हैदराबाद : राजनेता तो बहुत सारे होते हैं पर बहुत कम राजनेता ही जननेता बन पाते हैं। वास्तव में वही राजनेता, जननेता बन पाता है, जिसके दिल में राज्य की जनता के प्रति लगाव हो और वह अपने पद व कुर्सी के बजाय हमेशा अपने राज्य की जनता के बारे में सोचता हो। कुछ ऐसे ही थे आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी।

डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजनेता थे, जिन्हें एक दूरदर्शी जननेता, एक प्रतिभाशाली वक्ता था और नेतृत्व करने की विलक्षण प्रतिभा का धनी कहा जाता था। इन सभी विशेषताओं के वाबजूद उनके मन में राज्यवासियों के प्रति हमेशा उदारता झलकती थी। इसी वजह से तेलुगू बोलने वाले लोग, चाहे व आंध्र में रह रहे हों या तेलंगाना में, आज भी डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी की पूजा करते हैं।

पदयात्रा करते YSR
पदयात्रा करते YSR

Yeduguri Sandinti राजशेखर रेड्डी को प्यार से वाईएसआर के रूप में जाना जाता है। वह एक ऐसे शख्स थे, इनके नजदीक जो भी आया या जुड़ा वह उनका होकर रह गया। कहते हैं कि उनकी नजर में जाति, धर्म और भाषा की संकीर्णता कोई मायने नहीं रखती थी। अपने कार्यकाल में शुरू की गई कई योजनाओं और परियोजनाओं द्वारा देश के सामने अनुकरणीय मॉडल पेश करने के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा।

डॉ.वाईएसआर की शुरू की गई योजनाओं में सबसे उल्लेखनीय योजनाओं में आरोगश्री, यूनिवर्सल हेल्थकेयर स्कीम और शुल्क प्रतिपूर्ति की योजना शामिल है। YSR का यह मानना था कि गरीब छात्रों का सशक्तिकरण ही विकास की आधारशिला है। फीस प्रतिपूर्ति योजना YSR के दिमाग की उपज थी और इसके जरिए समाज के वंचित वर्गों के हजारों गरीब छात्रों को लाभ हुआ।

विपक्ष के मौजूदा नेता और डॉ वाईएसआर के बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी की प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान आए दिन सैकड़ों लोगों ने इस योजना से मिले लाभ व उससे उनके जीवन में आए परिवर्तन के बारे में अपना सुखद अनुभव सुनाया। लोगों ने कहा कि वे फीस प्रतिपूर्ति योजना की वजह से अच्छी शिक्षा हासिल करने के अपने सपने को पूरा कर सके। आज उसी शिक्षा के बदौलत परिवार का भरण पोषण कर पा रहे हैं।

गरीबों से रूबरू होते YSR
गरीबों से रूबरू होते YSR

अरोग्यश्री योजना देश एक अग्रणी हेल्थकेयर स्कीम की पहल थी, जिसकी सफलता को देखकर अन्य राज्यों ने आंध्र प्रदेश से बहुत कुछ सीखा और इस योजना को अपने राज्य में लागू करने की प्रेरणा पायी। गरीब और कमजोर तबकों के लोग वाईएसआर को उनकी दूरदृष्टि के लिए आज भी याद करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं।

तेलुगुभाषी इलाकों में आए दिन लोग आपको यह कहते हुए मिल जाएंगे कि अरोग्यश्री योजना के कारण मेरी इस बड़ी बीमारी का इलाज हो पाया नहीं तो पैसे के अभाव में हम जैसे लोग तो घरों में ही दम तोड़ देते हैं। आरोग्यश्री योजना की सफलता की कहानी अगर जाननी हो तो आप उन इलाकों में जाइए, जहां पहले स्वास्थ्य सेवाएं नहीं थी और लोग गरीबी के चलते बड़ी बीमारी तो दूर छोटी-छोटी बीमारियों का भी उपचार नहीं करा पाते थे।

डॉ.वाईएसआर को पता था कि पानी राज्य के लोगों की जीवन रेखा है..चाहे वह खेती-किसानी के जानकार हों या यहां के बड़े-बड़े लोग। सबको मौजूदा जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए जलयज्ञम जैसी एक व्यावहारिक व व्यापक योजना बनाने का फैसला किया। इस योजना के तहत उनका प्लान था कि राज्य की 82 लाख एकड़ भूमि सिंचित हो जाय। यह वाईएसआर की दूरदृष्टि ही थी कि जिसने किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सिंचाई परियोजनाओं की आवश्यकता पर विचार किया और साथ ही साथ राज्य के कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी शानदार पहल की।

जलयज्ञम के कारण सिंचाई परियोजनाओं और जलाशयों के निर्माण को सुनिश्चित कराया जा सका और राज्य में किसानों की आत्महत्या पर रोक लग सकी। इसके साथ ही साथ राज्य की सिंचाई और कृषि योग्य भूमि में भी विस्तार संभव हो सका।

इंदिराअम्मा आवास योजना भी डॉ वाईएसआर की एक विजनरी परियोजना थी, जिसका लक्ष्य राज्य के हर गरीब नागरिक को छत प्रदान करना था। आंध्र प्रदेश के इतिहास में गरीबों को आवास देने के लिए ऐसी कोई शानदार योजना नहीं थी।

इसी तरह की तमाम योजनाओं के लिए वाईएसआर के शासन को मानवीय दृष्टिकोण वाला मानव हृदयस्पर्शी कहा जाता है। उनका लक्ष्य था कि विकास व जनकल्याणकारी योजनाएं गरीब से गरीब जनता तक जरूर पहुंचे और लोगों को इसका लाभ भी जल्द से जल्द मिले, जिससे वे खुद को समाज की मुख्यधारा में जोड़ सकें और वे भी एक सम्माननीय नागरिक की तरह अपना जीवन यापन कर सकें।

आज का दिन उस महान दूरदर्शी जननेता को याद करने का है, जो आज हमारे बीच भले ही मौजूद नहीं हैं, लेकिन आज भी उनके कार्यों और उनकी योजनाएं जैसे ही याद आती हैं वह आसपास खड़े नजर आते हैं।