09-10-2018, मंगलवार

जिन्नाम, विजयनगरम जिला

आज मेरी पदयात्रा चीपुरपल्ली निर्वाचन क्षेत्र पार कर तंग सड़कों से होते हुए गजपतिनगरम में प्रवेश कर गई। यहां की इन गांवों के लिए बस की सुविधा तक नहीं है। यहां के लोगों को अस्पताल और स्कूल जाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लोगिश सरकारी स्कूल की छात्राएं मुझसे मिलीं और अपनी स्कूल की समस्याएं सुनाईं।

छात्राओं ने कहा, 'मध्यान्ह भोजन में घटिया किस्म के चावल और सड़े हुए अंडे परोसे जाते हैं। स्कूल में न फैन है और ना बेंच। शौच की सही व्यवस्था तक नहीं है।' इस सरकार को कारपोरेट स्कूलों को लेकर जितना प्रेम है, उतना अगर सरकारी स्कूलों को लेकर भी रहा होता, तो आज उनकी हालत शायद ऐसा नहीं होता।

मुच्चेर्ला गांव में बढ़ाइयों ने अपनी परेशानी सुनाई और कहा कि अब उनका इस पेशे को आगे बढ़ाना मुश्किल है। उन्होंने कहा, 'लकड़ी के दाम के साथ-साथ बिजली के दाम भी बढ़ गए हैं। पिताजी के शासनकाल में बिजली के बिल 300 रुपए आता था, जो आज 1000 रुपए आने लगा है। ऐसे में कच्चा माल और उपकरण खरीदना भी मुश्किल है। किसी तरह का लोन नहीं मिल रहा है। अपना पेशा छोड़कर मजदूरी करने की स्थिति पैदा हो गई है।'

दोपहर में विनीता और नविता नामकी बहनें मुझसे मिलीं। जन्म से मूक और गूंगी इन बहनों को देखकर उनके माता-पिता की चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में पिताजी ने आरोग्यश्री योजना शुरू की। करीब 18 लाख रुपए मूल्य के काक्लीयर इंप्लांट ऑपरेशन मुफ्त में करवाया। अब ये दोनों अच्छी तरीके से बात कर पा रही हैं।

परंतु अब उन बच्चियों को सुनने की मशीन के रखरखाव में सालाना 30-30 हजार रुपए का खर्च हो रहा है। हर वर्ष करीब 60 हजार रुपए खर्च करना उस गरीब परिवार के लिए संभव नहीं है। इसीलिए कान की मशीनों के रखरखाव को भी आरोग्यश्री योजना के दायरे में लाने का मेरा संकल्प और भी मजबूत हुआ।

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लोगिश और जिन्नाम गांव में कई लोगों ने बताया कि उनके योग्य होने के बावजूद उन्हें पेंशन नहीं दिया जा रहा है। लोगों को अपने हक का पेंशन हासिल करने के लिए अदालत पहुंचना पड़ रहा है। रामुलम्मा नामक दलित महिला के पति की मौत होकर दो साल हो चुके हैं। उसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं होने से वह अकेली रह रही है।

विधवा पेंशन के लिए कार्यालय के चक्कर लगाते-लगाते चप्पल घिसने के बाद भी पेंशन नहीं मिल रहा है। दो वक्त की रोटी के लिए रोजगार गारंटी योजना में काम करते भी हैं तो मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। अपरिहार्य परिस्थितियों में लोग मजदूरी के लिए गोदावरी जिलों की तरफ पलायन कर रहे हैं। अगर ऐसी बेबस महिलाओं व लोगों को मदद नहीं मिलेगी, तो ऐसी योजनाएं और सरकार आखिर किसे चाहिए ?

मुख्यमंत्रीजी मेरा एक सवाल है...टीडीपी के मेनिफेस्टो में सभी हथकरघा और पेशेवरों को आदरणा योजना के जरिए मदद पहुंचाने का आश्वासन का क्या हुआ। वोट बैंक की राजनीति के लिए आपका झूठे आश्वसनों के जरिए कमजोर तबकों के लोगों को धोखा देना क्या सही है। क्या ये सच नहीं है कि राज्य में कोई जाति व समुदाय नहीं बचा, जो आपके खोखले आश्वासनों पर भरोसा करके धोखा नहीं खाया हो।

वाईएस जगन