नई दिल्ली: चोट के कारण करीब दो साल के लंबे अंतराल के बाद वापसी करने वाली भारत की शीर्ष जिम्नास्ट दीपा करमाकर ने आज तुर्की के मर्सिन में चल रहे एफआईजी कलात्मक जिम्नास्टिक्स वर्ल्ड चैलेंज कप की वाल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्टार जिम्नास्ट दीपा करमाकर को तुर्की में एफआईजी कलात्मक वर्ल्ड चैलेंज कप की वाल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, "भारत को दीपा करमाकर पर गर्व है। तुर्की के मर्सिन में एफआईजी वर्ल्ड चैलेंज कप में वाल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर उन्हें बधाई। यह जीत उनकी हार नहीं मानने के रवैये और दृढ़ता का शानदार उदाहरण है।''

खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी दीपा की तारीफ करते हुए कहा कि उसने चोट के बाद वापसी करते हुए धमाकेदार वापसी की है। उन्होंने ट्वीट किया, "दीपा करमाकर एक दमदार चैम्पियन हैं। पिछले दो साल से चोट से जूझने के बाद उसने वापसी करते हुए तुकी में जिम्नास्टिक्स वर्ल्ड चैलेंज कप में अपना पहला पदक जीता। देश को गौरवान्वित करने के लिये उसे बधाई। ''

त्रिपुरा की 24 वर्षीय जिम्नास्ट 2016 रियो ओलंपिक में वाल्ट स्पर्धा में चौथे स्थान पर रही थी। उन्होंने आज 14.150 के स्कोर से स्वर्ण पदक हासिल किया। वह क्वालीफिकेशन में भी 13.400 के स्कोर से शीर्ष पर रही थीं। दीपा का यह वर्ल्ड चैलेंज कप में पहला पदक था। अपने कोच बिश्वेश्वर नंदी के साथ यहां आयी दीपा ने क्वालीफिकेशन में 11.850 के स्कोर से तीसरे स्थान पर रहकर बैलेंस बीम फाइनल्स के लिये भी क्वालीफाई किया।

यह भी पढ़ें:

हैदराबाद की जिमनास्ट अरुणा रेड्डी बनीं युवा लड़कियों के लिए आईकॉन

दीपा रियो ओलंपिक के बाद एंटीरियर क्रुसिएट लिगामेंट (एसीएल) चोट से जूझ रही थीं और उन्होंने इसके लिये सर्जरी करायी थी। पहले वह राष्ट्रमंडल खेलों में वापसी करने वाली थीं लेकिन रिहैबिलिटेशन में उम्मीद से ज्यादा समय के कारण वह गोल्ड कोस्ट में भाग नहीं ले सकीं। उन्हें आगामी एशियाई खेलों के लिये चुनी 10 सदस्यीय भारतीय जिम्नास्टिक्स टीम में शामिल किया गया है।