नई दिल्ली : महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता को साबित करने का दम दिखा रही हैं, फिर चाहे वह एक पैर से एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराना हो या पुरुषों के कंधों से कंधा मिलाकर देश की सीमा की सुरक्षा करना।

रविवार को मुंबई में आयोजित होने वाली टाटा मुंबई मैराथन में भी 40,000 से अधिक लोगों के बीच 9 मीटर की साड़ी पहने एक महिला अपने ही वर्ल्ड रिकॉर्ड को चुनौती देने उतरेगी।

हैदराबाद की रहने वाली जयंती संपथकुमार को ऐसा ही करते देखा जाएगा। वह पहली बार साड़ी में मैराथन नहीं दौड़ रही हैं। हैदराबाद में पिछले साल आयोजित हुई एयरटेल हैदराबाद मैराथन में ऐसा कारनामा कर चुकी हैं और इसी मैराथन में उन्होंने गिनीज रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था।

एयरटेल हैदराबाद मैराथन की 42 किलोमीटर मैराथन को जयंती ने चार घंटे 57 मिनट और 44 सेकेंड में पूरा किया था। वह ऐसा करने वाली विश्व की पहली महिला हैं।

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टाटा मुंबई मैराथन में भी रविवार को ऐसा नजारा देखने को मिलेगा। जब एक महिला नौ मीटर की साड़ी पहने हजारों की भीड़ में महिला सशक्तिकरण का साक्षात उदाहरण बनकर दौड़ेंगी।

जयंती ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "मैं टाटा मुंबई मैराथन में 40 किलोमीटर की फुल मैराथन में हिस्सा लूंगी और इस बार मेरा लक्ष्य इस मैराथन को साढ़े चार घंटे में पूरा करना है। यह आसान नहीं होगा, लेकिन मैंने लक्ष्य बना लिया है और इसे पूरा करने की मैं हर कोशिश करूंगी।"

हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में आईटी प्रबंधक के रूप में काम कर रहीं जयंती ने कहा, "मैं इस मैराथन में हथकरघा कला का प्रचार करूंगी। मैंने यह हैदराबाद मैराथन में भी किया था। मैं हथकरघा से बनी साड़ियां ही पहनती हूं और आज के समय में लुप्त होती इस कला को बढ़ावा देने के लिए मैं इसका प्रचार करूंगी।"

जयंती ने नौ साल पहले दौड़ना शुरू किया था। उनके लिए यह सब करना आसान नहीं था, लेकिन अपने लक्ष्य को पूरा करने की ठान चुकी जयंती ने पीछे हटने से मना कर दिया।

उनके इस सफर में उन्हें उनके पति और बच्चों के साथ-साथ माता-पिता का समर्थन भी मिला। 44 वर्षीया जयंती ने पांच किलोमीटर से दौड़ना शुरू किया था। अखबार में बिजनेस सूट में मैराथन दौड़ने वाले इंसान की खबर पढ़कर उन्होंने ठान लिया कि अगर वह ऐसा कर सकता है, तो साड़ी में दौड़ना असंभव नहीं।

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यहां से जयंती के लक्ष्य की शुरुआत हुई। अपनी दोस्त की मदद से उन्होंने नौ मीटर की साड़ी पहनकर दौड़ना सही समझा। उन्होंने जूतों में नहीं, बल्कि चप्पलों में हैदराबाद मैराथन में हिस्सा लिया। 2015 में उन्होंने हैदराबाद में 10 किलोमीटर मैराथन में हिस्सा लिया। इसके बाद जनवरी, 2016 से उन्होंने फुल मैराथन में दौड़ने का फैसला किया।

इसी साल उन्होंने हैदराबाद मैराथन में अपने लक्ष्य को हासिल किया और गिनीज रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया। मुंबई मैराथन में इस रिकॉर्ड को चुनौती देने के अलावा जयंती प्लास्किट बैगों का इस्तेमाल न करने के संदेश को भी दर्शाएंगी।

जयंती ने कहा, "मैं हथकरघा कला के अलावा टाटा मुंबई मैराथन में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल को खत्म करने का संदेश भी दूंगी। मैं पिछले आठ साल से इस उद्देश्य की ओर काम कर रही हूं। सभी जानते हैं कि इससे पर्यावरण को नुकसान होगा और ऐसे में इस ओर उठाया गया एक कदम पर्यावरण की सुरक्षा में अहम योगदान दे सकता है।"

जयंती अपने रोजमर्रा के जीवन में भी साड़ी ही पहनती हैं। कोर्पोरेट कंपनी में बड़ी-बड़ी बैठकों में पेशेवर पोशाक के बजाए जयंती साड़ी पहनकर भारतीय महिला के वजूद को दर्शाती हैं।

साड़ी पहने के बारे में जयंती ने कहा, "हर इंसान को वही कपड़े पहने चाहिए, जिसमें वह सहज महसूस करता है। मैं केवल यह दर्शाना चाहती हूं कि साड़ी एक ऐसा परिधान है, जिसे विशेष समारोहों के अलावा रोजमर्रा के जीवन में भी पहना जा सकता है। यह भी एक सक्रिय और फिट जीवनशैली को दर्शाती है।"

टाटा मुंबई मैराथन में दौड़ रहीं जयंती हजारों लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए दौड़ेंगी। उनकी यह दौड़ अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करेगी और ऐसी उम्मीद जताई जा सकती है कि इस मैराथन के अगले संस्करण में जयंती के अलावा अन्य महिलाएं भी साड़ी में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बन नजर आएंगी।