07-07-2018, शनिवार

पसलपूड़ी, पूर्वी गोदावरी जिला

रामचंद्रापुरम निर्वाचन क्षेत्र में प्रजा संकल्प यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के साथ बारिश भी यात्रा का अनुसरण कर रही थी। आज भी बारिश की बूंदों के बीच अपने आत्मीय लोगों से मिलते और उनकी समस्याएं सुनते हुए मैंने अपने कदम आगे बढ़ाए।

नेलपर्तिपाड़ु पंचायत के लोगों ने कहा, 'सत्ता में रहे लोगों की संकुचित भावना हमारे लिये किस तरह उनके लिये श्राप बन गया है। टीडीपी जब भी सत्ता में होती है हमें इस तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती है। 1994 से 2004 तक करीब दस वर्षों तक उन गांवों को सड़क की सुविधा तक नहीं थी। वर्ष 2005 में पिताजी द्वारा बनवाई गई सड़क ही अत्यधिक कमजोर और गरीब रहने वाले उन सभी गांवों के लिए वरदान साबित हुई है

। अब उन गांवों के लोग उस सड़क को पिताजी का नाम रखने के साथ ही उनके नाम का आर्ची तक की व्यवस्था कर ली है। परंतु टीडीपी नेताओं को गांव वालों की यह कार्रवाई नहीं भा रही है। जीपीसीएल तेल कंपनी के भारी वाहनों की आवाजाही की वजह से सड़क खराब हो गई है। वर्ष 2014 में उस तेल कंपनी ने कार्पोरेट सोशल रेस्पान्सिबिलिटी निधि स्वरूप एक करोड़ रुपये मंजूर कर सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया था, लेकिन उस वर्ष टीडीपी का सत्ता में आना उन गांवों के लिए श्राप साबित हुआ।

टीडीपी वालों ने जबरन सड़क मरम्मत के काम रुकवा दिए हैं। सड़क को पिताजी का नाम रखने की शिकायत पर 10 गांवों और 7-8 हजार लोगों को परेशान करना सरकार के पक्षपात की पराकाष्ठा को दर्शाती है। बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने में भी भेदभाव और राजनीतिक दुश्मनी क्या सही है ? क्या टीडीपी को वोट नहीं देने वालों को पराया की तरह देखते हैं ? क्या उनके साथ दुश्मन की तरह बर्ताव करते हैं?

चर्मकार संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि चंद्रबाबू ने उनके साथ विश्वासघात किया है, वहीं मादिगा पोराटा समिति के लोगों ने कहा कि बाबू पर राजनीतिक स्वार्थ के लिये किसी भी हद तक जाने का आरोप लगाते हुए बाबू की कुटिल राजनीति के प्रति आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने, ' दो भाइयों की तरह मिलकर रह रहे माला-मादिगाओं के बीच झगड़ा लगवाया। दोनों में दुश्मनी पैदा कर वोट बांटने की घटिया राजनीति को अंजाम दिया। माला और मादिगा दोनों के साथ विश्वासघात किया। चुनाव से पहले ढपली बजाने और चप्पलें सीकर खुद को सबसे बड़ा मादिगा बताने की कोशिश की। परंतु मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद यह कहते हुए अनुसूचित जाति के लोगों का अपमान किया कि क्या कोई जन्म से दलित होना चाहेगा।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही बहन साई त्रिवेणी को हाल ही में वोट देने का अधिकार मिला है। वह खुशी से मेरे पास आकर बोली, 'अन्ना, मेरा वोट आप ही को दूंगी। विशेष दर्जे के लिए पूरी निष्ठा के साथ संघर्ष कर रहे आपके साथ युवा पीढ़ी खड़ी होगी।'

आज बारिश के बाद भी दिव्यांग बड़ी संख्या में आकर मुझसे मिले। उनकी परेशानियां सुनकर लगा कि यह सब शासकों के भेदभाव का नतीजा है। मारीशेट्टी रुतम्मा नामक बहन जब मैं ओदार्पु यात्रा में था, तब उसने मेरे हाथों अपने बेटे का नाम पिताजी का नाम रखवाया था और उसे पूरे सात साल हो गए हैं, लेकिन उस दिव्यांग के प्रति शासकों का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ है। बहन मारीशेट्टी का पेंशन रोकने के अलावा उसका राशन कार्ड से भी वंचित कर दिया गया है।

टीडीपी नेताओं की अराजकता का जिक्र करते हुए बेबस बहन अचानक रो पड़ी। करीब 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बाद भी अब्बयम्मा नामक महिला को पेंशन नहीं मिल रहा है। उनकी परेशानियां देखकर मैं हैरान रह गया। योग्य गरीब पेंशन नहीं मिलने की शिकायत लेकर हर दिन मुझसे मिलकर अपनी परेशानियां साझा कर रहे हैं। परंतु चंद्रबाबू नायडू सभी चुनावी वादे पूरे करने और पार्टियों से ऊपर उठकर सभी योग्य लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री जी मेरा एक सवाल...लोकतंत्र ने लोगों को अपने पसंद के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार दिया है। उस अधिकार का आपके खिलाफ इस्तेमाल करने की शिकायत पर लोगों से बदला लेना और उनके साथ भेदभाव करना क्या लोकतंत्र का मजाक उड़ाना नहीं है। हमारी पार्टी के विधायकों व सांसदों को भ्रष्टाचार से अर्जित राशि से मेले में पशुओं की तरह खरीदना और उनमें से कुछ को मंत्री पद दे चुके आप से लोग इससे ज्यादा की उम्मीद भी क्या कर सकते हैं?

वाईएस जगन