हैदराबाद : कहते हैं कि महान लोग कभी नहीं मरते। वे अपने काम, आदर्शों और उपलब्धियों के लिए हमेशा याद किए जाते रहते हैं। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि.."मेरा जीव ही मेरा संदेश है।" यह बात डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी के बारे में भी सच साबित होती है। वाईएसआर का नाम आज भी जनमन में वैसा ही लोकप्रिय है, जैसे वह अपने अपने कार्यकाल में अपने कार्यों की वजह से थे।

आज भी आप तेलुगु भाषी राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में जहां भी जाएंगे वहां डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी किसी न किसी रूप में जरूर मिल जाएंगे। दोनों राज्यों में ऐसा माना जाता है कि कम से कम एक हजार प्रतिमाएं गांवों व शहरों में स्थापित हैं। इसके अलावा वह जहां मूर्ति के रूप में नहीं होंगे वहां पर उनकी अरोग्याश्री, इंदिराअम्मा आवास योजना, शुल्क प्रतिपूर्ति योजना, जलयज्ञम, मुफ्त बिजली की आपूर्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के जरिए मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ मन मस्तिष्क में छा जाएंगे।

लोगों की फरियाद सुनते YSR
लोगों की फरियाद सुनते YSR

डॉ.वाईएसआर ने अपनी दूरदर्शी सोच के चलते न केवल बुजुर्गों की पेंशन के बारे में सोचा, बल्कि अपने डॉक्टरी पेशे के अनुभवों के द्वारा गरीब व कमजोर तबके के लोगों को बीमारी के दौरान उठाए जाने वाले छोटे-छोटे कष्टों को महसूस करते हुए उनके निवारण के लिए स्वास्थ्य संबंधी योजना बना डाली। वाईएसआर की अग्रणी योजनाओं में से एक जलयज्ञम सिंचाई परियोजना थी, जिसके जरिए कृषि के विकास में मदद मिली। YSR ने इस योजना के दम पर एपी को 'स्वर्ण आंध्र प्रदेश' में बदलने का सपना देखा था।

जनता के साथ YSR
जनता के साथ YSR

YSR ने टीडीपी के शासनकाल में सरकारी अस्पतालों और उनके द्वारा दी जा रही सुविधाओं की बदहाली देखी थी और एक चिकित्सक के रूप में महसूस किया था कि गरीबी से जूझ रही जनता को कैसे इलाज जैसी मूलभूत सुविधा का हक दिलाया जाय। तब उन्होंने बीपीएल परिवारों के लिए अरोग्यश्री स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम शुरू करवाया, जिसके माध्यम से वे 2 लाख रुपये की अधिकतम सीमा तक मुफ्त उपचार का लाभ उठा सकते थे।

इंदिरा अम्मा आवास योजना के जरिए आवासहीन लोगों के लिए एक सुंदर घर का सपना देखा था और योजना को लागू करके ग्रामीण आंध्र प्रदेश में लाखों बेघर लोगों को एक निवास स्थान देकर गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर दिया। तो वहीं दो रुपये में एक किलोग्राम चावल देने की योजना शुरू करने के पीछे लक्ष्य यह था कि लाखों गरीबों को भूखा न रहना पड़े और किसी को भूख के चलते मौत को गले न लगाना पड़े।

उन्होंने शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के माध्यम से राज्य में शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ समाज के सबसे गरीब वर्गों में शिक्षा के स्तर को सुधारने का सपना देखा था। वह चाहते थे कि गरीबी में जीने वाले परिवारों के बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार मिले। वाईएसआर युग के दौरान, इस योजना ने वंचित लोगों के लिए कॉलेज की ट्यूशन फीस की पूर्ण प्रतिपूर्ति प्रदान की। इसके कारण मुख्यमंत्री राज्य के लोगों में तेजी से लोकप्रिय होते गए।

जगन मोहन के साथ YSR
जगन मोहन के साथ YSR

उनकी सभी योजनाओं का उद्देश्य केवल सस्ती राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि राज्य में हर नागरिक को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं रोटी,कपड़ा और मकान के साथ-साथ उपचार से वंचित न रहना पड़े। हालांकि मौजूदा सत्तारूढ़ टीडीपी सरकार मनमाने फैसले लेते हुए उनकी कई अनुकरणीय योजनाओं को नजरंदाज करती रही है।

अगर आंध्र प्रदेश के मौजूदा हालात को देखें तो पता चलेगा कि राज्य के नेतृत्व व उसके शीर्ष नेताओं में राज्य की हितों के मद्देनजर केन्द्र सरकार में पैरवी करने की न तो सकारात्मक मंशा है और न ही व राजनीतिक ताकत। यह बात आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न दिला पाने की बात से साफ हो जाती है, जबकि लगभग 4 साल तक चंद्रबाबू की टीडीपी भाजपा की केन्द्र सरकार की सहयोगी पार्टी रही है। कडप्पा स्टील प्लांट या विजाग रेलवे जोन जैसे मुद्दों को भी केवल राजनीतिक लाभ के लिए ही उठाया जा रहा है। अगर इनकी नीयत साफ होती और राज्य के हितैषी होते तो सरकार में रहने के दौरान 4 साल तक इन मामलों पर चुप्पी न साधे रहते।

लोगों की यादों में बसे डॉ वाईएसआर ने अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों/ अनुसूचित जनजातियों और बीसी समेत समाज के तमाम पिछड़े वर्गों के लिए जो किया वह आज भी बेमिसाल है। इस बात को लोग आज भी महसूस करते हैं और लाखों लोग वाईएस जगन की पदयात्रा में इस बात का लगातार जिक्र कर चुके हैं।

यहां एक बात का और भी जिक्र करना जरूरी है कि तेलंगाना विधानसभा में एआईएमआईएम के सदन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक से अधिक अवसरों पर इस बात को दोहराया है कि 'कोई अन्य राजनीतिक नेता नहीं, अकेले वाईएसआर और सिर्फ वाईएसआर हैं, जिन्होंने मुस्लिम समुदाय को 4% आरक्षण दिया था।'

आंध्र प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में वाईएसआर अकेले ऐसे राजनेता हैं, जिनके कद व सम्मान के सामने कोई और राजनेता खड़ा नहीं हो सकता है। आज भी तेलुगु भाषी दोनों राज्यों के लोगों के लिए डॉ वाईएसआर अपने आदर्शों और अपने कार्यों के जरिए अनुकरणीय कहे जाते हैं। अब आंध्र की जनता उनके बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी में उनका प्रतिबिंब देखती है।