11-07-2018, बुधवार

ऊलपल्ली, पूर्वी गोदावरी जिला

कल पूरे दिन हुई बारिश की वजह से जलमग्न और कीचड़ भरी सड़कों से आज की पदयात्रा आगे बढ़ी। राज्य में सुख-शांति की बहाली, संस्कृति व साहित्य का विस्तार करने के उद्देश्य से राजा अनपोता रेड्डी के यहां शासन करने के कारण इसका नाम अनपर्ति बन गया है। एकीकृत आंध्र प्रदेश के पहले आस्थान कवि, भारत, भागवत और रामायण को संस्कृत से तेलुगु में अनुवाद करने वाले कवि श्रीपादकृष्णमूर्ति शास्त्री का जन्म भी अनपर्ती में ही हुआ था। आर्थिक रूप से सशक्त अनपर्ति पिछले चार सालों से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है।

मुख्यमंत्री के तौर पर चंद्रबाबू द्वारा किए गए पहले हस्ताक्षरों में बेल्ट शॉप्स रद्द का मसला भी एक शामिल था। हस्ताक्षर की पवित्रता को भंग कर चंद्रबाबू ने पहले हस्ताक्षर का महत्व ही खत्म कर दिया है। परिणामस्वरूप गरीबों की जिन्दगी कैसै छिन्न-भिन्न हो जाएगी, यह जानने के लिए यहां का पंदलपाका गांव एक जीता-जागता उदाहरण है। यहां मुझसे मिली तीन महिलाओं की दर्दभरी कहानियों सुनने के बाद पता चला कि यहां शराब नदी बनकर किस तरह गरीबों की जिन्दगियों को तहस-नहस कर रहा है।

एक बच्चे को गोद में लेकर पहुंची बहन लक्ष्मी ने आंसू बहाते हुए अपना दुखड़ा सुनाया। उसका पति बैगों की फैक्ट्री में मजदूर है, लेकिन वह अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा केवल शराब पर खर्च कर देता है। इसको लेकर घर में हर दिन झगड़ा होता है। बच्चों की स्कूल फीस तक शराब की भेंट चढ़ रही है। लक्ष्मी रोते हुए बोली, अन्ना, 'और कब तक हमारी जिन्दगी ऐसे ही चलेगी। क्या पूरी जिन्दगी इन्हीं परेशानियों से गुजरनी होगी। रोज-रोज की समस्याओं से तंग आ गए हैं और हमें अब जीने की इच्छा तक नहीं है।' छोटी सी उम्र में जिन्दगी बोझ बन जाने की उस बहन की बातें सुनकर बहुत दुख हुआ। वह बहन कितनी परेशान है जो आज जीने से अच्छा मर जाना पसंद कर रही है।

हर गली में बने हैं बेल्ट शॉप्स

लक्ष्मी ने कहा, 'अन्ना जिस गली में बेल्ट शॉप्स होती हैं, उस रास्ते से गुजरने में डर लगने लगा है। शराबियों की छेड़खानी और गंदी हरकतों को सहन करना मुश्किल है। ये समस्या केवल मेरी एकली की नहीं है बल्कि मेरे जैसे कई महिलाएं गांव में हैं। बहन जयम्मा ने अपना दर्द सुनाते हुई बोली की उसका बेटा छोटी से उम्र में शराब की आदी बनकर विभिन्न बीमारियों के शिकार होकर जिन्दगी और मौत से जूझ रहा है।

अपनी हैसियत से अधिक खर्च कर किसी तरह बेटे को बचा तो लिया है, लेकिन उसने आज भी शराब नहीं छोड़ी है। आंखों के सामने बेटे को बर्बाद होते नहीं देख पा रहे हैं। सड़क हादसे का शिकार पति काम नहीं करने की स्थिति में है। ऐसे में परिवार का सहारा बनने वाला बेटा भी हमपर निर्भर होकर जीने लगा है। ऐसे में हम आखिर किसकी मदद लें। नौ महीने तक अपनी कोख में रखने के बाद जन्म देने के साथ ही बेटे को पाल-पोसकर बढ़ा किया, लेकिन वही बेटा परिवार के साथ खड़े होने के बजाय परिवार पर बोझ बन गया है।

बहन वरलक्ष्मी ने बताया कि उसका पति शराब पीकर आवारा घूमते हुए परिवार के लिए बोझ बन हुआ है, ऐसे में हमें यह नहीं सूझ रहा है कि आखिर हम करें तो क्या करें। उसने कहा, अन्ना, 'हमारे बेटे को बचपन में जब दिल की बीमारी हुई थी तो हम सभी आस छोड़ दिए थे। इलाज में 5 लाख रुपये का खर्च बताया गया तो सोचने लगे की आखिर भगवान नें आखों के सामने बेटे को मरते देखने का दुर्भाग्य हमें क्यों दिया है।

तभी भगवान जैसे आपके पिताजी ने मुफ्त में मेरे बेटे का इलाज करवा दिया। वही बेटा आज मेहनत से मजदूरी कर पूरे परिवार सहारा बना हुआ है। अगर उस दिन भगवान के रूप में राजशेखर रेड्डी नहीं होते तो आज मेरे बेटा नहीं होता। यही नहीं, अगर बेटा नहीं बचता तो आज हमारा यह परिवार भी नहीं बचा होता। उस दिन पिताजी से मिली मदद ही आज हमें मुश्किलों के भवंडर से निकाल पा रही है। पंदलपाका में केवल इन तीन महिलाओं की नहीं बल्कि सैकड़ों बहनों की यही कहानी है।

चाहे कितने भी परिवार बर्बाद हो...चाहे कितनी जिन्दगियां नष्ट हो, मेरे लिए सिर्फ पैसा महत्वपूर्ण मानने वाले मुख्यमंत्रीजी को क्या इन बहनों के आंसू नजर नहीं आते ? क्या उन बहनों के दिल के दर्द को बाबू महसूस भी कर पाते हैं?

मुख्यमंत्रीजी मेरा एक सवाल है...बेल्ट शॉप्स रद्द करने का मुद्दा आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद किए गए पहले पांच हस्ताक्षरों में से एक था। परंतु आज राज्य में क्या ऐसा कोई गांव है जिसमें बेल्ट शाप्स् नहीं है? आपके चुनावी घोषणा पत्र के पन्ना नंबर 16 पर लिखा गया था कि हर जिले में एक डीएडिक्शन सेंटर खोला जाएगा, लेकिन क्या आपने एक भी सेंटर खोला है? राज्य के लोगों को गवाह मानते हुए आपके द्वारा किए गए पहले हस्ताक्षरों पर खरा नहीं उतरना क्या पांच करोड़ आंध्रवासियों के साथ विश्वासघात नहीं है? दिया हुआ एक भी आश्वासन पूरा नहीं करने वाले आपके मेनिफेस्टों की क्या अहमियत है?

वाईएस जगन