आंध्र प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष YS जगन मोहन रेड्डी ने अपनी प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान 'साक्षी' को दिए एक साक्षात्कार में पिछले चार सालों में जनसमस्याओं को लेकर चंद्रबाबू नायडू सरकार के खिलाफ जारी संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया। इस साक्षात्कार के कुछ अंश इस प्रकार हैं।

सवाल: YS जगन पर हमले की जांच के मद्देनजर उच्च न्यायालय का विभाजन किया गया। जल्दबाजी में इसे विजयवाड़ा स्थानांतरित किया गया, इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब: मुझे इस बात का मतलब समझ में नहीं आ रहा है कि उच्च न्यायालय और विभाजन से मेरा क्या संबंध है? उच्च न्यायालय का विभाजन करने और आंध्र प्रदेश में स्थानांतरित करने की बात मैंने कभी नहीं कही है। मैंने इस तरह की मांग नहीं की है। मैंने इस संदर्भ में पत्र भी नहीं लिखा है। उच्च न्यायालय दस वर्ष तक हैदराबाद में रह सकता है।

चंद्रबाबू ने उच्च न्यायालय के अभी तक भवन का निर्माण नहीं किया है। स्थायी तौर पर भवन का निर्माण किये बिना ही कोई भी बुद्धिजीवी स्थानांतरित नहीं करने की बात कहेगा। इतना कुछ मालूम रहने के बावजूद चंद्रबाबू नायडू ने उच्च न्यायालय का किसी भी हालत में विभाजन बात करते हुए एफिडेविट सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किया है।

तेलंगाना सरकार ने उच्च न्यायालय के निर्माण यहां करने पर कोई आपत्ति जताई और आवश्यकता होने पर भवन भी उपलब्ध कराने की बात कही और एफेडेविट दाखिल किया। चंद्रबाबू नायडू के अनुरोध पर उच्च न्यायालय के स्थानांरण का आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को दिया। इस लेकर भी चंद्रबाबू राजनीति कर रहे हैं। कितना दुर्भाग्यपूर्ण है ऐसे विचार। इस तरह की कूटनीति करने वाला अन्य कोई व्यक्ति नहीं होगा।

सवाल: आप पर हमले से जुड़े मामले की जांच का जिम्मा केंद्र ने NIA को सौंपा। इस पर चंद्रबाबू ने बयान दिया। इस पर आप क्या कहेंगे?

जगन: आखिरकार हमला कहां हुआ... इस पर विचार करने जैसे कुछ अंश हैं। VIP लांज एक अत्यंत सुरक्षित क्षेत्र होता है। इस तरह के क्षेत्र में धारदार हथियार... सभी सुरक्षा को भेदते हुये अंदर कैसे आया? वहां काम करने वाले व्यक्ति ने उसे वहां कैसे लाया? वह व्यक्ति तेलुगू देशम पार्टी के समर्थक हर्षवर्धन चौधरी के रेस्टारेंट में कार्यरत था, इसलिए धारदार हथियार अंदर ला सका।

हर्षवर्धन चौधरी ने वर्ष 2014 में तेलुगू देशम पार्टी के टिकट की इच्छा जाहिर की थी। उसकी चंद्रबाबू नायडू से लेकर लोकेश और विशाखापट्नम पूर्व के विधायक रामकृष्णा चौधरी के साथ जान-पहचान है। हत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति ने बीते दिनों हत्या का प्रयास किया था और उसके खिलाफ मामला दर्ज है।

इस तरह के व्यक्ति को पुलिस ने कैसे NOC दिया? एक कदम आगे जा कर सोचते हैं तो हाल ही में न्यायालय द्वारा पूछे गये सवाल पर एक और पहलू उजागर हुआ। मेरी पदयात्रा के विशाखापट्नम में प्रवेश करते ही हवाई अड्डे पर लगे सीसी कैमरों ने काम करना बंद कर दिया। मुझ पर हत्या के प्रयास में हमला होने तक सीसी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। इतनी बड़ी कूटनीति के बावजूद मुझ पर हमला होने के बाद भी सरकार ने नजरअंदाज किया।

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हत्या के प्रयास में हमला होने के एक घंटे के भीतर DGP ने संवाददाता सम्मेलन में बयान दिया कि मेरे समर्थक ने ही मुझ पर हमला किया। YSR कांग्रेस पार्टी का समर्थक नीले रंग की फ्लेक्सी बनाता है, जबकि फ्लेक्सी पीले रंग की बनाई गई। उस पर गरुड़ पक्षी का फोटो क्या कोई बना सकता है? उस फ्लेक्सी को तत्काल में बनाया गया। मुझ पर जानलेवा हमला होने पर मैंने कभी चंद्रबाबू या किसी और के खिलाफ अनावश्यक आरोप नहीं लगाये हैं। पूरी तरह जानकारी मिले बिना, किसी के खिलाफ गलत बयान नहीं दिया जाना चाहिए। इसलिए मैं खामोश रहा।

प्रथमोपचार के बाद सभी के सामने ही मैंने अपना कुर्ता उतारा। बिना किसी से बात किये चुपचाप हैदराबाद चला आया और अस्पताल में भर्ती हो गया। इस पर भी बेमतलब के बयान दिये गये। इस तरह के बेमतलब बयान देना न्यायपूर्ण नहीं है। हमले की साजिश के पीछे किसका हाथ है? धारदार हथियार हवाई अड्डे के सुरक्षित क्षेत्र में कैसे आया? इन विषयों को लेकर प्रदेश सरकार पर आरोप लग रहे हैं। मामले की जांच प्रदेश सरकार के अधीन होने बावजूद पुलिस की जांच में वास्तव कैसे उजागर होगा?