ने अपनी पार्टी की झोली में जीत डाल दी। इस चुनाव में उनका मुकाबला स्वंतंत्र उम्मीदवार गजुल्ला गंगाधर रेड्डी को हराया था। इसके बाद 1978 में यह सीट जनता पार्टी के खाते में चली गई और जीवी रत्तैया ने यहां से जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के टी नागेश्वर राव को मात दी थी।

1983 में यह सीट टीडीपी के खाते में गई। टीडीपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला हुआ जिसमें टीडीपी ने बाजी मार ली। टीडीपी ने कोटेश्वर राव को अपना उम्मीदवार बनाया था। जबकि कांग्रेस ने रयापति श्रीनिवास को अपना उम्मीदवार बनाया था। 1985 में यह सीट एक बार टीडीपी के कोटेश्वर राव के हाथों में आ गई और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार जमुना जो कि एक एक्ट्रेस थी उनको इस सीट पर मात दी। 1985 के बाद 1989 में इस सीट पर मतदान हुआ और कांग्रेस ने एक बार फिर बाजी मार ली। कांग्रेस के गोली वीरअंजनेयलु ने सीपीएम के सिम्हाद्रि शिवारेड्डी को मात दी।

1994 में यह सीट सीपीएम के खाते में चली गई। सीपीएम ने यहां से निम्मागड्डा रामाराव को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने कांग्रेस के डी उमामहेश्वर राव को हराया था।

1999 में हुए चुनाव से लकेर साल 2009 तक यानी तीन पंचवर्षीय यह सीट कांग्रेस के पास ही रही। इस सीट से लगातार दो बार एम हनुमंथा राव यहां से विधायक रहे। 1999 के चुनाव में उन्होंने जहां सीपीएम के एन राममोहन राव को हराया था। वहीं साल 2004 में हुए चुनाव में एम हनुमंथा राव ने बीजेपी के तम्मीसेट्टी जानकी देवी को हराया था।

साल 2009 में कांग्रेस ने यहां से कमला कांद्रू को अपना उम्मीदवार बनाया था। उनका मुकाबला पीआरपी के तम्मीसेट्टी जानकी देवी से था। इस चुनाव में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।