05.01.2019, शनिवार

लक्कवरम क्रॉस, श्रीकाकुलम जिला

आज सोमपेट मंडल के तुरकशासनम गांव से पालवलसा, कोर्लाम, बारुवा जंक्शन, लक्कवरम क्रॉस तक पदयात्रा चली। ये सभी राज्य के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल हैं। लगातार आ रहे तूफानों की वजह से यहां के गांव बुरी तरह से बर्बाद हुए हैं। यहां के कई मकान नष्ट हो चुके हैं। सैकड़ों एकड़ में फसल तबाह हो चुकी है, परंतु इनकी तरफ देखने वाला कोई नहीं है। यहां के तूफान पीड़ितों को मुआवजा तो दूर, कम से कम कल्याण योजनाओं का लाभ तक नहीं मिल पा रहा है।

पालवलसा कॉलोनी की दुन्नशेषम्मा की छाति में ट्यूमर है। जराबंद निवासी कोंडा रामू के दिल में छेद है। अस्पताल पहुंचने पर आरोग्यश्री नहीं होने के नाम पर उन्हें वापस भेज दिया गया। सुंकिड़ी गांव निवासी बोंडाड राजम्मा, मड्डु दालम्मा, पालवलसा निवासी गोकर्ला धर्मावती गरीब विधवाएं हैं और वे सभी मजदूरी कर अपना पेट पाल रही हैं।

ये तीनों पिछले तीन वर्षों से विधवा पेंशन के लिए अधिकारियों और नेताओं के चक्कर लगा रही हैं। लगभग 70 वर्षीय कर्री एंडम्मा, बदकला कोसराजू ने आंसू बहाते हुए बताया कि उन्हें वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रहा है। बारुवा कोत्तूर में मछुआरे परिवार से जुड़ी स्वाती जन्म से मूक और बहरी है। सरकारी रिकार्ड्स में यह लिखकर 100 प्रतिशत विकलांग रही स्वाती का पेंशन रोक दिया गया है कि उसी मौत हो चुकी है। उसी गांव के वलिशेट्टी ऋषि को पिताजी के शासनकाल से मिल रहे पेंशन को इस सरकार ने रुकवा दिया है।

कल्याण योजनाओं से वंचित हैं लोग

सुंकिड़ी गांव निवासी महालक्ष्मी, इप्पिली लक्ष्मी, गीतांजलि को दो-दो बेटियां हैं। उन्होंने बंगारुतल्ली योजना के तहत अपनी बेटियों के नाम दर्ज करवाए। पिछली सरकार में इस योजना के तहत विभिन्न चरणों में मिलनी वाली राशि जमा हो चुकी है। परंतु इस सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके खाते में नया पैसा जमा नहीं हुआ है।

कमजोर तबकों से जुड़ी स्वाती और साईकिरण ने बताया कि योग्यता होने के बाद भी उनकी छात्रवृत्ति नहीं दी जा रही है। दालम्मा नामक वृद्धा ने आंसू बहाते हुए बताया कि कई चक्कर लगाने के बावजूद उसे मकान नहीं दिया जा रहा है। बगैर किसी सहायता के वृद्ध महिला किसी तरह अपना गुजारा कर पा रही है। यह सब देखकर ऐसा लगा कि क्या राज्य में कोई सरकार भी है या नहीं? सरकार जनकल्याण को लेकर गंभीर नहीं है।

तोंडीपूड़ी गांव में आठवीं और नौवीं कक्षा की छात्राएं हैं और गांव में जिला परिषद हाईस्कूल तूफान के कारण तबाह हुआ है। कक्षाओं की छत गिर चुकी है। विद्यार्थी स्कूल जाने से डर रहे हैं और उन्हें स्कूल के परिसर में स्थित पेड़ों के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। कोई अधिकारी इस स्कूल की बदहाली को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

छात्रा को नहीं मिली प्रोत्साहन राशि

सोमपेट निवासी विनोद और मेनका प्रधान दंपत्ति मुझसे मिले। उनकी बेटी नदिया ने इंटरमीडिएट में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए राज्यस्तर पर सेकेंड रैंक हासिल किया। तीन साल पहले तिरुपति में खुद मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री दोनों ने उस छात्रा को सम्मानित कर मेडल और प्रतिभा अवार्ड भी प्रदान किया।

इस मौके पर उन्होंने छात्रा को बताया कि इस अवार्ड के तहत उसके खाते में 20 हजार रुपये जमा होंगे। बैंक खाता खोलकर तीन साल हो गए और छात्रा ने तीन साल की बी.कॉम की पढ़ाई पूरी कर ली है, लेकिन आज तक उसके खाते में राशि जमा नहीं हुई है। दंपत्ति ने कहा कि इस तरह की नाइंसाफी किसी और के साथ नहीं होनी चाहिए। अवार्ड देने के नाम पर खुद का प्रचार करने वाले नेताओं का दिल विद्यार्थियों को धोखा देने के लिए कैसे राजी होता है।

सरकार के प्रचार के लिए विज्ञापनों में झूठ का सहारा

मुख्यमंत्रीजी मेरा एक सवाल है...एक ही दिन कई लोग मुझसे मिलकर कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने और तितली तूफान का मुआवजा तक नहीं मिलने की शिकायत की है। परंतु आप हर परिवार का विकास, 100 प्रतिशत कल्याण, 100 फीसदी संतुष्ट लिखकर विज्ञापनों के जरिए अपनी सरकार का प्रचार कर रहे हैं। क्या ये धोखा नहीं है? विद्यार्थी प्रतिभा अवार्ड देते हुए आपके द्वारा घोषित पुरस्कार राशि नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत आपके द्वारा दिए गए चेक बाउन्स होने के मामले कई हैं। लोग शिकायत कर रहे हैं कि तितली तूफान के मुआवजे के तहत दिए गए चेक बाउंस हो रहे हैं। इस तरह की खबरें देखकर क्या आपको लज्जा नहीं आती। वास्तविकता कुछ और है, लेकिन आप सब ठीक-ठाक होने का दावा करते हुए श्वेत पत्र जारी करना क्या लोगों के साथ विश्वासघात नहीं है?

वाईएस जगन