नई दिल्ली : माकपा और भाकपा नेताओं ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू द्वारा सोमवार को दिल्ली में आहूत धर्म पोराटा दीक्षा (एक दिवसीय अनशन) में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया है। दोनों वामदलों के प्रदेश सचिवों पी. मधु और के. रामकृष्णा ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टियां चंद्रबाबू के अनशन कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगी।

इस मौके पर उन्होंने याद दिलाया कि चंद्रबाबू सरकार ने पुलिस से विशेष दर्जे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं की पिटाई करवा कर उनके खिलाफ मामले दर्ज करवाए थे। उस वक्त दर्ज किए गए मामले अभी तक नहीं हटाए गए हैं और उनके कार्यकर्ता अभी भी अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं।

माकपा और भाकपा नेताओं का कहना था कि जरूरत की स्थिति में आंदोलन को तवज्जू दिए बिना चुनाव से ठीक दो महीने पहले चंद्रबाबू नायडू की इस तरह की जल्दबाजी सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक हितों के लिए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अगर उस समय स्पेशल पैकेज की जगह विशेष दर्जे की मांग पर अड़े रहे होते, तो हम जरूर उनका साथ दिए होते।

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उन्होंने कहा कि अपने आंध्र प्रदेश दौरे में प्रधानमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर जमकर बरसे थे और अब बाबू दिल्ली में प्रधानमंत्री पर गरजेंगे, लेकिन इससे राज्य के लोगों को कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे कुछ लोगों ने हमें (माकपा व भाकपा) को आमंत्रित किया था, लेकिन हमने स्पष्ट कर दिया कि हम कार्यक्रम में नहीं जाएंगे।