06-01-2019, रविवार

तलतंपरा, श्रीकाकुलम जिला

बिचौलिए के राज में किसानों को कैसे मिल सकता है समर्थन मूल्य?

पदयात्रा शुरू हो कर लगभग 14 महिने बीते। सुबह पदयात्रा के शुरू होते ही चंद्रबाबू के भ्रष्टाचार पर लिखी गई पुस्तक 'अवनीति चक्रवर्ती' का मेरे हाथों विमोचन हुआ। श्रीकाकुलम जिले में कदम-कदम पर पलायन की कहानियां सुनने को मिली। पलायन में इच्छापुरम निर्वाचन क्षेत्र पहले नंबर है। यहां खेती करना असंभव हुआ। मछली पकड़ने का रोजगार भी प्रभावित हुआ। रोजगार के अवसर नहीं। पलायन के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं। कहीं दूर चेन्नई या कोलकाता को यहां कई लोग पलायन कर चुके हैं। कुछ लोग पाकिस्तान के तटीय क्षेत्र में सैन्य द्वारा बंदी बनाये गये। एजेंट के हाथों धोखाधड़ी का शिकार हुये। विदेश के नाम पर उन्हें गुमराह किया गया।

खाड़ी देशों में पीड़ितों में अधिक पीड़ित श्रीकाकुलम जिले से ही हैं। हजारों लोग जीवनयापन के लिए पलायन कर चुके हैं। पलायन करने वाले मजदूरों की आप-बीती सुनने पर मन उदास हुआ। इन्हीं पीड़ितों में से एक राजेश्वरी की आप-बीती। उसका पति रोजगार की तलाश में गया और तीन वर्ष के बावजूद घर वापस नहीं लौटा। सुनकर बहुत दुख हुआ। लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में किसी तरह के ठोस कदम नहीं उठाने वाले सरकार से क्या कहना? बिचौलियों के चलते किसान और मछुआरों को पलायन करना पड़ा, क्या इसके लिये सरकार जिम्मेदार नहीं है?

जिंकीबद्रा के निकट टमाटर की फसल लेने वाले किसानों ने मुझसे मुलाकात की। कड़ी मेहनत कर टमाटर की फसल उगाने के बावजूद समर्थन मूल्य नहीं मिलने से परेशान हो रहे हैं। यह कोई नयी बात नहीं है। टमाटर के भाव आसमान को छूने पर भी उन्हें उत्पादन के लिए समर्थन मूल्य नहीं मिला। फसलों की लागत का खर्च भी नहीं निकल पाया। इससे उभरने के लिये सरकार भी ठोस कदम नहीं उठा रही है। बिचौलियों के चलते रातो-रात दाम गिर जा रहे हैं।

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सोमपेट में नाराज चल रहे लोगों ने शिकायत की कि गांव में सड़क विस्तारीकरण का काम ठप्प हुआ है। इसके अलावा नाली निकासी कई दिनों से नहीं हो रही है। काविटी जूनियर कॉलेज के छात्रों ने अपनी समस्या की जानकारी दी। कॉलेज में लगभग 300 छात्र हैं। उनके लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। उन्हें खुले में शौच करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री से मेरा सवाल... यहां जीवनयापन नहीं कर पाने की स्थिति में अपनों से दूर जाने पर... अधिक आय के लिए पलायन करने का आरोप लगाना, क्या मानवता है?

YS जगन मोहन रेड्डी