आंध्र प्रदेश की 175 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है मदनपल्ले, जो चित्तूर जिले के अंतर्गत आता है। चित्तूर जिले में कुल 14 विधानसभा क्षेत्र हैं, जो राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। मदनपल्ले मंडल के अंतर्गत राजस्व प्रभाग का मुख्यालय है। रेशमी साड़ियों के बुनने और उसे तैयार करने के कारखाने ज्यादा हैं।

चित्तूर जिले में मदनपल्ले के अलावा सत्यवीड़ु, गंगाधर नेल्लोर, पुथलपट्टु, नागरी, श्रीकालाहस्ती, चित्तूर, चंद्रगिरी, पलमनेरु, कुप्पम, पुंगनूर, थम्बालापल्ली, पिलेरू और तिरुपति विधानसभा क्षेत्र हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार, शहर की जनसंख्या 180,180 है। जिसमें 90,700 पुरुष, 89,480 महिलाएं और 13,448 बच्चे हैं। औसत साक्षरता दर 99.40 फीसदी है। यहां तेलुगू और उर्दू दोनों भाषाएं बोली जाती हैं।

विधायक  डॉ एमएस देसाई थिप्पा रेड्डी (फाइल फोटो)
विधायक डॉ एमएस देसाई थिप्पा रेड्डी (फाइल फोटो)

कब-कब हुए चुनाव

मदनपल्ले विधानसभा सीट पर कांग्रेस और टीडीपी का वर्चस्व रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में वाईएसआरसीपी ने यहां जबरदस्त जीत दर्ज की थी।

बात करें साल 1955 के चुनाव की तो यहां पर कांग्रेस के टी गोपालाकृष्णैय्या गुप्ता ने सीपीआई के डी सीतारमैय्या को हराया था। कांग्रेस प्रत्याशी को 18668 वोट मिले थे। साल 1962 में सीपीआई उम्मीदवार डी सीतारमैय्या को 17357 वोट मिले थे और उन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज की थी।

साल 1967 में मदनपल्ले सीट कांग्रेस के खाते में एक बार फिर चली गई और एएन राव ने यहां से जीत दर्ज की। उन्होंने आरआर रेड्डी को हराया था। साल 1972 में एनएन राव एक बार फिर यहां से विधायक बने और उन्होंने बीजेएस के एम रेड्डी को हराया।

साल 1978 में कांग्रेस (आई) के प्रत्याशी जी वेंकट नारायण रेड्डी ने जेएनपी प्रत्याशी एस बालाराम को हराया। जी वेंकट नारायण रेड्डी को 34224 वोट मिले थे। साल 1983 में निर्दलीय उम्मीदवार आर नारायण रेड्डी ने बाजी मारी और उन्होंने कांग्रेस के कडपा सुधाकर रेड्डी को हराया।

1983 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीतने वाले तत्कालीन विधायक आर नारायण रेड्डी ने साल 1985 में टीडीपी का दामन थाम लिया और एक बार फिर जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अल्लूरी सुब्रह्मण्यम को हराया।

साल 1989 में इस सीट पर एक बार फिर कांग्रेस का कब्जा हुआ और ए मोहन रेड्डी यहां से विधायक चुने गए। उन्होंने दो बार के विजेता आर नारायण रेड्डी को हराया। साल 1994 में टीडीपी प्रत्याशी रत्ताकोंडा कृष्ण सागर ने कांग्रेस प्रत्याशी ए सुब्रह्मण्यम को हराया।

साल 1999 में टीडीपी प्रत्याशी रत्ताकोंडा शोभा ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। इन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी जी मुजीब हुसैन को हराया।

साल 2004 में इस सीट पर एक बार फिर टीडीपी विधायक चुने गए और डी रमेश ने निर्दलीय प्रत्याशी जी रामदास चौधरी को हराया। डी रमेश को 52988 वोट मिले थे। साल 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी एम शाहजहां बासा ने टीडीपी प्रत्याशी आर कृष्णा सागर रेड्डी को हराया। उन्हें 53456 वोट मिले थे।

साल 2014 में इस सीट पर वाईएसआरसीपी का कब्जा हो गया। डॉ एमएस देसाई थिप्पा रेड्डी ने भाजपा प्रत्याशी को हराया। इन्हें 81252 वोट मिले थे।