09-08-2018, गुरुवार

डीजेपुरम, पूर्वी गोदावरी जिला

आज प्रतिपाडू निर्वाचन क्षेत्र के पारुपाका क्रॉस और डीजेपुरम ग्रामों में पदयात्रा संपन्न हुई। डीजेपुरम ग्राम के लिए बस या निजी वाहनों या अन्य कोई परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। सूचना की व्यवस्था शायद ही है। क्षेत्र के ग्रामवासी जान हथेली पर लेकर जीते हैं। ग्रामवासियों की इन हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि हम कौन से युग में हैं?

दोपहर शिविर के निकट प्रतिपाडू और तुनि निर्वाचन क्षेत्रों में काम करनेवाले 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा के कर्मचारियों ने मुझसे मुलाकात की। बदहाली में मौजूद 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा की बारे में उन्होंने मुझे बताया। कल इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुई दुर्घटना के बारे जब एक व्यक्ति जानकारी दे रहा था, तो उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुखी हुआ। यहां पर तोडंगी मंडल में कल एक महिला की हालत गंभीर हुई। परिवार के सदस्यों ने 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा को फोन किया। इस मंडल में 108 चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं होने से तुनि से 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा आने में काफी समय लगता है। पीड़िता को जिस वाहन में ले जा रहे थे, वह रास्ते में खराब हुआ तो अन्य वाहन आने में देरी हुई। इस बीच महिला की मौत हो गई। कितनी दयनीय स्थिति है। आर्थिक पिछड़ों के प्रति यह सरकार मानवीय रवैया नहीं अपना रही है।

उस महिला की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा को बेकार साबित करनेवाली क्या यही सरकार है? इस निर्वाचन क्षेत्र में चार मंडल होने पर रौतुलापुड़ी मंडल में गत चार वर्ष से 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा उपलब्ध नहीं है। प्रतिपाडू मंडल में 108 वाहन क्षतिग्रस्त होकर 8 महिने हो गए। एलेश्वरम में वाहन दस दिनों से शेड में ही है। शंखावरम में क्षतिग्रस्त वाहन की मरम्मत नहीं हो रही है। प्रदेश स्तर पर सभी निर्वाचन क्षेत्रों में 108 वाहनों की यही स्थिति है। इक्का दुक्का वाहन ही देखे जाते हैं। इनमें से कुछ वाहनों में ऑक्सिजन की सुविधा नहीं है तो कुछ में दवाइयां नहीं हैं। किसी वाहन को फिटनेस नहीं है। कहां पर कौन सा वाहन क्षतिग्रस्त होगा, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ करनेवाली घटनाओं के बावजूद यह सरकार लापरवाही बरत रही है। इस तरह की लापरवाही जानबूझकर बरती जा रही है।

आज विश्व आदिवासी दिवस है। रंपाचोड़ावरम से आए आदिवासी संप्रदाय के लोगों ने सिंगों से बनी टोपी पहनाई। गिरीजनों में मेरे प्रति सम्मान देखा। एजेन्सी क्षेत्र में गिरीजनों की ओर सरकार की लापरवाही को देखकर उदास हुआ। एजेन्सी क्षेत्र में इन चार वर्षों में पोषक आहार की कमी के चलते विषज्वर से हजारों लोगों की मौत होने पर बाबू को दया नहीं आ रही है। चुनाव के नजदीक आते ही चंद्रना गिरीपोषण के नाम पर आदिवासियों के साथ झूठा प्यार जताया जाता है। साढ़े चार वर्ष लोगों की ओर नजरअंदाजी कर प्रदेश के साथ धोखाधडी कर रहे चंद्रबाबू की सच्चाई पर लोग गौर कर रहे हैं। लोगों को चिकनी चुपडी बातें कर और उनमें खाई पाटकर फिर से उसी हाल पर छोड़ा जाता है। अगले पांच वर्ष तक आदिवासियों के नाम पर लूटखसोट करने की मंशा बाबू की होती है।

मुख्यमंत्री से मेरा सवाल- आप के मंत्री मंडल में आदिवासियों को क्या कोई स्थान नहीं हैं? राष्ट्रीय स्तर पर गिरीजनों में सर्वाधिक पोषक आहार की कमी वाला राज्य आंध्र प्रदेश है, क्या यह कहा नहीं जा सकता? पोषक आहार की कमी के चलते गिरीजन महिला एवं शिशु की मौत के लिए जिम्मेदार क्या आपका ही प्रशासन नहीं है? प्रदेश में मौजूदा लाखों गिरीजन छात्र-छात्राओं को आप के चार वर्ष के कार्यकाल के दौरान पोषक आहार नहीं मिला, क्या यह सही नहीं है? प्रदेश में 197 एसटी कल्याण छात्रावासों को बंद कर दिया गया। उनके स्थान पर क्या नए गुरुकुलों का निर्माण किया गया? गिरीजनों के लिए आपके हलफनामे के 25वें पन्ने (पेज) पर 20 आश्वासन दिए हैं, क्या इनमें से एक आश्वासन भी पूरा किया?

YS जगन मोहन रेड्डी