नई दिल्ली : आईआईटी स्नातकों और उनके वरिष्ठों का एक समूह 'मिड-समर', उनके द्वारा तैयार पूर्ण रूप से चालक रहित वाहन के दूसरे दौर के परीक्षण के लिये तैयार है और इसके सेंसर की जांच को लेकर वे एक बार फिर अपने अपने लैपटॉप की मदद से गुरुग्राम के बाहरी इलाके में कड़ी मेहनत में जुटे हैं।

बहरहाल, हाई-टेक रोबोटिक सिस्टम्ज लिमिटेड में इस तरह के परीक्षण के लिये उनके पास बेहद कम जगह है, बावजूद इसके यह कंपनी को उसके स्वचालित वाहन 'नोवस ड्राइव' के विकास से नहीं रोक पाया। पिछले साल ऑटो एक्सपो में नोवस ड्राइव का प्रदर्शन हुआ। इस कार में छह लोग सवार हो सकते हैं।

कार्नेगी मेलन यूनीवसर्टिी के पूर्व छात्र गौरव सिंह ने इस परियोजना पर करीब तीन साल लगाये हैं और गौरव के लिये इस वाहन की सवारी का अनुभव उनके लिये कुछ ऐसा है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ''यह जुनून है। अमेरिका नहीं बल्कि भारत में इस तरह के उत्पाद के साथ आना यह भी दिखाता है कि अपने लगन और मेहनत से हम क्या कुछ नहीं हासिल कर सकते हैं।''

वर्ष 2004 में अनुज कपूरिया ने इस कंपनी की स्थापना की थी। कार्नेगी मेलन यूनीवसर्टिी से अपनी पीएचडी की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर अनुज गुपचुप तरीके से बीते एक दशक से चालक रहित वाहन प्रौद्योगिकी के इजाद में जुटे थे। इस तरह के डोमेन में गूगल और टेसला जैसी कंपनियां शीर्ष पर हैं।